Sunday, July 12, 2015

उत्तर प्रदेश की वीर रस गायनशैली आल्हा....

हमारे गांव में बारिश के मौसम में आल्हा बहुत सुना जाता है। यह एक बुंदेलखण्डी भाषा में गाया जाने वाला वीर रस का काव्य है। 
"नदिया बही खून की धार"
"भुजा फडकि रहि है ऊदल की"
जैसी पंक्तियाँ बताती हैं इसका जोश। हमारे यहां तो एक ठाकुर लडके ने आल्हा की एक लाइन सुनकर जोश में आकर अपने पिता के कातिल को मार दिया था।
वो लाइन थी, "जिनके लडिका समरथ हुइ गए, उनका कौन पडी परवाय।"
पौराणिक कथाओं के अनुसार जालौन जिले में ऐतिहासिक स्थलों का अलग महत्व है। कभी दिल्ली, कन्नौज और महोबा की रियासतों के केंद्र रहे एट थाना क्षेत्र का बैरागढ़ अकोढ़ी में दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान और महोबा के आल्हा, ऊदल की आखिरी लड़ाई हुई थी। मान्यता है कि आल्हा को मां शारदा का आशीर्वाद प्राप्त था। लिहाजा पृथ्वीराज चौहान की सेना को पीछे हटना पड़ा। मां के आदेशानुसार आल्हा ने अपनी साग (हथियार) यहीं मंदिर पर चढ़ाकर नोक टेढ़ी कर दी थी। जिसे आज तक कोई साधा नहीं कर पाया है। मंदिर परिसर में ही तमाम ऐतिहासिक महत्व के अवशेष अभी भी आल्हा व पृथ्वीराज चौहान की जंग की गवाही देते हैं। 
एट से आठ किलोमीटर दूर मां शारदा में श्रद्धालुओं का तांता लगा था। साधक तंत्र साधना में लीन थे। पुजारी शारदा शरण ने मंदिर बताया कि उनके पूर्वज 1433 ईसवी से मंदिर की पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। मां शारदा शक्ति पीठ का उल्लेख दुर्गा सप्तसती में भी है। मान्यता है कि पृथ्वी की मध्य धुरी बैरागढ़ में है। कहते हैं कि मां शारदा की मूर्ति की किसी ने स्थापना नहीं की है। यह जमीन से अपने आप ही उदय हुई है। जब महोबा के राजा परमाल के ऊपर पृथ्वीराज चौहान की सेना ने हमला किया तो उनके वीर योद्धा आल्हा ने पृथ्वीराज चौहान से युद्ध के लिए बैरागढ़ में ही डेरा डाल रखा था। यहीं वह पूजा अर्चना करने आए तो मां ने साक्षात दर्शन देकर उन्हें युद्ध के लिए सांग दी। काफी खून खराबे के बाद पृथ्वीराज चौहान की सेना को पीछे हटना पड़ा। युद्ध से खिन्न होकर आल्हा ने मंदिर पर सांग चढ़ाकर उसकी नोक टेढ़ी कर वैराग्य धारण कर लिया। मान्यता है कि मां ने आल्हा को अमर होने का वरदान दिया था। लोगों की माने तो आज भी कपाट बंद होने के बावजूद कोई मूर्ति की पूजा कर जाता है। बहरहाल आस्था व शक्ति की प्रतीक मां शारदा के हर नवरात्रि पर लाखों लोग दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं। 
शारदा शक्ति पीठ के ठीक पीछे बने कुंड के बारे में मान्यता है कि इसमें एक बार स्नान करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। यह कुंड कभी खाली नहीं हुआ है और न ही कोई उसे खाली कर पाया है। इस कुंड में अब तक न जाने कितने चर्मरोगी स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। कई बार पंप से कुंड को खाली करवाने का प्रयास किया गया है लेकिन कभी भी कुंड खाली नहीं हुआ। आज तक कोई भी कुंड की गहराई नहीं नाप सका है। पृथ्वीराज चौहान और आल्हा ऊदल के बीच 52 बार युद्ध हुआ और हर बार पृथ्वीराज की सेना को भारी क्षति हुई। बुंदेली इतिहास में आल्हा ऊदल का नाम बड़े ही आदर भाव से लिया जाता है। बुंदेली कवियों ने आल्हा का गीत भी बनाया है। जो सावन के महीने में बुंदेलखंड के हर गांव गली में गाया जाता है। जैसे पानी दार यहां का पानी आग, यहां के पानी में शौर्य गाथ के रूप से गाया जाता है। यही नहीं बड़े लड़ैया महोबे वाले खनक-खनक बाजी तलवार आज भी हर बुंदेलों की जुबान पर है। राजा परमाल की बेटी बेला का पृथ्वीराज की सेना ने अपहरण करने की धमकी दी थी। जिस पर कीरत सागर के मैदान में महोबा व दिल्ली की सेना के बीच युद्ध हुआ। इसमें पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई और आल्हा ऊदल की सुरक्षा में बेला ने सावन के बाद पड़ने वाले त्योहार भुजरियां सागर में विसर्जित की।

आखिर चुप क्यों हैं मोदी जी?

मोदी के चुप रहने पर विपक्ष और निष्पक्ष मीडिया का एक धडा बहुत आवाजें बुलंद कर रहा है, जिसे भाजपा या उसके समर्थक बेकार और ओछी राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। जैसा कि आप कानून मंत्री सदानंद गौड़ा का बयान सुन चुके हैं, जिनकी नजर में व्यापं घोटाला कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।
यहाँ पर बात केवल एक मुद्दे की हो तो कोई बात नहीं लेकिन पूरी की पूरी व्यवस्था और सरकार फेल होती दिख रही है, सरकार के फेल होने से मेरा अर्थ है कि कांग्रेस के विरोध में सत्ता में आकर ठीक उसके जैसा ही रवैया कुछ तो निराश करता ही है। मैं फिलहाल इस हालात में नहीं हूँ क़ि मोदी को ही भ्रष्टाचारी कह सकूं, और मेरा निजी मानना है, कि उन्हें सम्प्रदायिक कह लो, तानाशाह कह लो, लेकिन अभी तक अपने राजनैतिक करियर में भ्रष्टाचार से बचकर रहे हैं। उम्मीद है आगे भी ऐसा होगा। लेकिन उनकी नियत कितनी सॉफ है इसपर जरूर चर्चा होनी चाहिए। अगर उनकी नियत सॉफ है तो क्यों नहीं अपने भ्रष्ट मंत्रियों को निकालकर बाहर का रास्ता दिखाते हैं? क्यों नहीं किसी भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हैं। एक छोटा सा ट्वीट तो कर सकते हैं कि जांच निष्पक्ष हो रही है, और मैं देश की जनता को भरोसा दिलाता हूँ कि कोई भी गलती करने वाला बक्सा नहीं जाएगा। वैसे तो क्रिकेट, मन की बात और योगा पर जमकर बोलते और ट्वीट करते रहते हैं। आपको एकबार तो जनता को भरोसा दिलाना चाहिए। क्योंकि जनता ने राजनाथ, अरुण जेटली या आपके प्रवक्ताओं को वोट नहीं दिया था। आप खुद बोलते थे, कि  आप कमल का बटन दबाइए, आपका वोट सीधा मुझे जाएगा। इसलिए अब आपको जवाब तो देना चाहिए।
पहले ललित मोदी का केश आया, जिसमे कांग्रेस के भी कुछ नेता घिरे हुए हैं, लेकिन कांग्रेस के भ्रष्ट हैं तो आप भी वैसा करने के अधिकारी हो गए क्या? उनकी सजा के रूप में 44 सीटें मिली थी, अब आप सत्ता में हैं, आप तो उनसे कुछ अलग कीजिए। पहले सुषमा स्वराज ने ललित मोदी की मदद की, जिसे आपकी पार्टी ने मानवीय आधार पर की गई मदद बता दिया। अरे ऐसा कैसे हो सकता है कि देश के कानून के भगोड़े की मदद आप कर दें, और उसे डिफाइन करे? इतनी ही मानवता और किसी के उपर क्यों नहीं दिखती है? फिर उनके ही विदेश मंत्रालय ने ललित मोदी का पासपोर्ट बनवाने में मदद की जो हाईकोर्ट ने पहले रद्द किया था। इसके बाद वसुंधरा राजे के सम्बंधों का खुलासा होता है। वसुंधरा राजे को तो आपकी पार्टी ही दोषी मान चुकी है, क्योंकि 5-6 दिन तक पार्टी प्रवक्ताओं ने उनका बचाव करने से मनाकर दिया था। जिसका अर्थ है कि उनका अपराध प्रथम दृष्टया तो दोषपूर्ण है। वो तो भला हो कि राजस्थान बीजेपी में उनकी पकड इतनी गहरी है कि इस्तीफा नहीं देना पड़ा, वैसे संघ का फैसला अभी नहीं आया है। आगे कुछ भी हो सकता है। क्योंकि वसुंधरा राजे ने लन्दन के कोर्ट में लिखित हलफनामा दिया था जिसमें उन्होने अपने पद(राजस्थान विधानसभा की तात्कालीन नेता विपक्ष) का अस्वासन और जिक्र करते हुए, उनके लिए गवाही दी थी। इतने बड़े आरोपी की कोई मदद कर दे, और आप के कान पर जूँ तक ना रेंगे। अरे ये वही ललित मोदी हैं, जिनको आपके वर्तमान वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली समिति ने दोषी करार दिया था। फिर उसी अपराधी को वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह का साथी कारोबारी बताया जाता है। हवाला का काला पैसा पहले मारिसस जैसे टैक्सफ्री देशों में लेजाकर एक कम्पनी खोली गई, फिर उस कम्पनी से दुष्यंत सिंह की कम्पनी ने करोड़ों का अन्सिक्योर लोन(बिना किसी लिखापढ़ी और बिना ब्याज का लोन, जो अक्सर पारिवारिक लोगों के भरोसे पर दिया जाता है।) लिया, फिर उस लोन को वापस करने के लिए 10 रुपए के शेयर एलॉट किए, जो ललित मोदी ने करीब 10 हजार रुपए में खरीदे। सोंचिए अगर 10 रुपए का लोन 10 हजार में बिकने लगा तो शेयर मार्केट में तहलका मच जाएगा। जो दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला होगा। लेकिन इस मामले में ऐसा हुआ।
अब वसुंधरा जी के सुपुत्र एक नए मामलें में फंसते हैं, वो मामला है जयपुर के राजभवन की जमीन के बदले सरकार से2 करोड़ रुपए वसूलना। वैसे तो यह विरासत सरकारी है, अगर वो इसे अपनी मानते हैं तो इसपर अभी केश चल रहा है। ऐसे में उसके बदले पैसा कैसे लिया जा सकता है।
अब राजस्थान के बाहर भी देख  लेते हैं छत्तीसगढ़ में एक बड़ा पीडीएस घोटाला हुआ। उसमें राशन की बांट में पूरी रमनसिंह सरकार फँसती नजर रही थी। लेकिन जांच में सीधे सीधे राज्य के ग्रहमंत्री ने दखल दिया, जिसकी शिकायत के बाद अब मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में है। महाराष्ट्र में पंकजा मुंडे ने इतना बड़ा 206 करोड़ का घोटाला किया क़ि आपकी सहयोगी पार्टी शिवसेना भी विरोध में गई। और कहने लगी क़ि कम से कम आंगनबाड़ी और प्राइमरी के बच्चों के भोजन पर तो घोटाला मत करो। इसके बाद महाराष्ट्र की ही देवेन्द्र फड़नवीस सरकार के शिक्षा मंत्री ने 191 करोड़ के ठेके बिना टेंडर के दे दिए। जो नियमों के खिलाफ है। ज्यादातर घोटाले जो यूपीए सरकार के दौरान हुए थे, उन सबमें यही हुआ था। 2जी और कोयला घोटालों के ठेके बिना टेंडर के खुद के करीबियों को दिए गए थे, यही इस मामले में हुआ है। आपकी शिक्षामंत्री स्मृति ईरानी पर हाईकोर्ट ने केश चलाने के आदेश दिए हैं। 2009 और 2014 में चुनाव आयोग को अपने सपथपत्र में अपनी अलग अलग डिग्रियों बताया है। इसमें अगर वो नहीं भी दोषी हैं तो कम से कम चुनाव आयोग और कोर्ट से झूठ बोलने और गुमराह करने के लिए तो दोषी हैं ही। उनके शिक्षा मंत्री रहते हुए, आई आईटी, आई आई एम के लगभग एक दर्जन अध्यक्ष और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। जिनको उनके साथ काम करने में समस्या हो रही है। इसको लेकर तो संघ के मुखपत्र पाँचजन्य में भी एक लेख चुका है कि जो शिक्षा मंत्री खुद अशिक्षित है, वो देश की शिक्षा कहाँ ले जाएगा, इसी का नतीजा था कि इस वित्तीय वर्ष में 30% शिक्षा बजट में कटौती कर दी गई, जबकि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने तो शिक्षा में 150 फीसदी का इजाफा किया था। ऐसे कैसे मोदीजी युवाओं के हितैषी नेता माने जाएंगे। एक और विवादित मामला है जो इस वक्त पूरी तरह से उफान पर है सरकार द्वारा पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति गौरतलब है कि गजेंद्र चौहान भाजपा के करीबी हैं। इसका विरोध कुछ दबे और कुछ खुले शब्दों में लगभग पूरा फिल्म जगत कर रहा है। क्योंकि गजेंद्र का सिनेमा जगत में कोई भी बड़ा योगदान नहीं है। वहां के विद्यार्थी तो एक महीने से हड़ताल पर हैं। रजनीकांत, अमिताभ बच्चन या दिलीप कुमार से आगे गजेंद्र चौहान कैसे हो सकते हैं? अगर आपको भाजपा का निकटतम व्यक्ति ही रखना था तो अनुपम् खेर कई नाम थे।
अब मैं बात करना चाहता हूँ सबसे बड़े और सबसे खतरनाक व्यापम घोटाले की। इसमें हुई गड़बड़ियों का अंदाजा तो आप इसी से लगा सकते हैं कि 6000 से अधिक आरोपी हैं। सीधे सीधे प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव और एक मंत्री जा चुके हैं। मुख्यमंत्री की पत्नी और उनकी पत्नी का भाई (साला) भी आरोपी हैं। सोंचिए व्यापम् से कितने फर्जी डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक बनकर निकले होंगे। वो समाज में कैसा काम करेगे जाकर। ऐसे ही डॉकटर्स आगे चलकर आपकी सरकारों में लोगों की जान लेते हैं। याद होगा सबको जब छत्तीसगढ में कितनी महिलाओं की जान लापरवाही से हुई नसबंदी से चली गई थी, और पंजाब में 200 से अधिक लोगों की आखों का गलत ओपरेशन होने उनकी रोशनी चली गई थी।

बात यहीं नहीं खत्म हो जाती है, पूरी मध्यप्रदेश सरकार इस घोटाले में फांसी हुई है। इसलिए जांच नहीं सही ढंग से हो पा रही है। अबतक इस मामले से जुड़े हुए लगभग 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से किसी की भी मौत प्रकृतिक नहीं थी। ये सबलोग इस घोटाले के आरोपी, गवाह और यहांतक क़ि जांच अधिकारी थे। अब भाजपा इस पर पूरी तरह से बैकफुट पर हो गई है, जब से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच सीबीआई द्वारा कराई जाने की बात कही गई है। और यहाँ भी सरकार ने बहुत टाल मटोल किया, लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने को उसे मजबूर किया। मीडिया ने तो मजबूरी में बहुत बाद में यह मामला उठाया। अब तो सोसल मीडिया पर इसके बारें में खूब चर्चाएं हो रही हैं। मुझे अब भी उम्मीद है क़ि विदेश से लौटने के बाद हमारे प्रधानमंत्री इसपर कुछ तो एक्शन लेंगे। कम से कम निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों को इस्तीफा तो दिलवाएं। अन्यथा मध्यप्रदेश के किस अधिकारी की हिम्मत होगी जो शिवराज सिंह चौहान से पूंछताछ कर सके? मुद्दे तो और भी हैं मंहगाई, किसानो, खस्ता रेलवे और शिक्षा पर लेकिन फिलहाल बड़े मुद्दे बाकी सब बाद में।

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...