पूरे देश की नज़रें इस समय देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश पर लगी हुई हैं, क्योंकि यहाँ पर जो हो रहा है वो इतिहास में पहली बार हुआ है. एक तरफ एक दल है जो लोकसभा में 80 में से 73 सीटों के साथ और विधानसभा में 48 सीटें लेकर आ रहा है, दूसरी तरफ सत्ताधारी दल वर्तमने के सबसे असफल दल के साथ गठंधन तो कभी पिता पुत्र या चाचा की अलग अलग पार्टी के साथ लड़ने की बात करता आयी. तीसरी तरफ एक ऐसा दल जो पिछले विधानसभा में सत्ताधारी दल से मात्र 3% कम वोटों के साथ है, उसके पहले सत्ता में था और लोकसभा में शून्य पर सिमट गया. चौथा दल है जो एक युवा ह्रदय के भविष्य की लड़ाई लड़ रहा है लेकिन दिल्ली से हारी हुई एक बृद्ध महिला को आगे करके. अब इस उठापठक में वोटर भी बहुत असमंजस में है, क्योंकि यूपी और बिहार की जनता लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में अलग अलग मूड से वोट करती है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबन्धन को लेकर भी संभावनाएँ बन रही हैं लेकिन गठंदन्धन सफल होगा या नहीं ये तो जनता के भरोसे पर निर्भर करता है.
राजनीति में चुनावी गठबंधन होने का मतलब है उन पार्टियों का वोट बैंक एक दूसरे में ट्रांसफर या सिफ्ट होना। बिहार में ये फार्मूला बेहतर तरीके से सफल हुआ, कारण था दोनों समाजवादी दलों का पूर्व में एक होना। उत्तर प्रदेश में अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच में गठबंधन होता है तो मुझे आशंका है क़ि समाजवादी पार्टी का वोटबैंक कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए सिफ्ट नहीं होगा। समाजवादी पार्टी का 2012 का 70% वोटबैंक 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी में सिफ्ट हो गया था, अभी तक ऐसी कोई उम्मीद नहीं है जो वो बीजेपी से पीछे हटे। उसका बचा हुआ पक्का वोट यादव और गैर यादव पिछड़ावर्ग है, जो अखिलेश यादव की छवि के साथ है।अगर बीएसपी और बीजेपी की लड़ाई होती है तो वो बीजेपी को वोट देगा, क्योंकि वो कभी बीएसपी की सरकार नहीं चाहता है। और अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो हो सकता है ये मानसिकता बदल जाए क़ि समाजवादी पार्टी 3 नंबर पर है, तो वो यादव वोट वोट तो कांग्रेस को वोट दे सकता है लेकिन गैर यादव पिछड़ा वर्ग भाजपा या कुछ बहुत सेकुलर वोट बसपा में जाएगा। क्योंकि कांग्रेस की छवि इतनी भ्रष्ट बन चुकी है क़ि उसको वोट देना लोगों को ख़तरे से खाली नहीं दिखता है। रही बात कांग्रेस के वोटों क़ि तो हाँ उसके पास अभी भी 10% वो है जो हर सीट पर मिलता है जिसमें कुछ दलित, मुस्लिम और ठाकुर वोट हैं। मुस्लिम और ठाकुर तो आसानी से समाजवादी पार्टी में सिफ्ट करेंगे गठबंधन की स्थिति में लेकिन दलित वोट मायावती को ही प्रथम दर्जा देगा। इसलिए दोनों तरफ से ऐसी कोई उम्मीद नज़र नहीं आती है जो एक दूसरे के वोट पाकर वो जीत दर्ज कर लेंगे। जनता से आप वोट ले सकते हैं लेकिन दिलवा नहीं सकते हैं।
राजनीति में चुनावी गठबंधन होने का मतलब है उन पार्टियों का वोट बैंक एक दूसरे में ट्रांसफर या सिफ्ट होना। बिहार में ये फार्मूला बेहतर तरीके से सफल हुआ, कारण था दोनों समाजवादी दलों का पूर्व में एक होना। उत्तर प्रदेश में अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच में गठबंधन होता है तो मुझे आशंका है क़ि समाजवादी पार्टी का वोटबैंक कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए सिफ्ट नहीं होगा। समाजवादी पार्टी का 2012 का 70% वोटबैंक 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी में सिफ्ट हो गया था, अभी तक ऐसी कोई उम्मीद नहीं है जो वो बीजेपी से पीछे हटे। उसका बचा हुआ पक्का वोट यादव और गैर यादव पिछड़ावर्ग है, जो अखिलेश यादव की छवि के साथ है।अगर बीएसपी और बीजेपी की लड़ाई होती है तो वो बीजेपी को वोट देगा, क्योंकि वो कभी बीएसपी की सरकार नहीं चाहता है। और अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो हो सकता है ये मानसिकता बदल जाए क़ि समाजवादी पार्टी 3 नंबर पर है, तो वो यादव वोट वोट तो कांग्रेस को वोट दे सकता है लेकिन गैर यादव पिछड़ा वर्ग भाजपा या कुछ बहुत सेकुलर वोट बसपा में जाएगा। क्योंकि कांग्रेस की छवि इतनी भ्रष्ट बन चुकी है क़ि उसको वोट देना लोगों को ख़तरे से खाली नहीं दिखता है। रही बात कांग्रेस के वोटों क़ि तो हाँ उसके पास अभी भी 10% वो है जो हर सीट पर मिलता है जिसमें कुछ दलित, मुस्लिम और ठाकुर वोट हैं। मुस्लिम और ठाकुर तो आसानी से समाजवादी पार्टी में सिफ्ट करेंगे गठबंधन की स्थिति में लेकिन दलित वोट मायावती को ही प्रथम दर्जा देगा। इसलिए दोनों तरफ से ऐसी कोई उम्मीद नज़र नहीं आती है जो एक दूसरे के वोट पाकर वो जीत दर्ज कर लेंगे। जनता से आप वोट ले सकते हैं लेकिन दिलवा नहीं सकते हैं।
हाँ ये बात तो है कि जो सपा कांग्रेस के गठबंधन में वोट सिफ्टिंग पर जो मेरी आशंका थी वो बसपा कांग्रेस के साथ आने से नहीं होगी। दलित मुस्लिम दोनों को स्वीकार करेंगे, कांग्रेस के कुछ उच्च जातियों के वोट भी अबतक उसके हैं मतलब कट्टर हैं। लेकिन गठबंधन की संभावना नहीं है, मायावती खुद को जीता हुआ मान चूकी हैं।
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