गुजरात चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस संभल-संभल कदम रख रही है और अपनी खोई जमीन को पाने के लिए के लिए बीजेपी को घेरने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है. गुजरात में सबसे ज्यादा आबादी हिन्दुओं की है इसलिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी हिन्दू वोट पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. इतना ही नहीं कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करने से भी बच रही है. क्योंकि 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मौत का सौदगार' कहा था जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा था.
गुजरात में 90 प्रतिशत आबादी हिन्दुओं की है और कांग्रेस पार्टी की नजर इन वोटरों पर है. यहीं वजह हे कि पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल, दलित आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवाणी और ओबीसी आंदोलन के नेता अल्पेश ठाकोर को अपने साथ लेकर आ गई है. जब जिग्नेश मेवाणी ने वडगाम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की तो कांग्रेस के वर्तमान विधायक मणिभाई वाघेला ने इस सीट से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया. वहीं अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हो गए तो हार्दिक पटेल भी कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर चुके हैं. राहुल गांधी अपनी तरफ से भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं इसलिए वह अब तक 20 से ज्यादा मंदिर जा चुके हैं और अपनी हर रैली से पहले मंदिर में जाकर मत्था जरूर टेकते हैं. सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी ने अपनी रणनीति बदली है.राहुल ने अपनी डिजिटल टीम में कई बदलाव किए हैं और दिव्या स्पंदना उर्फ राम्या को टीम की हेड बनाया है. राहुल की ये टीम सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत हमलों से बच रही है और मोदी सरकार को निशाना बनाकर कैंपन चला रही हैं. इसी के तहत ही सोशल मीडिया पर कांग्रेस ने 'विकास पागल हो गया' कैंपन चलाया. राहुल गांधी अपनी रैलियों के दौरान भी किसी पर व्यक्तिगत हमलों से जहां तक हो बचने की कोशिश कर रहे हैं. यहीं वजह है वह सरकार के फैसलों को लेकर बीजेपी को घेर रहे हैं. जैसे जीएसटी टैक्स पर उन्होंने केन्द्र सरकार को 'गब्बर सिंह टैक्स' के नाम पर घेरा था और नोटबंदी समेत केन्द्र सरकार के कई फैसलों पर उन्होंने सवाल खड़े किए. गुजरात दौरे के दौरान राहुल गांधी कई बार ऐसे फैसले लिए हैं जिससे पार्टी के नेता ही नहीं उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी दंग रह गए हैं. जैसे भरूच दौरे के दौरान जब एक लड़की उनकी गाड़ी के पास पहुंची तो उन्होंने उस लड़की को गाड़ी में ऊपर आने दिया. इसके बाद लड़की ने राहुल को बुके दिया और सेल्फी भी ली. इतना ही नहीं राहुल अपने दौरे के दौरान कई बार मंदिर जाने और पूजा करने का फैसला भी लिया. अब कांग्रेस में एक नया आत्मविश्वास आ गया है. राहुल गांधी अब पप्पू नहीं हैं जैसा कि ट्रेडिशनल और सोशल मीडिया में पेश किया जा रहा था. अब उन्हें अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है, खासकर उनके बर्कले प्रवास के बाद. राहुल को लेकर मेनस्ट्रीम टीवी के कवरेज में भी एक बदलाव देखने को मिला है. अब पहले से बेहतर रूप से कवर किया जा रहा है और ज्यादा स्पेस भी दी जा रही है. दूसरा बदलाव मोदी की लोकप्रियता में एक निश्चित गिरावट के रूप में सामने आ रही है. उन्हें प्रत्यक्ष तौर पर नोटबंदी और जीएसटी को लेकर आर्थिक विकास में तेज गिरावट के लिए दोषी ठहराया जा रहा है. तीसरा और सबसे सबसे बड़ा कारण यह है कि मोदी राहुल गांधी, और कांग्रेस तथा उसके गुजरात कनेक्शन पर काफी हमला बोल रहे हैं. चुनावों के दौरान, मोदी सिर्फ अपने ऊपर चर्चा को केंद्रित करने में सफल रहते हैं. चाहे वह नाकारात्मक हो या साकारात्मक सबकुछ उनके इर्द-गिर्द ही घूमते रहता है. उनकी शैली ऐसी ही है कि वह अपने आसपास एक ध्रुवीकृत वातावरण बना लेते हैं जिसमें कोई उन्हें पसंद करे या उनसे घृणा करे लेकिन कभी भी उनकी अनदेखी नहीं कर सकता. लेकिन इस बार वह ऐसा जादू चलाने में असमर्थ दिख रहे हैं. राहुल और हार्दिक पटेल के गठबंधन ने मोदी को सकते में डाल दिया है और बीजेपी को डिफेंसिव मूड में ला दिया है. मोदी अब अपनी नीतियों पर सफाई देते नजर आ रहे हैं.
राहुल गाँधी ने गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान कई मुद्दे उठाए हैं, जिसमें रोजगार, मकान और संसद के शीतकालीन सत्र में देरी जैसी मुद्दे उठाए. इतना ही न ही नहीं उन्होंने राफेल सौदा और जय शाह जैसे मुद्दों को भी अपनी चुनावी रैलियों में उठाया.