*महिलाओं का सम्मान केवल एक दिन ही करना है या रोज?
*या फिर कल से उनपर " घुटनों में अकल" जैसे घटिया जोक भी शेयर करना है?
*या फिर आदमी की गलती पर भी औरतों को ही गाली देना है? कभी माँ बहन की बजाय बाप भाई की गाली सुनी है?
*कहीं उनके बारे में दोस्तों से बात करने के लिए बाजारू कोड वर्ड "आइटम, माल, तो नहीं बुलाना है?
*Mothers Day पर माँ का ही सम्मान करना है या हर लडकी का?
*क्या शाॅपिंग या restaurant में extra discount से ही women empowerment हो जाता है?
*क्या आपको पता है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक मज़दूर आंदोलन से उपजा है. इसकी शुरुआत साल 1908 में हुआ था जब 15 हज़ार औरतों ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों की मांग की थी. इसके अलावा उनकी मांग थी कि उन्हें बेहतर वेतन दिया जाए और मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए.
*क्या आपको पता है कि भारत में सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा, और अंबेडकर ने वोटिंग से लेकर संपत्ति के अधिकार तक में बडी भूमिका निभाई है?
*क्या आपको पता है कि पहले औरतों को ब्रेस्ट टैक्स देना पडता था, फिर करथॅला नाम की जगह पर नेंगाली नाम की महिला ने 1803 में आंदोलन करते हुए अपनी जान दी तब वो टैक्स हटा?
* क्या आप जानते हैं कि बहुत पढे लिखे समाज में भी पीरियड्स को आज भी अशुद्ध मानते हैं। शहरों में भी उनको भगवान के मंदिर, और गांवो में तो रसोई में जाने से रोका जाता है? क्या ये समाज का दोगलापन नहीं है?
*क्या आपको पता है कि आप जिस भारत माता की जय बोलते हो वो कोई पोस्टर में साडी पहने सजी देवी नहीं, वो कोई भी महिला साडी, बुरका, जींस किसी भी कपडे में, काली, गोरी, सांवली, किसी भी भाषा की, नीता अंबानी, दीपिका पादुकोण या कोई मजदूरी करने वाली महिला भी हो सकती है।
वैसे मैं ये सब याद दिला रहा था, कि अगर हम सब अपने अपने स्तर पर ही सुधार कर लें तो सब सही हो जाए।
और अंत में आप सबको महिला दिवस की शुभकामनाएं। 😊
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