Thursday, December 25, 2014

महात्मा गाँधी को कमलेश कुमार का पत्र

स्वर्गीय श्री मोहनदास करमचन्द गाँधी जी,

श्रद्धेय बापू चरणस्पर्श, 

मैं कई दिनों से आपको पत्र लिखने पर विचार कर रहा था, लेकिन आज लिख ही डाला। उम्मीद है, आप जहाँ भी होंगे कम से कम आज तो नहीं खुश होंगे। आप सोंच रहे होंगे कि क्यों मैने इन कायरों के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी। जो आज आपके सपनों के भारत को बांटने में लगे हैं। हालांकि आप आलोचना तो पहले भी झेलते रहे हैं। लेकिन वो आलोचना अम्बेडकर, लोहिया जैसे सकारात्मक लोग करते थे, जिनका जवाब आप दे देते थे। लेकिन आज की आलोचना तो एकदम अनोखी है। इससे ज्यादा दुख तो आपको तब भी नहीं हुआ होगा जब नाथूराम गोडसे ने आपको गोली मारी थी। क्योंकि तब आप मरे थे आपकी विचारधारा नहीं।
लेकिन जिस तरह से आज देश में अराजकता का माहौल है, पहले आपकी पार्टी कांग्रेस ने देश को कई सालों तक लुटा और फिर कुछ राष्ट्रवादी आपके सपने  (कांग्रेस खत्म करो) की बात करते हुए सत्ता में आए और उसी रास्ते पर चल पड़े जिसपर कांग्रेस चलती थी।
बल्कि जटिलताएँ और बढ रही हैं। योगी आदित्यनाथ का लव जिहाद अपने चरम पर है, धर्मांतरण, और दंगे-फसाद रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हम महाराष्ट्र (जी बापू जी वही, महाराष्ट्र जो आपके गुजरात के साथ मिला हुआ था।) में जाते हैं, तो कुछ राष्ट्रवादी हमें अल्प संख्यक बना देते हैं। और उनकी आंख के कांटे लगते हैं। अगर मुस्लिम और ईसाई हैं तो आपको मारने वाले राष्ट्रवादी आज तक वही 50 साल पुराना राग अलापते हैं। आखिर क्यों कोई संविधान के आधार पर नहीं चलना चाहता है। आपको तो पता ही होगा कि इनलोगों से बहस करना व्यर्थ है। ये आपको मारने के बाद भी आजिब दलीलें देते थे। इनसे कोई पूछें कि अगर आप भी जिन्ना की तरह या फिर इनके तथाकथिक राष्ट्रवाद पर चलते तो क्या आज भारत पाकिस्तान से इतना आगे और विकसित, लोकतांत्रिक और खुशहाल देश होता? 
ये आप पर गद्दार, नेहरू समर्थक और ना जाने क्या क्या कहकर अपने भड़ास निकलते हैं। सुना तो ये भी है कि आपके मरने के बाद कुछ राष्ट्रवादी संघियों ने मिठाई तक बांटी थी। उसी संघ से निकले मोदी जी पी एम बने और संघ के प्रमुख डॉक्टर हेडगेवार पर एक किताब भी लिखी जिसमें मोदीजी ने हेडगेवार की तारीफ और आपकी (विचारधार) आलोचना में क्या क्या नहीं कह डाला?  आपकी जयंती पर पूरे देश में आपके सपनों के निर्मल भारत की शुरुआत तो की जाती है, लेकिन उसी दिन 50 से अधिक मेरठ के दंगाइयों को जेल में भाजपा द्वारा सम्मानित भी किया जाता है। मैं जानता हूँ कि आपको उसदिन कितनी पीड़ा हुई होगी।   यह संघ और भाजपा के रिस्तो की तो पोल खोलता ही है, साथ साथ मैने यह भी सुना है कि गोरखपुर के उसी आश्रम से आपकी हत्या करने वाली रिवाल्वर लाई गई थी, जिस आश्रम को योगी आदित्यनाथ चला रहे हैं। सब दक्षिणपंथी संगठन संघ की ही साखाए हैं, हिन्दू महासभा भी जिसका जिक्र कई बार संघ की पत्रिकाओं में मिला है। उसी रास्ते से निकले मोदी जी की पार्टी के सांसद साक्षी महाराज नाथूराम गोडसे को राष्टभक्त बताते हैं। उनकी मंत्री भाजपा को वोट ना देने वालों को हरामजादे और रामजादे में बांट रही हैं। फिर भी प्रधानमंत्री चुप है, हो सकता है उनके पितृसत्तात्मक लोगों का नागपुर से डंडा डरा रहा होगा?
आज हिन्दू महासभा(हाँ वही धर्मांतरण वाले जिसका इस मुद्दे पर भाजपा, संघ, बजरंगदल सब टीवी से लेकर संघ तक बचाव कर रहे हैं।) वाले नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताते हुए पूरे देश में उसकी प्रतिमाएँ लगाने जा रहे हैं। इसकी इजाजत लेने प्रधानमत्री के पास भी जा रहे हैं। क्या आप अभी भी खुश है? क्या अभी भी आपकी विचारधारा जिंदा है? नहीं बापू नहीं। अब तो वो समय है, क़ि अगर आप नोटो पर ना होते तो कोई भी आपको पहचानता भी नहीं। सभी समाजवादी(लोहिया के चेले लालू-मुलायम) परिवारवादी हो गए, कम्युनिष्ट कमजोर हो गए, कांग्रेसी भ्रष्ट हो गए। बचा कौन? कुछ लोग नए आए हैं, एक उम्मीद लेकर लेकिन उनकी कोई सुनता नहीं है। लोकतंत्र का चौथा खंबा मीडिया अंबानी ग्रुप का हो गया है। सबकुछ खतरे में है। हिन्दू राष्ट, मुस्लिम राष्ट की तो सबको चिंता है, लेकिन आपके सपनो के भारत की किसी को चिंता नहीं है। आपके खुश होने के लिए 26 भी आ रही है, जब लालकिले से आपको खुशकरने के लिए कुछ फर्जी भाषण दिए जाएंगे। अब ज्यादा कुछ कहने का मन नहीं कर रहा है। आप खुद ही देख रहे हैं।
 
धन्यवाद बापू,
 
आपका भक्त,
कमलेश कुमार राठौर

Tuesday, December 23, 2014

क्या PK पर हो रहे हमले धर्म के पीछे छुपा डर है?


मैने पीके फिल्म का नंगा वाला पोस्टर देखकर आमिर को पहली बार कोसा था। लेकिन जब फिल्म देखी तो कुछ और ही निकला। मैं कोई फिल्म समीक्षक तो नहीं हूँ, लेकिन एक दर्शक के तौर पर कुछ बातें जरूर कह सकता हूँ। कॉमेडी, स्टोरी और म्यूजिक के आधार पर फिल्म काफी अच्छी थी। एक ऐसा संदेश हमें दे जाती है
 हम लोगों ने दुनिया को उलझा लिया है इसे सुलझाने के लिए हमें फिर से एलियन बनकर ही धरती को देखना होगा। जैसे देखने के लिए पीके किसी अनजान ग्रह से धरती पर आता है। वो धरती को गोला कहता है। अंतरिक्ष में तैरते अनगिनत गोलों में से एक छोटा सा गोला। एक छोटा सा गोला ताकि मज़हब और मुल्क की सीमाओं के बीच घिरे हम और आप अपने नज़रिये का विस्तार कर सकें। हम एक बार बाहर से धरती को देख सकें कि हमने इसके बाशिंदों को किस कदर बांट दिया है। विधू विनोद चोपड़ा और राजकुमार हिरानी की फिल्म पी के अपने रीलिज होने के समय के संदर्भ के कारण भी एक रोचक और साहसिक फिल्म बन जाती है।
जो समाज को अपने उपर सोंचने पर मजबूर करता है। कुछ लोग इसे हिन्दुत्व के खिलाफ मान रहे हैं, लेकिन उसमें हिन्दू, मुस्लिम, शिख, ईसाई सबपर सवाल खड़े किए गए। भगवान का विरोध नहीं हुआ बल्कि यह बताया कि एक भोला भाला इंसान इस धरती पर आता है, और कैसे भगवान के नाम पर उसको ठगा जाता है। वो तो उस भागवान को मानने की बात करता है, जिसने हमे बनाया है। जिसको हमने बनाया है उसका विरोध। 
इसमें क्या बुरा हुआ? आमिर ने सही किया जो पहले से किसी को स्टोरी नहीं बताई नहीं तो लोग उसकी फिल्म के पोस्टर जलाते, मुकदमा करते। अच्छा हुआ जो इस सबसे बचकर एक अच्छी फिल्म दिखाई। वैसे आमिर की फिल्मों में हीरोइन के लिए बहुत कम काम बचता है। लेकिन इसमें बहुत अच्छा रहा कि अनुष्का शर्मा ने अपनी पहली फिल्म रब ने बना दी जोड़ी के बाद पहली बार अच्छी एक्टिंग की। फिल्म में भोजपुरी भाषा का होना मेरे लिए कुछ एक्स्ट्रा एडवांटेज था। उसमें केवल बार बार हिलती हुई कार को दिखाना थोड़ा सा ओवर एक्टिंग लगा। एक बार होता तो ठीक है, अगर उसे कपड़े और पैसे ही चुराते हुए दिखाना था तो दिल्ली में चोरी के लिए कहाँ जगह की कमी है। लालकिला, जामा मस्जिद, यमुना के किनारे, मेट्रो में कहीं पर भी। यह हरकत बार बार दिखाते समय थोड़ा सा बचकाना लगा। इसके बाद जो नंगे पोस्टर के माध्यम से जाति-धर्म और बंटे हुए समाज पर हमला हुआ, वो काफी मजेदार था। मेरे हिसाब से तो सबको एक बार फिर से नंगा होकर देखने की जरूरत है कि उनके कौन सा ठप्पा लगाकर भगवान ने भेजा था। यह फिल्म उनसबको जरूर देखनी चाहिए जो आजकल बहुत धर्म परिवर्तन, घर वापसी और हिन्दुत्व के ठेकेदार बने हुए हैं। ताकि सिर्फ जूता ना रह जाए (अगर फिल्म से सीखकर यह दंगे बंद होंगे तो ही हम बचेगे नहीं तो एक दिन सिर्फ जूता ही हाथ में रह जाएगा। जैसे पाकिस्तान के एक बच्चे के जूते को बहुत शेयर किया जा रहा है ट्विटर पर)।.............सही कहा रवीश




राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...