Friday, December 9, 2016

मोदीजी को कैशलेस के भाई कमलेश की चिट्ठी

सेवा में,
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी, 
महोदय,
                        सबसे पहले तो आपको चरणस्पर्श कर प्रणाम करता हूँ और इसका मुख्य कारण आपका बुज़ुर्ग होना और मेरा भारतीय संस्कारिता में पला बढ़ा होना है, कृपया इसको लेकर मेरे लिए कोई फैन टाइप भूमिका न सोचें।
सर,आज 09 तारीख़ है और आज ही के ठीक 31 दिन पहले आपने जो देश के सारे धन को अपने बालों की तरह सफ़ेद कर देने की प्रतिज्ञा ली थी आज उसका महीना से अधिक हो गया है और आपको "फेयर एंड लवली पर्व " की खूब बधाई और इस "मासिकोत्सव" पर एक पत्र तो बनता ही है।
इधर थोड़ा सा ट्रम्प जी ने मूड खराब कर दिया है पर फिर भी आपको टाइम ईयर ऑफ़ द पर्सन का उपविजेता बनने की भी बधाई। क्या करियेगा, हमीं भारतीयों ने ट्रम्प के लिए हवन पूजा किया था न, भला इतनी जोरदार दुआएं केवल राष्ट्रपति तक थोड़े रूकती, पर्सन ऑफ़ द ईयर भी बना गयी। हाँ इससे हमारे हवन पूजा मार्केट का एक वैश्विक फलक भी तो खुला है, आज दुनिया भर के मित्रों को चुनाव जीतने या पुरस्कार जीतने हेतु भारतीय हवन पूजन की ओर आकर्षण बढ़ा है। हो सकता है कल किसी और देश के प्रत्याशी यहां हवन कराने आयें। इस तरह आपने जान बूझ कर ट्रम्प को आगे कर असल में भारतीय अध्यात्म का ढंका बजवा दिया है और एक नया उद्योग मिला देश को वर्ना जीत तो आप ही की थी। हम सब जानते हैं जी। वैसे भी पुरस्कार विजेता का हो या उपविजेता का, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए जब की आप तो "फ़क़ीर "आदमी हैं। आपके लिए तो पुरस्कार और सम्मान कुछ मायने नहीं रखता है, लोग हर मौके कुमौके आपकी फोटो वोटो ही खींचते रहें, आपने हमेशा बस इतने में संतोष किया। दिन भर में आपको जो भी 4-5 कपडे पहनने को मिले, आपने पहन कर संतोष किया। आप जिस दिन जापान से भारत लौट एक सभा में रोये, उस दिन भी केवल 3 कपडे बदले और जिस भी रंग का कुर्ता बंडी आपको दिया गया आपने पहन लिया। जब रोलैक्स की 3.5 लाख वाली घडी मिली ट्राई कर ली, ये बात तो आपके एक अहमदाबादी भक्त ने ही बताई थी। आप हमेशा फ़क़ीर की तरह रहे, बचपन में चाय भी बेचा तो किसी से पैसा न लिया क्योंकि रावण का विमान तक खोज निकालने वाला मीडिया आज तक कोई ऐसा ग्राहक नहीं खोज पाया जो बता पाये की मैंने मोदी जी से चाय पी है और पैसे दिए, आपको काला धन से तभी से नफरत था। आप खान पान में भी साधु फ़क़ीर हैं आजकल, जब दुबई वाले काजू के आटे की रोटी मिली खा लिया, जब शिमला की 37000 वाली मशरूम मिली तो खा लिया। विदेश जहाज़ से घूमना तो मज़बूरी है, पर आपने देश के पायलटों की ख़ुशी के लिए देश के अंदर भी हमेशा फ़क़ीर की तरह हवा में घूमे, कभी रेल यात्रा जैसे विलाषी माध्यम का प्रयोग नहीं किया। अब तो रेल और भी इतना मंहगा कर दे रहे कि आम आदमी भी जहाज़ ही घूमे, रेल जैसे विलाषिता से दूर रहे। आप 22 घंटे काम करते हैं, ढाई साल में छुट्टी नहीं ली। क्या जरूरत है छुट्टी की? कौन सा जसोदा काकी को गोवा लेकर जाना है।
सर,आप तो फ़क़ीर हैं, जैसे तैसे रह लेते हैं, पर पूरा देश थोड़े आपकी तरह महामानव है। ये जल्दी टूट जाता है, जरा सा कष्ट झेलने में हांफ जा रहा है सर। लाइन में लगा उकता जाता है। ये देश और इसकी करोडों देहाती आबादी को पता भी नहीं की आप भविष्य का भारत गढ़ रहे हैं। ये तो रोजमारी करने वाली खाने कमाने वाली जनता है सर, ये क्या जाने की देश कैसे बनता है। ये लोग तो इस खटनी मरनी में दिन गुज़ार देते हैं कि रात की रोटी कैसे बने। सर,मानता हूँ कि ये फेसबुक और व्हाट्सअप पर एक्टिव पीपुल ऑफ़ इंडिया की समझदारी आपके साथ है पर दूसरी तरफ भारत की जनता कहलाने वाली जनता की मज़बूरी भी को तो देखिएगा न सर? आपने मुरादाबाद में कहा कि लोग व्हाट्सअप कर सकते हैं तो पेटीएम क्यों नहीं? ए सर, क्या
ये देश केवल उसका थोड़े है जिनके हाथ में मोबाइल है, ये देश उनका भी तो है न सर जिनके हाथ में खाली कटोरी है। जिनके पास मोबाइल में इंटरनेट नहीं, उनके हाथों में पड़े हुए घट्टे हैं, छाले हैं। ये नेटवर्क के टावर वाले इलाके के लोग नहीं, जंगल और पहाड़ वाले इलाके के भी तो लोग हैं सर।
सर, जिस देश की करोड़ों जनता पेट के लिए पीठ पर बोझ ढोती है वो "पेपीएम" साॅरी टाइपिंग मिस्टेक पेटीएम नहीं कर सकती, जिद कर रहे है आप। ऐसे देश में कैशलेस इकोनॉमी सेंसेलेस माना जायेगा सर।
आप कहते हैं अमेरिका में,स्वीडन में कैशलेस है न सब, तो सर पहले अमेरिका जैसे बना तो लीजिये भारत को। वहां हर जगह स्कूल है, अस्पताल है, रोज़गार है, बैंक है सो कैशलेस भी है, वैसे मेरी रिसर्च में पाया कि अमेरिका में भी 60% ही कैशलेस है, पर भारत में जहां आज तक गांव गांव बिजली नहीं, स्कूल नहीं, अस्पताल नहीं, रोजगार नहीं वहां पेटीएम पंहुचा के कैशलेस करने का दावा एक मजाक है सर। सर,जनता को सारी सुविधाएँ बस जियो के सिम से ही नहीं पहुचाई जा सकती। अम्बानी का रिलायन्स पवनपुत्र हनुमान नहीं।
सर, क्या देश का पीएम जब एक पूरी जमात को किनारे कर पेटीएम करो का नारा देगा तो डर नहीं लगेगा सर? सर आपने कहा था देश बदलेंगे, पर आपने नोट बदल दिया। इस बदलाव की फेसबुक छाप खुशफहमी से निकल जरा गांव देहात भी तो घूमिये न सर। जिस बुढ़िया ने कभी जरुरत पर पोती के शादी के लिए 50-60 हज़ार छुपा के रखे थे और जिसे आज तक गांव के चोर न खोज के निकाल पाये, आपने बैंक में जमा करवा दिए जो गांव में बैंक चार चार दिन लाइन में लगने के बाद भी 2000 ही देता है।
ये कैसी क्रूरतम छापेमारी है सर? सर,ये जो गांव देहात के करोड़ों दादा,बाबा,माई, दादी,मौसी,नानी के छिपे पैसे निकल रहे हैं न ये काला या भूरा धन नहीं बल्कि उनके जीवन का आसरा था, परिवार के मुश्किल के दिनों का सहारा था जिसे कोई बैंक के लॉकर से ज्यादा सुरक्षित रखा था इन माताओं ने। ये गलती से किसी किसी गरीब के लिए  किसी अन्य की मज़बूरी से डाले गए जन धन खाते में आये 1 या 2 लाख रूपये से ज्यादा सफ़ेद और नश्वर धन था। वो पुरानी मटकी और चावल के डिब्बे में रखा पैसा जन धन खाता नहीं, जीवन खाता था और हर घर का आधार था। आज वो आधार छीन गया न सर, हाथ में रह गया है आधार कार्ड की फोटो कॉपी और बदले गए 2 हज़ार के नोट। 
आप मुरादाबाद में लोगों को ब्लैक मेल की क्लास देते नजर आए, 
सर, क्या अब देश के गरीब का दिन इन्ही पैसो से बदलेगा। कम से कम भारत का पीएम तो ऐसा न बोलता सर। ये घास की रोटी खा स्वाभिमान खातिर मिट जाने वाले पुरखों का देश है, शासन चलाने में मूल्यों का तो क़द्र करिये सर। ये लुटेरे बाल्मीकि से संत बाल्मीकि बनाने का देश है,गरीब को लुटेरा बनाने का नहीं।
सर ईधर आपको क्या हो गया है, किसके संगत में हैं? मुरादाबाद में आप बोले की" अगर भ्रस्टाचार से मुक्ति चाहिए, विकास चाहिये तो भाईओं बहनों बजाओ जोर की ताली"।सर ये क्या है? क्या ताली से होगा ये सब। ये मदारियों की भाषा क्यों बोलने लगे आप। सर,आपके पीछे नेहरू,इंदिरा,लोहिया,श्यामा प्रसाद,जार्ज,वाजपेयी जी की परंपरा है भाषण देने की,उनसे सीखिए न कुछ यूट्यूब से। वैसे अगर आप कैश लेस इंडिया में स्पीचलेस रैली करने लगें तो कितना बेहतर होगा. इससे भी अच्छा होगा क़ि आप टेक्नॉलॉजी का प्रयोग करते हुए भाषण भी रिकॉर्ड करवा कर यूटयूब पर डाल दिया जाए. 
सर,माना कि जैसे बिना जिम गए चंद्रगुप्त योद्धा थे,बिना पढ़े अकबर विद्वान थे वैसे बिना कोर्स के आप भी दुनिया के बड़े अर्थशास्त्री हैं पर सर थोड़ा समाजशास्त्र भी देख लीजिए की कैसे गड़बड़ा गया है देश का।इस पत्र के बाद मुझ पर जो हमला होगा वो जनता हूँ सर, आपके समर्थक से तो डर नहीं पर अनुयायी से गाली सुनूँगा ही।ससोशल मीडिया पर आपकी आलोचना करना मोगेम्बो के अड्डे पर जा मोगेम्बो को छाती ठोक हड़काने जैसा है सो इसका अंजाम जानता हूँ। पर चूँकि सर, डर लगता नही इसलिए लिखबे करूँगा। क्योंकि, सच लिखने में डर जाऊंगा तो घूंट के मर जाऊंगा, इससे अच्छा है लड़ के मर जाऊं। और सर याद रखियेगा, ये फेसबुक पर जयजयकार करती खायी अघाई सेना आपको असली जमींन पर युद्ध हरवा न दे। व्हाट्सअप से निकल जमींन पर पड़े भूखों से मिलिए, समाधान दीजिये वर्ना हर भूखे पेट के अंदर एक युद्ध कुलबुला रहा है, आवाज़ भले नहीं निकल रही, सीधे विस्फोट होगा। क्योंकि मैं किसान का बेटा हूं रोज उस दर्द से रूबरू होता हूं, लोगों की रबी की फसलें बरबाद और बहुत लेट हो गई है, जानवरों को चारा तक नहीं बचा है, इतनी शरदी में बीमार बुजुर्गों को दवाइयों के लिए पैसे नहीं हैं, गरीब मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही है, शहरों से मजदूरों की वापसी हो रही है। कहीं ऐसा ना हो क़ि आप कैशलेस इकोनॉमी के चक्कर में ग्रेनलेस एग्रीकल्चर भी चालू ना करवा दें. फिर क्या खाना इंटरनेट से डाउनलोड करके खाओगे? बस अंत में एक सवाल और क़ि गुजरात या और किसी राज्य में हार्दिक पटेल जैसा युवा नेता आ गया तो आपकी सरकार तो इंटरनेट बंद करवा देगी, फिर तो आपका नेट पेमेंट बंद भी हो जाएगा. आप कौन से इकॉनमिक सुधार की उम्मीद कर रहे हैं दूसरे क्वार्टर में जीडीपी. 3% बढा लेकिन न ईएमआई कम हुई न ब्याज दर? आप दुनिया की कौन अर्थनीति के फार्मूले से इसे बढाएंगे? मुझे अपना शुभचिंतक ही जानिए, दुश्मन नहीं हूँ,इसी देश का हूँ,आप मेरे भी पीएम हैं सर। जय हिंद।
आपका शुभचिंतक
और कैश"लेश" का छोटा भाई कम"लेश"

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...