Thursday, August 15, 2019

नो वन किल्ड पहलू खान?

अप्रैल 2017 में राजस्थान के अलवर में एक पिक अप वैन रोक कर पहलू ख़ान को उतारा जाता है, कुछ लोग मिलकर उसे मारते हैं, उस घटना का वीडियो भी बनता है लेकिन दो साल बाद 14 अगस्त 2019  को जब अलवर ज़िला न्यायालय का फैसला आता है, हत्या के मामले में गिरफ्तार लोगों को बरी कर दिया जाता है. फैसला आते ही अदालत के बाहर भारत माता की जय के नारे लगते हैं मगर इस बात को लेकर पराजय का अहसास नहीं है कि किसी को सरेआम मार कर भी हत्यारे बच सकते हैं. अदालत ने यह नहीं कहा कि हत्या ही नहीं हुई या जो मारा गया वो पहलू ख़ान नहीं था, यही कहा कि जो उसके सामने आरोपी लाए गए हैं वो बरी किए जाते हैं. भारत माता की जय करने वालों ने आरोपी का ख़्याल रखा, रखना भी चाहिए लेकिन जो मारा गया वो उनके जय के उद्घोष से बाहर कर दिया गया. आरोपी बरी हुए हैं, पहलू ख़ान को इंसाफ़ नहीं मिला है. हमारी पब्लिक ओपिनियन में इंसाफ़ की ये जगह है. जिसकी हत्या होगी उस पर चुप रहा जाएगा, आरोपी बरी होंगे तो भारत माता की जय कहा जाएगा. सब कुछ कितना बदल गया है. भारत माता की जय. भारत माता ने जयकारा सुनकर ज़रूर उस पुलिस की तरफ देखा होगा जो दो साल की तफ्तीश के बाद इंसाफ नहीं दिला सकी. पुलिस ने किस तरफ देखा होगा, ये बताने की ज़रूरत नहीं है. इसी वीडियो के सहारे पहलू ख़ान की घटना सामने आई थी. कोई भी देख सकता है कि कुछ लोग पहलू ख़ान और उसके बेटे को पिक अप वैन से उतार कर मार रहे हैं. इसी वीडियो के आधार पर राजस्थान की क्राइम ब्रांच और सीआईडी ने 9 आरोपियों को नामित किया और गिरफ्तार किया. इसमें दो नाबालिग थे. इस पूरे मामले में ट्रायल भी चला और इन सभी को राजस्थान हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई. हाईकोर्ट में सबने अपने बयान में कहा था कि ये मौक़ा-ए-वारदात पर मौजूद नहीं थे. पुलिस ने इस पूरे मामले में पहलू ख़ान के दोनों बेटों को गवाह बनाया था जो उस वक्त मौक़ा ए वारदात पर मौजूद थे. पुलिस की असफलता रही कि जिस व्यक्ति ने वीडियो शूट किया था वो कभी भी बयान देने नहीं आया. गवाह मुकर गया लेकिन वीडियो तो अब भी है. पुलिस ने यह नहीं कहा है कि वीडियो झूठा है. आरोपियों के वकील ने कहा कि वीडियो में जो लोग हैं उनके चेहरे आरोपी से नहीं मिलते हैं. अदालत ने अपने फैसले में यही कहा कि वीडियो में आरोपियों की शक्ल साफ-साफ नहीं है और वीडियो बनाने वाले ने कोर्ट में गवाही नहीं दी. एक तरफ ट्रायल चल रहा था दूसरी तरफ पहलू ख़ान के बेटे इरशाद को जान से मारने की धमकियां मिलती रहीं. विपिन यादव, रवींद कुमार, कालू राम, दयानंद, योगेश, भीमराठी. आज के फैसले में ये लोग बरी हो गए. जो नाबालिग हैं उनका मुकदमा अलग कोर्ट में चल रहा है. पहलू ख़ान ने मरने से पहले जिन छह लोगों के नाम लिये थे उन्हें सीबीसीआईडी ने पहली ही बरी कर दिया था यानि चार्जशीट ही नहीं किया. इनके नाम हैं, ओम यादव, हुकूम चंद यादव, सुधीर यादव, जगमल यादव, नवीन शर्मा, राहुल सैनी. यह सब बता रहा है कि पुलिस की जांच में कितनी खामियां हैं. पुलिस पर भरोसा नहीं रहा होगा या फिर किसी तरह मैनेज हो गया होगा, कोई वजह रही होगी जिसके कारण वीडियो बनाने वाला गवाही से मुकर गया. उसका मुकरना हमारी न्याय व्यवस्था पर भी टिप्पणी करता है. जिस वीडियो के आधार पर गिरफ्तारी हुई उसी वीडियो के आधार पर आरोपी बरी हो गए. लेकिन एक वीडियो और था, हमारे सहयोगी सौरव शुक्ला ने विपिन यादव का स्टिंग किया था जिसमें वह ट्रक रोकने से लेकर पहलू ख़ान को मारने की बात स्वीकार कर रहा है लेकिन अदालत ने इस वीडियो का भी संज्ञान नहीं लिया. सौरव ने यह स्टिंग पिछले साल अगस्त में दिखाया था.
इस घटना को लेकर मीडिया में पुलिस की जांच रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए गए. एक रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया कि पुलिस ने अपनी एफआईआर में हत्या के प्रयास सेक्शन 307 की धारा ही नहीं लगाया. सेक्शन 308 लगा दिया यानि ग़ैर इरादतन हत्या का प्रयास. पहलू ख़ान की हत्या मॉब लिचिंग की शुरूआती घटनाओं में से थी. उसके बाद कई लोगों की भीड़ ने हत्या की. ज़्यादातर मामले पुलिस की जांच के कारण दम तोड़ गए.

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