Tuesday, February 17, 2015

सब्सिडी का खेल

पहले एक सिलेंडर 448.50 रुपए थी। तब हम कैश से डायरेक्ट सिलेंडर एजेंसी से ले लेते थे। आज बैंक में सब्सिडी के नाम पर जनता को कैसे समझाया गया। पहले बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर हम अपने पैसे से 926.50 रुपए का खरीदें। फिर उसकी 478 रुपए सब्सिडी हमारे खाते में आएगी। अर्थात बात वही हुई कि हमें अपने 448.5 रुपए का सिलेंडर तो पहले के जैसे ही खरीदना पड़ेगा लेकिन 478 रुपए सिक्योरिटी डिपोजिट की तरह एक महीने के लिए जमा करने होंगे। अगर 478 रुपए पूरे देश की जनता के जोड़े जाएंगे तो यह राशि अरबों रुपए तक पहुंच जाती है। वो पैसा तो सरकार कैसे भी बिना ब्याज के प्रयोग कर सकती है। जब मेरा पैसा ही मुझे मिला तो सब्सिडी का पैसा किधर गया? अर्थात हम खरीदते तो बिना बिना सब्सिडी के हैं, और हो जाता है सब्सिडी रिटर्न के साथ। इस कन्फ्यूजन में एक और बहुत अहम बात जुड़ी हुई है।
कुछ लोग प्रचार करने लगे कि 140-145 रुपए एक सिलेंडर पर सरकार ने कम कर दिए। मान लो हमारा सिलेंडर 926.50 का है, तो उसमें से 140 रुपए कम करने पर हमें यह सिलेंडर 786.5 रुपए का लेना पड़ेगा। ठीक है हमें फायदा हो गया। अब हमारे खाते में 338 रुपए वापस आएंगे। मतलब सिलेंडर तो 448.5 का पहले था और अब भी उतने का या कुछ कम का ही रहेगा। आप 448.5 रुपए, का सिलेंडर हमें पहले देते थे, और अभी भी वो उतना या कुछ कम का ही है। क्यों नही आप डायरेक्ट 448.5 में 140 रुपए कम कर देते हैं??? तो हमें सीधा फायदा मिलेगा। लेकिन कान सीधा ना पकड़कर थोड़ा सा हाथ घुमाकर पकड़ा जा रहा है।
इसमें भी मेरे और कुछ सवाल हैं। आपकी यह योजना सबके पास तो नहीं पहुंच रही है। पहले आपने कहा कि आधार कार्ड बनवाओ, मतलब आधार हमारी राष्ट्रीय पहचान आई डी हो गई। क्योकि उसको बनाने में ही 4-5 तरह की इन्क्वाइरी होती है। फिर बोले बैंक खाता खुलवाओ, हमने वो भी खुलवा लिया। बैंक वाले भी हमसे 10 तरह के प्रूफ, सिक्योरिटी और कोई गारंटर खाताधारक मांगते हैं। मतलब हम बड़े बड़े 2 पहचान और सिक्योरिट प्रोसेस पास करके आये हैं, फिर भी विश्वास नहीं है, राशनकार्ड मांगा जाता है। जिसके पास राशनकार्ड है, उसे ही सब्सिडी दी जाएगी। गावों और शहरों में 30-40% ऐसे लोग होते हैं, जिनके पास राशनकार्ड नहीं है। वो तो सब्सिडी से वंचित रह गए। जिनके पास राशनकार्ड गाँव का है, और मुम्बई-दिल्ली में रहता है, उसको भी सब्सिडी नहीं मिलती है। बताओं हम या प्रवासी परिवार मुम्बई का राशनकार्ड कैसे बनवाएँ? बीएमसी में इसको बनवाने के लिए बहुत चक्कर लगाने पड़ते हैं, और 2-3 हजार रुपए भी खर्च करने पड़ते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो अभी उठता है। आपकी भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहिम और भी कमजोर पड जाती है। सबसे बड़ा और सबसे निचले स्तर पर भ्रष्टाचार तो यही से शुरु होता है। तो आपकी नियत पर भी सवाल उठना लाजमी है।
अभी तक बहुत लोग अफवाह फैला रहे हैं कि पेट्रोल के दाम सरकार के कारण बहुत कम हो गए। सच भी है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तो कम हुए हैं लेकिन उसकी हकीकत कुछ और ही है। जुलाई 2014 मे जिस कच्चे तेल की कीमत 105-110 डॉलर प्रति बैरल थी, और पेट्रोल 70 रुपए में थे, वहीं आज उसकी आधे सेब कम 51-57 डॉलर हो गई है, इसका मतलब तो यह हुआ कि पेट्रोल की कीमत भी 35 रुपए तक होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके साथ साथ आपको यह भी बता दूं कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दामों में केवल टैक्स, वैट और एक्साइज ड्यूटी बढ़ा या कम करके कुछ कर सकती है। इसमें वैट राज्यसरकार के पास होता है। जबकि भारत सरकार ने इसपर एक्साइज और ज्यादा बढ़ा दी। मतलब सरकार ने बहती गंगा में हाथ धोने का काम किया। इसका उद्देश्य यह हो सकता है कि अभी तो एक्साइज बढ़ा देते हैं, बाद में जबअंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमते बढेगी तो भारत सरकार उसे कम कर देगी। इसका मतलब आगे भी जनता को उल्लू बनाने का प्लान हो चुका है।  जब पेट्रोल के दाम कम होते है तो  उससे प्रभावित होकर मालभाड़ा कम होता है, जिससे काफी हद तक मंहगाई में कमी आती है। लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया अर्थात सरकार फेल हो रही है इस मुद्दे पर।


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