Sunday, April 15, 2018

अंबेडकर पर सामान्य ज्ञान

भारत में जातिवाद आज नहीं हजारों साल से है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। मतलब उनकी जाति के आधार पर उनके काम मिलना। ब्राह्मणों का काम पढने पढ़ाने, क्षत्रिय का लड़ने, वैश्य मतलब बनिया जो बिजनेस मैन थे। बाकी सब शूद्र। ये तो बडा गलत था क्योकि अगर कोई टैलेंटेड आदमी शूद्र जाति में पैदा हुआ तो वो पढ लिख नहीं सकता था। यहाँ तक कि ये नियम था कि अगर वो पढते लिखते मिल जाए तो उसके कानों गरम तेल डलवा दो। रामायण में एक कहानी छुपाई गई जब शंभूक नाम का एक शूद्र आदमी वेद पढ रहा था और उसकी शिकायत किसी ब्राह्मण ने भगवान राम से कर दी  और राम ने उसे मार दिया। तुमने एकलव्य की कहानी सुनी होगी जिसमे शूद्र धनुषधारी को शिक्षा न देकर अन्याय किया गया जबकि उसमें इतना टैलेंट था कि मूर्ति देखकर अभ्यास करते हुए अर्जुन को पीछे छोड़ दिया था। शिवाजी महाराज का राजतिलक करने से पूना के ब्राह्मणों ने क्यों मना कर दिया था? क्योंकि वो मराठी (ओबीसी) थे जिन्हे ब्राह्मण शूद्र कहते थे। नीची जाति के लोगों पर बडी जाति जैसे ठाकुर और पापियों ने खूब अन्याय किए। ये नियम थे कि उनकी परछाई तक बडी जाति के इलाके में न पडे। जब वो रास्ते पर चलेंगे तो अपनी कमर में एक झाडू बांध लेंगे क्योंकि उनके चलने से अछूत हुई जगह साफ करते जाएँ। यहाँ तक कि तालाब से जानवर पानी पी सकते थे लेकिन नीची जाति का इंसान नहीं।
उसी समय पैदा हुए अंबेडकर ये सब झेल रहे थे। उसको तांगे वाला नहीं बिठाता था, नाई बाल नहीं काटता था क्योंकि वो शूद्र था। न स्कूल में पढ़ने देते थे। फिर भी वो अपमान सहकर जैसे तैसे ग्रेजुएट हुआ। जो सबसे पहला किसी दलित न किया। स्काॅलरशिप मिली तो लंदन जाकर पढने लगे। फिर उन्होंने जितनी मेहनत की शायद ही इतिहास में किसी ने की। एक छात्र के संघर्ष के लिए उनको अपना आदर्श मानना चाहिए। क्योंकि वो बेचारा लडका जिसके पास पैसे नहीं है वो सडक पर लाइट में पढकर, मजदूरी करके विदेश में पढा। जितनी डिग्री उसके पास हैं एमफिल, लाॅ, पीएचडी लगभग 26-27 डिग्री। आज तक किसी के पास नहीं है।  इकोनोमिक्स पर उनकी रिसर्च और लिखी किताबें आज भी ऑक्सफोर्ड में पढाई जाती हैं।फिर एकदम से उनका मन जगा कि चलो अपने देश के लिए कुछ करते  हैं, और जब यहाँ आकर देखा तो जातिवाद से बेहाल। इतने पढे लिखे आदमी को चपरासी पानी और फाइल हाथ में नहीं देता था। तो उन्होंने जातिवाद खतम करने के लिए और उनके हक के लिए कई आंदोलन किए। ब्राह्मण मानने को नहीं तैयार थे कि वो खतम हो। क्योंकि ये खत्म तो वो अपना राज किस पर करेंगे? इस कारण दुखी होकर अंबेडकर ने हिंदू धर्म छोडकर बौद्ध अपना लिया। क्योंकि गौतम बुद्ध के धर्म में सबकी बराबरी थी पुरूष हो या महिला। छोटा हो या बडा।
फिर जब इतने बडे देश का कानून लिखने की बारी आई तो सबसे पढे लिखे अंबेडकर ही मिले। अब वो इस मौके को कैसे छोड देते? उन्होने कानून में एक नियम रखा कि आप नीची जाति के लोगों पर भेदभाव करते हैं तो ये क्राइम होगा। ये अमेरीका और अफ्रीका के ब्लैक लोगों के साथ भी होता था। फिर एक नियम रखा कि जो शूद्र लोग हैं उनकी क्या गलती है कि वो वहाँ पैदा हुए? तो उन्होंने उनके लिए जगह रिजर्व कर दी। मतलब 100 टीचर चाहिए तो सब ब्राह्मण वो भी पुरुष होते थे। अंबेडकर ने 18 दलित, 27 ओबीसी और 33 महिलाओं के आरक्षित कर दिया। अगर ऐसा न होता तो सब ब्राह्मण ही टीचर होते न ओबीसी होता न महिला। ये नैचुरल नियम है कि जिस समाज की जितनी आबादी हो उसका रिप्रजेंटेशन उसी रेशियो में होना चाहिए। दूसरा राज कयो करे?
दलित की डिफिनेशन है समाज के दबे हुए लोग। जिसमे महिला भी है। उसके साथ हमेशा अन्याय हुआ है। पहले महिलाओं को तलाक लेने का अधिकार नहीं था। आदमी ले तो तलाक। उनको न वोट देने का अधिकार, न पढने लिखने और न शादी के बाद सेक्सुअल रिलेशन में अपनी मर्जी या अधिकार दिखाने का। वो किसी भी समस्या और दर्द में हो पति अपने मन की करता था। उसे बिस्तर तक ही समझते थे। आदमी जितनी मन हो शादी करे। न नौकरी का अधिकार न पारलियामेंट जाने का। अंबेडकर ने हर जगह महिलाओं को कानूनी हक दिला रहे थे। उनकी अंतिम इच्छा थी हिंदू कोड बिल जो पास हो जाता तो आज यहाँ की महिलाओं को अमेरिका जैसे शक्तिशाली बना देते। लेकिन ब्राह्मणों ने कहा कि उनको घर में ही खाना बनाने दो। और पास नहीं हुआ वो बिल। नेहरू गांधी पटेल सब विरोध में आ गए तो इस बात से दुखी होकर अंबेडकर ने अपने मंत्री पद और पारलियामेंट की मेंबरशिप से रिजाइन कर दिया। आज भी जो आरक्षण है वो समानता के लिए है। अगर हटा दिया जाए तो बैंक में निकलने वाली सब नौकरी बडे लोग ले जाएगे। न लड़कियों को मौका मिलेगा न गरीबों को। यही हाल स्कूल, काॅलेज, पारलियामेंट में होगा। कोई महिला या शूद्र न जा सकता। अगर बस या ट्रेन से महिला आरक्षण हटा दिया जाए तो लड़कियों को चढने भी न मिलेगा मजबूत लोग (पुरुषों) के आगे। इसलिए आरक्षण न्याय है कि सबको हिस्सा मिले केवल ताकतवर को नहीं। हालांकि मैं ओबीसी में भी नहीं आता फिर भी कानूनी हकीकत समझता हूँ। सच को सच कहता हूँ। शायद सबको इतनी जानकारी नहीं क्योकि जिन बडी जाति के लोगों की सत्ता चली गई है उनको डर लगता है और अफवाह फैलाने लगते हैं। आरक्षण खतम होगा तो केवल जाति के आधार पर क्यो? महिलाओं का भी करेंगे क्योंकि कुछ लोग तो कहते हैं कि इससे जेंडर डिस्क्रिमनेशन  होता है।

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