AajTak, ABP & NDTV देश के तीन बड़े चैनलों की वेबसाइट को एक घंटे से खंगाल रहा हूं लेकिन हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट पर एक लाइन नहीं लिखी या दिखाई है किसी ने।
अब आपको आसान भाषा में इस रिपोर्ट का सार बता देता हूं। हिन्डेनबर्ग नाम की मीडिया रिसर्च सेंटर ने अडानी ग्रुप के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि अडानी ग्रुप ने विदेशों (टैक्स हैवेन कंट्रीज) में सैकड़ों फर्जी कंपनियां बनाई हुई हैं। जिनको गौतम अडानी के भाई और रिश्तेदारों द्वारा चलाया जा रहा है। इन कंपनियों का पैसा भारत की अडानी ग्रुप कंपनियों के शेयर में लगाया जाता है, जिससे इन शेयरों की कीमत में उछाल आता है, जबकि इनकी असली कीमत मार्केट रेट के मुकाबले बहुत कम होती है। जब धीरे धीरे ये शेयर अपनी असली कीमत की तरफ बढ़ेंगे तो शेयर होल्डर्स को 85% तक का नुकसान हो सकता है। इन्हीं शेयरों को गिरवी रखकर अडानी ग्रुप ने बैंकों से भी लोन ले रखा है। जब इन शेयरों की कीमत गिरेगी तो बैंकों के लोन डूब जाने की स्थिति आ जायेगी, जिसकी वजह से भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर मार्केट धड़ाम से गिरेंगे।
ये मनी लांड्रिंग, शेयर के रेट्स को मैनूपुलेट और अकाउंटिंग फ्रॉड के जरिए किया जा रहा है। ये रिपोर्ट दो साल की रिसर्च के बाद बनाई गई है जिसकी जानकारी कंपनी में काम कर चुके कई सीनियर अधिकारियों ने भी दी है।
अडानी ग्रुप ने इसका जवाब देते हुए एक पत्र जारी किया है। लेकिन रिपोर्ट के 88 में से एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
अब इस रिपोर्ट का असर क्या हुआ? तो इसका नतीजा ये हुआ कि अडानी ग्रुप को 50000 करोड़ का नुकसान एक दिन में हुआ। इनका मार्केट कैप 2.37 लाख करोड़ का कम हुआ। जो अडानी कल तक दुनियां के दूसरे नंबर के अमीर आदमी थे वो आज सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अडानी ग्रुप के पास लगभग 120 बिलियन डॉलर की संपत्ति है जिसमें से 100 बिलियन डॉलर तो पिछले 3 सालों में कमाए हैं, जिस समय कोविड का समय था और पूरी दुनियां की अर्थ व्यवस्था खराब थी। खासकर भारत में लोगों की हालत खस्ता थी, बड़ी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकाल रही थीं, तब इनकी संपत्ति 20 से बढ़कर 120 बिलियन डालर की हो गई। अडानी ग्रुप की 7 कंपनियां SEBI में लिस्टेड हैं, इनके शेयरों में पिछले 3 साल में 819% की बृद्धि हुई है। Hindanburg ने इसी उछाल के बाद रिसर्च चालू की, जिसमें पाया गया कि इसके शेयरों की ओवर वैल्यूएशन की गई है। जिसमें 85% तक डाउन स्लाइड (रिस्क) है।
इसको कॉरपोरेट हिस्ट्री का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। गौतम अडानी के भाई राजेश अडानी UAE, मॉरीसस जैसे देशों में रजिस्टर 38 शेल कंपनियों का नेटवर्क देखते हैं जिनका ना कोई कारोबार है, न ठीक से पता और ना ही कोई ऑनलाइन प्रेजेंस फिर भी इन्होंने भारत की अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में बिलियन डॉलर इन्वेस्ट किए हुए हैं। ऐसे ही इनके दूसरे भाई विनोद अडानी 13 कंपनियों को देखते हैं जिनकी वेबसाइट एक ही दिन में बनाई गई। इन वेबसाइट पर न कोई कारोबार का नाम लिखा है न किसी कर्मचारी की डिटेल, रिपोर्ट के अनुसार शायद इनका प्रयोग स्टॉक पार्किंग और मैनूप्यूलेशन के लिए होता है।
इस पूरे मामले में अडानी ग्रुप पर टैक्स चोरी, मनी लांड्रिंग और ब्लैक मनी के कारोबार और आम शेयर होल्डर्स को बेवकूफ बनाने की बात कही गई है।
अगर आप भी अडानी की बैलेंसशीट देखें तो पता चलता है कि इन्होंने बैंकों से कितना कर्ज ले रखा है। जिस दिन इन ओवर वैल्यू शेयर्स की कीमत गिरेगी उस दिन बैंकों से लेकर आम निवेशकों तक का पैसा डूबने का खतरा होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि सरकार इस पूरे मामले पर चुप क्यों है? वो संजय राउत से लेकर मनीष सिसोदिया सहित हर विरोधी के ऊपर ED के छापे मरवाती है लेकिन अभी उसकी कान पर जूं क्यों नहीं रेंग रहा है? इसका सीधा सा जवाब है कि मोदी सरकार और अडानी का एलायंस। पहले अडानी ने मोदी को हेलीकॉप्टर से लेकर टीवी चैनल तक खरीद कर दिए फिर पैसे से लेकर प्रचार तक सब पर खूब पैसा लुटाया। उसके बाद वही मोदी जी अडानी को जनता का पैसा लुटा रहे हैं। एयरपोर्ट, बंदरगाह, रेलवे स्टेशन सहित सब सरकारी संपत्तियों को अडानी को बेचा जा रहा है। अडानी ग्रुप को दुनियां का दूसरा और भारत का पहला सबसे अमीर आदमी बनाने में सरकार का बड़ा हाथ है जिसने अडानी को सैकड़ों एकड़ जमीनें 1-1 रुपए में दिया।