Thursday, February 21, 2019

सउदी के प्रिंस भारत में

क्या आपको पता है कि मोदी जी जिस शख़्स से एयरपोर्ट पर इतनी गर्मजोशी से गले मिले वो है कौन?
ये साहब मुहम्मद बिन सलमान हैं। इन्हें दुनिया MBS के नाम से जानती है। सऊदी अरब के शासक हैं। इनका देश वहाबी इस्लाम को मानता है और उसे पूरी दुनिया में फैलाने के लिए इन्होंने अरबों डॉलर ख़र्च किए हैं। मेरे ख़याल से वहाबी इस्लाम सबसे वाह्यात रूप है इस्लाम का। सबसे कंज़रवेटिव। सबसे ख़तरनाक।
इनके पैसे से पाकिस्तान में चलने वाले सैकड़ों मदरसों की फ़ंडिंग होती है और उन मदरसों में से अधिकतर हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ जेहादी तैयार करते हैं। ये बात सब जानते हैं।
ये शख़्स पत्रकार जमाल खशोगी का हत्यारा है। इसी के इशारे पर इस्तांबुल के सऊदी दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी को मारकर उनके शरीर को एसिड में गलाकर नाले में बहा दिया गया था। खशोगी की हत्या में इस आदमी मे कैसी बर्बरता की थी ये गूगल पर सर्च कर लीजिए। रूह न काँप जाए तो कहिएगा। पिछले साल दो अक्टूबर को हुआ था ये। बापू के जन्मदिन के दिन। इस वजह से पूरा अमेरिका पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सऊदी अरब पर चढ़ बैठा था। सीआइए की रिपोर्ट भी यही कहती है कि पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या सीधे-सीधे MBS के कहने पर की गयी थी।
और अगर आपको अब भी सब ठीक लग रहा हो तो दो-चार बातें बता दूँ। ये शख़्स पाकिस्तान के इतने प्रिय हैं कि इनको रिसीव करने इमरान खान और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष क़मर जावेद बाजवा एयरपोर्ट गए थे। इमरान खान खुद ड्राइव करके उनको पीएम हाउस ले गए थे।
दो दिन पहले पाकिस्तान में दिया गया इनका बयान सुन लीजिए। पाकिस्तान को बीस बिलियन डॉलर की मदद देने वाले इस शख़्स ने पुलवामा हमले की साज़िश रचने वाले मौलाना मसूद अज़हर के संदर्भ में कहा था कि यूएन में आतंकवादियों की लिस्टिंग को लेकर राजनीति हो रही है। मतलब ये कि भारत मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी बताने के मामले में राजनीति कर रहा है। आज के माहौल में मेरे देश के मुँह पर ऐसा तमाचा किसी ने नहीं मारा।
इन्होंने ये भी कहा था कि जिस खुलेपन से इमरान खान भारत के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं वो क़ाबिल-ए-तारीफ़ है।
मोदीजी के समर्थकों , अगली बार मुसलमानों को गाली देने से पहले दस बार ये फोटो देखना। मोदी के साथ गले मिलने वाला ये शख़्स जिस देश का मुखिया है उससे कट्टर इस्लाम कहीं फ़ॉलो नहीं होता।
दोनों तस्वीरों मे दो दिन का फर्क है बस।

No comments:

Post a Comment

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...