Sunday, July 29, 2018

क्या अब भारत पाकिस्तान के रिश्ते सुधरेंगें?

पाकिस्तान में इमरान ख़ान के चुनाव जीतने के बाद पता नहीं, क्यों कुछ लोगों को लग रहा है क़ि दोनों देशों के रिश्तों में बस शहद की नदियाँ बहने लगेंगी? इमरान ख़ान बेहतर क्रिकेटर हो सकते हैं लेकिन नेता के तौर पर उनको तालिबानी ख़ान ही कहा जाता है. जीतने के बाद जब प्रेस कांफ्रेस में बोल रहे थे तो हमेशा की तरह और हर नेता की तरह रिश्ते सुधारने चाहिए कह रहे थे, क्योंकि तब पूरा विश्व उनको देख रहा था. लेकिन आप उनके पूर्व में दिए गए बयान देखें, या फिर चुनावी भाषण देखें तो भारत और कश्मीर को लेकर बहुत अधिक आक्रामक दिखे. वो नवाज शरीफ पर मोदी और भारतीय मीडिया का प्रिय होने का आरोप लगाते रहे. जब नवाज़ शरीफ़ ने भारत के साथ व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था तब इमरान ख़ान ने कहा था कि वो भारत के हाथों पाकिस्तान को बेच रहे हैं. इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ पर अपने हितों के लिए पाकिस्तान के हितों के साथ समझौता करने का आरोप भी लगाया था. उन्होंने कहा था कि नवाज़ शरीफ़ कुछ भारतीय उद्योगपतियों के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को पाकिस्तान के राष्ट्रीय हित पर तरजीह दे रहे हैं. कुल मिलाकर उन्होंने नवाज़ शरीफ़ पर देश के साथ गद्दारी का आरोप लगाया था.
और वहाँ की राजनीति के साथ साथ शासन में सेना का हस्तक्षेप कौन नकार सकता है. जबकि इसबार इमरान ख़ान सेना के प्रिय उम्मीदवार थे.
उन्होने जीतने के बाद जो कहा, वो पहले से कहा जाता रहा है- हम भारत से बात करना चाहते हैं, अगर भारत एक क़दम बढ़ाएगा तो हम दो क़दम बढ़ाएंगे, हम भारत के साथ व्यापार करना चाहते हैं और इससे दोनों ही देशों का भला होगा, हमें अपने मुद्दे सुलझाने के लिए बैठकर बात करनी चाहिए. और इस सबके बाद वो 'कश्मीर ही मूल मुद्दा है' की लाइन पर आ गए. उन्होंने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की बात कि और 'कश्मीरियों पर हो रहे ज़ुल्म' के लिए घड़ियाली आंसू बहाए और फिर कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने की ज़रूरत है.
उन्होने कहा क़ि भारतीय मीडिया ने उन्हें विलेन की तरह पेश किया, जबकि सच कहें तो पाकिस्तानी मीडिया के हिसाब से ही उनकी छवि यहाँ पेश की गई. उनके दर्जनों महिला विरोधी बयान यूटयूब पर मिलते हैं, जिस वजह से उन्हें तालिबानी ख़ान कहा जाता है.
अब सवाल ये उठता है कि क्या इमरान ख़ान भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कोई बदलाव ला सकेंगे? या क्या वो कोई बदलाव लाने के प्रति गंभीर भी हैं? इन दोनों ही सवालों का जवाब नकारात्मक ही है. सबसे पहले तो नवाज़ शरीफ़ को 'मोदी का यार और देश का गद्दार' बताने के बाद इमरान ख़ान ख़ुद अपने ऊपर ये लेबल नहीं चिपकाना चाहेंगे. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत के बारे में कोई फ़ैसला लेने की शक्ति ही उनके पास नहीं होगी. असल खिलाड़ी तो पाकिस्तान की सेना और वहां के कट्टर विपक्षी नेता हैं. इमरान ख़ान जैसे किसी व्यक्ति के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बन जाने भर से भारत के ख़िलाफ़ भरी हुई नफ़रत समाप्त नहीं हो जाएगी.
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के आगे बढ़ने की बात तो भूल ही जाइये, हो ये भी सकता है कि ये रिश्ते और भी गर्त में चले जाएं और तनाव और ज़्यादा बढ़ जाए. इसकी वजह ये है कि दोनों देशों के बीच हालात इतने ही ख़राब है जितने युद्ध के दौरान होते हैं, अब इमरान ख़ान के सत्ता संभालने के बाद भारत विरोधी आवाज़ें और ऊंची होंगी. इससे पहले से तनावपूर्ण रिश्ते और पेचीदा हो सकते हैं.

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