Saturday, February 10, 2024

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी।
आदिवासियों ने विरोध किया, आंदोलन किए। राहुल गांधी ने आदिवासियों का समर्थन किया और ये डील कैंसल करवा दी।
बस यहीं से वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल ने राहुल गांधी के खिलाफ पूरे कॉरपोरेट को इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
*साल था 2011 कांग्रेस की सरकार थी, यूपी के भट्टा परसौल में यमुना एक्सप्रेस वे बन रहा था। किसानों की जमीन अधिग्रहण की जाने वाली थी, किसानों ने विरोध किया। और राजनीति में नए नए आए युवा राहुल गांधी किसानों से मिलने पहुंच गए।
राहुल ने किसानों का समर्थन किया और मनमोहन सिंह सरकार पर दबाव डालकर एक "भूमि अधिग्रहण" कानून बना दिया। उस कानून में लिखा था कि किसानों की जमीन ली जाएगी तो पहले पंचायत से उसकी परमिशन लेनी होगी। और उस जमीन का मार्केट से 4 गुना अधिक रेट देना होगा।
अब कॉर्पोरेट्स को जहां जहां किसानों की जमीन लेनी पड़ती थी तो मंहगी पड़ने लगी। (मोदी जी ने सरकार में आते ही सबसे बड़ा काम यही किया कि उस कानून को बदल दिया।)

यहां से पूरा कॉरपोरेट ही राहुल गांधी के खिलाफ हो गया। पूरा मीडिया राहुल के खिलाफ लगा दिया गया। जिस सीएजी की रिपोर्ट में थोड़ा सा सवाल उठने पर मीडिया घोटाले हुए घोटाले हुए चिल्लाता था वो सीएजी की रिपोर्ट आज की सरकार में बाहर भी नहीं आती है। कांग्रेस के समय के टू जी जैसे न जाने कितने घोटाले तो केवल रिपोर्ट में सस्पेंस के आधार पर बना दिए गए। जबकि असल में घोटाले होते तो कोई जेल में भी होता? मोदी सरकार आने के बाद कोई कांग्रेस का नेता जेल नहीं गया, जो एक दो घोटाले हुए भी थे उनको खुद कांग्रेस सरकार ने जेल भेजा था।
इनके बाद ही माहौल बना अन्ना हजारे आंदोलन का। जिसको कॉरपोरेट और आरएसएस ने भरपूर सहयोग किया। 
फिर 2013 में राहुल गांधी का पहला टीवी इंटरव्यू अर्णब गोस्वामी के साथ हुआ। अर्णब गोस्वामी कौन हैं आज सबको पता है , उसने राहुल गांधी को पूरे इंटरव्यू में उनके परिवार के बारे में पूछ पूछ कर सवाल किए। राहुल की छवि खराब करने की ये पहली कोशिश थी।
उसके बाद फेसबुक, ट्विटर और वाट्सअप भारत की जनता के हाथ में नया नया आया था। उसपर राहुल गांधी के खूब एडिटेड वीडियो ऑडियो और फोटो फेक न्यूज के साथ घूमे।
उसके भाषणों के 10-20 सेकंड के हिस्से काट काट कर खूब वायरल करके पप्पू साबित किया गया। खूब मजाक उड़ा, गाली दी गई, चरित्र हनन किया गया।
राहुल ने हार नहीं मानी और 2019 के चुनाव में अनिल अंबानी को राफेल डील मिलने के खिलाफ खुलकर बोले। आगे चलकर अनिल अंबानी की वो कंपनी दिवालिया हो गई।
खैर पुलवामा हमला हुआ और मोदी जी की बंपर जीत हुई।
मोदी सरकार ने सभी PSU की हिस्सेदारी अडानी को बेचनी चालू रखी और राहुल गांधी ने अडानी के खिलाफ आवाज उठाना बंद नहीं किया।
फिर 2024 का चुनाव आ गया है, सबको पता था कि बीजेपी राम मंदिर की लहर में चुनाव जीतने वाली है। फिर भी कॉर्पोरेट्स ने बीजेपी के पीछे हजारों करोड़ रुपए लगा दिए नीतीश कुमार, जयंत चौधरी, मायावती, एचडी देवगौड़ा को कांग्रेस के गठबंधन से निकलकर बीजेपी के साथ मिलने के लिए। कॉरपोरेट के कुछ लोग रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। उनको पता है कि गलती से भी ये आदमी सरकार में आ गया तो समझिए इनका सब किया धरा मिट्टी में मिला देगा।
तो बस आप खुश रहिए, हम कांग्रेस को नहीं तो राहुल गांधी को सपोर्ट करते रहेंगे क्योंकि उसकी वजह से बची हुई देश की संपतियां कॉरपोरेट को देने से बच रहे हैं।
पता नहीं किस मिट्टी का बना है ये आदमी। इतने चुनाव हार कर भी भारत जोड़ो यात्रा कर रहा। कम से कम आप अब तो ये नहीं कह सकते कि राहुल गांधी जनता के बीच नहीं जाते। साउथ से नॉर्थ चल गया, ईस्ट से वेस्ट जा रहा। और क्या चाहिए जबकि पूरे मीडिया ने भारत जोड़ो यात्रा के कवरेज को बायकॉट कर रखा है। 
भरोसा रखिए, पांच साल, दस साल, पंद्रह साल बाद भी ये आदमी सरकार में आ गया तो इन अडानी जैसे कॉर्पोरेट्स की एक एक लूट का हिसाब लेगा।
#RahulGandhi

No comments:

Post a Comment

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...