क्या मैंने कांग्रेस को ही सबसे अच्छी पार्टी और राहुल गाँधी को सबसे बढ़िया नेता मान लिया है?
जवाब है बिलकुल नहीं. जरुरत पड़ने पर मैं अपने हिसाब से आलोचना भी कर लेता हूँ. बस गाली गलौच का मेरा नेचर नहीं तो वो नहीं देखने को मिलेगा. यहाँ तक कि केजरीवाल के बारे में एक भी भला बुरा शब्द नहीं कहा और न कभी कहना चाहूंगा क्योंकि उस आदमी को मैंने पसंद किया है और अपना नेता मानता था/शायद अभी मानता हूँ पता नहीं, क्योंकि अभी भी उनको सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
केवल बात ये बता रहा था कि अब मेरा मन क्यों हटने लगा? मेरी अपनी अपनी राजनितिक समझ के साथ साथ अर्थशास्त्र और कानून पर भी राय और जानकारी है, इसलिए राहुल गाँधी कभी नेशनल हेराल्ड केश और संजय राउत पात्र चॉल घोटाले में निराधार फंसाये गए, ये नहीं कह सकता. राहुल गाँधी वाले में कंपनी और डोनेशन/ट्रस्ट कानूनों की अनदेखी हुई और कई गड़बड़ किए गए जबकि संजय राउत ने तो सैकड़ों करोड़ सीधे तौर पर डकार लिए. ईडी, इन्कम टैक्स या कोई भी जांच एजेंसी बिना किसी गड़बड़ के किसी को नहीं फंसा सकती है. हाँ ये कह सकते हैं कि किसी ने थोड़ा किया होगा तो ज्यादा में फंसा दिया. या विपक्ष को पकड़ती है और बीजेपी वालों को नहीं छूती. मायावती, मुलायम सिंह, जयललिता या जगन रेड्डी पर कांग्रेस ने जब जांच बिठाई थी तो भी सब एकदम झूठ तो नहीं था न अब है.
अरविन्द केजरीवाल जी राजनीति बदलने आये थे. पहले उन पर राज्यसभा के टिकट बेचने के आरोप गुप्ता बंधुओं के बाद से ही लगने लगे थे, हालाँकि दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी ऐसे आरोप लगे, और अब MCD चुनावों में भी यही आरोप लग रहे हैं. एक एक पार्षद एक करोड़ की टिकट ले रहा, और ये बात मैं किसी टिकट न मिलने वाले के आरोप पर नहीं कह रहा मेरी अपनी पहचान के कुछ लोगों ने बताई है ये बात.
मनीष सिसोदिया या उनके करीबियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के आरोप आज से नहीं कई सालों से लग रहे, सुकेश चंद्रशेखर नाम का ठग केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सैकड़ो करोड़ रूपये देने का आरोप लगातार लगा रहा है, मैं अमानतुल्लाह का नाम इसमें नहीं लूंगा क्योंकि उनके खिलाफ तो पुलिस ही लाइव झूठी साबित हो गई थी. और पंजाब में जिस मंत्री को हटाया भ्रष्टाचार को लेकर उसमें भगवंत मान की तारीफ भी करता हूँ. लेकिन दूसरी पार्टियों पर भी आरोप तो इसी तरह के लगते हैं न? अगर इसके बावजूद मैं आपको बाकी सबसे अलग मानता रहूं तो मतलब मैं भी भक्त ही हो जाऊँगा जो कहता है मेरे प्रभु पर लगा हर आरोप गलत है.
अभी मैं ना उनके हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा पर सवाल कर रहा और न ही उनके विकास मॉडल पर सवाल करूँगा कि कितना पैसा विकास में लगाया और कितना विज्ञापन में खर्च किया. मैंने जब देखा था दिल्ली में तब काफी काम हुए थे, उसके बाद से बहुत निजी अनुभव नहीं लेकिन फिर भी मानता हूं कि शिक्षा का एक मॉडल तैयार किया है, जो पंजाब में होना बाकी है. मैं कानून व्यवस्था पर आपसे सवाल नहीं करूँगा क्योंकि दिल्ली में पुलिस आपके पास नहीं है (हालाँकि आप प्राइवेट वालिंटियर लगाकर सुरक्षा के वादे करते थे) और पंजाब में आपको बहुत कम समय हुआ है, जहां कानून व्यवस्था बहुत खराब है। इसलिए अभी जल्दबाजी में नशे के कारोबार पर हुई कार्यवाही पर नहीं पूछ रहा।
मैं केवल वो सवाल उठा रहा हूँ कि जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ आप लोग राजनीति में आये, वही अब खुद करने लगे. अगर भ्रष्टाचार के इन सवालों को कोई ऐसे ही टाल देता और बेबुनियाद आरोप बता देता है तो भाई साहब आप क्या करते थे शुरू में? किसी की डायरी में किसी का नाम हो, किसी सोसल मीडिया की वायरल हुई लिस्ट को स्विस बैंक का खाता धारक बता देना, कितने ऐसे घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोप इन्होने लगाए और कोर्ट में माफ़ी मांगी? कितने घोटालों के केश बंद हुए और कितने नेताओं को इनके आरोपों पर सजा मिली या मुकदमें अदालत में टिके। अगर तब आप पर भरोसा किया लोगों ने तो जब आप पर वही आरोप लगेंगे तो कैसे झूठे आरोप मान लिए जाए?
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