Wednesday, November 16, 2016

सोनम गुप्ता कौन है?

बडा अशोभनीय सा है किसी लडकी के लिए ऐसे लिखना या बोलना। लेकिन ट्विटर पर देखते हुए पक गया था। सो आज इसकी खोज करते करते एक मित्र ने ये कहानी बताई। असलियत का तो पता नहीं लेकिन मजेदार है। कानपुर के अंदाज में।
साभार, 
"बात है 2010 की. सोनम गुप्ता का इंटर पूरा हो गया था. रिजल्ट का इंतजार था. समय था फॉर्म भराई का. रोज साइबर कैफे के चक्कर लगते. क्योंकि गुप्ता अंकल मानते थे कि इंटरनेट लगवाने से बच्चे बिगड़ जाते हैं. विक्की भइया बीकॉम थर्ड इयर में घिस-घिसके पहुंच चुके थे. सबसे जिगरी दोस्त अतुल निगम की शादी हुई थी अभी लेटेस्ट में. तबसे अतुल निगम ऐसा बेडरूम में घुसे थे कि निकलने का नाम नहीं लेते थे. विक्की भइया ने अकेलेपन में फेसबुक का सहारा ले लिया था. 5 बजे सोनम गुप्ता साइबर कैफ़े पहुंचती. आधे घंटे के 10 रुपये लगते थे. साढ़े पांच बजे गुप्ता अंकल ऑफिस से लौटते हुए स्कूटर का हॉर्न देते. सोनम पापा के साथ घर चली जाती. जबसे विक्की भइया ने सोनम को देखा था, साइबर कैफ़े जाने का टाइम बदल दिया था. 8 दिन. पूरे 8 दिन सामने वाली कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे सोनम को देखते रहे. इंटरनेट सोनम के लिए नई चीज थी. एक अद्भुत खिलौना था. आंखें फाड़ के चीजें देखा करती. कभी कभी मुस्कुराती. विक्की भइया का अकेलापन मिटता जाता. 8वें दिन सोनम फिर उसी कंप्यूटर पर बैठी. विक्की भइया अपने कंप्यूटर पर. सोनम धीरे-धीरे टाइप करती. कैफ़े के कीबोर्ड पर आवाज तेज-तेज होती. सोनम हल्के-हल्के से मुस्कुराती. कभी तेजी से ब्लश करती और दांत से अपनी मुस्कान काट के रोक लेती. अचानक सोनम की आंखें उठीं. विक्की भइया से मिल गईं. विक्की भइया तो जैसे बेहोश. स्क्रीन पर देखते हुए तेजी से फ्यूचर की प्लानिंग करने लगे. ये तक सोच लिया गुप्ता अंकल से बेटी का हाथ मांगेंगे तो क्या कहेंगे. इतने में पापा के स्कूटर का हॉर्न बजा. सोनम हड़बड़ा गई. चेहरे की रंगत बदल गई. जल्दी-जल्दी टाइप करने लगी. हॉर्न फिर से बजा. कांच के दरवाजे से देखा पापा झांक रहे थे. सोनम उठी, और झट से भाग गई. विक्की भइया उठे. बेखुदी में सोनम के कंप्यूटर पर पहुंचे. हाय, उसका फेसबुक खुला छूट गया था जल्दी में. एक चैट विंडो खुली थी. विक्की भइया खुद को रोक नहीं पाए. मैसेज पढ़ते गए. ऐसा लगता कोई जानवर अपने नुकीले पांव उनके कलेजे में धंसाता जा रहा है. इतने में पीछे से आवाज आई, ‘विक्की भइया, आधा घंटा हो गया. टाइम बढ़ा दूं?’‘नहीं’, विक्की भइया ने कहा. कुर्सी से उठे. चमड़ी छोड़ते पर्स से 10 का नोट निकाला. जाते जाते उसपर लिखा, ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’. और नोट थमाकर बाहर निकल गए. फिर कभी उस कैफ़े में लौटकर नहीं आए।"
(सीरियस नहीं लीजिए, जिसको जानने के लिए सब पागल है वो कहानी लाया हूँ।)

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