जब पूरे विश्व में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा है तो वहीं, लैटिन अमेरिका में बसा एक देश ऐसा है जिसके राष्ट्रपति इसके खतरे को सिरे से नकार रहे हैं। ये देश है अपने समुद्रीय तटों और फुटबॉल के लिए प्रसिद्ध ब्राजील। जो पिछले दिनों अमेज़न जंगलों में लगी आग की वजह से चर्चा में आया था। यहाँ के राष्ट्रपति हैं दक्षिणपंथी नेता जायर बोलसेनेरो। आप लोगों को एक रोते हुए नेता की तस्वीर याद होगी जिसे इटली का प्राइम मिनिस्टर बताकर वायरल किया जा रहा था, असल में वो इटली के पीएम नहीं बल्कि यही बोलसेनेरो का पुराना फोटो था। बोलसेनेरो अल्पसंख्यकों और समलैंगिकों पर अपनी नफरत भरी टिप्पणियों के लिए भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। याद रहे कि पहले ट्रम्प भी कोरोना के खतरे को नकारते रहे और अमेरिका अब कीमत चुका रहा है।
ब्राजील में जनता के भी दो धडे हो गये हैं एक तरफ हैं बोलसेनेरो के समर्थक जो उनकी तरह एकदम निश्चिंत हैं, और दूसरी तरफ उनके विरोधी जो मानते हैं कि वहाँ भविष्य खतरे में है। यहाँ कोरोना के केस 4500 से अधिक हो गये हैं और मरने वालों की संख्या 200 के आसपास। लेकिन बोलसेनेरो तो कोरोना को मीडिया का बनाया हुआ "हिस्टीरिया" (एक तरह का काल्पनिक डर) बताते हैं। उनके अनुसार कोरोना साधारण जुकाम और बुखार है। इससे डरने की जरूरत नहीं है। लोगों के मरने पर बोले कि सबको एक दिन मरना है। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वो तर्क देते हैं कि एक एक्सीडेंट होने पर क्या हम कार बनाना बंद कर देंगे?
यहाँ तक कि उनका अपना स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को संक्रमण से बचने को कहता रहा लेकिन खुद राष्ट्रपति तो रैलियों में जाते रहे। राजधानी ब्राजीलिया सहित कुल 27 सूबे हैं, जिनके सभी गवर्नरों ने उनको गिडगिडाने की शक्ल में पत्र लिखकर गुज़ारिश की लेकिन कोई फर्क नहीं पडा। इसके बावजूद रियो डी जेनैरो और साओ पाउलो जैसे राज्यों के गवर्नर ने लाॅकडाउन किया है, लेकिन बोलसेनेरो इसके खिलाफ रैलियां कर रहे। एक स्थानीय चैनल के पोल में 67% लोग लाॅकडाउन के समर्थन और 33% लोग बोलसेनेरो के साथ हैं। अब दोनों पक्ष सोसल मीडिया के हैसटैग से लेकर विरोध प्रदर्शन तक में एक दूसरे के खिलाफ लड रहे हैं। राष्ट्रपति के समर्थन में लोग गाडियो पर झंडे लगाकर निकल रहे हैं, पार्टी कर रहे, अपने अपने काम पर जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ उनके विरोध में लोग अपने घरों से बोलसेनेरो के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी कर रहे। बर्तन पीट रहे, गलियां Go back बोलसेनेरो के नारों से गूंज रहीं।
पूरी मानव सभ्यता के लिए आज ये खतरे का समय है जब लोग एकजुट हैं, तब ब्राजील में ध्रुवीकरण हो गया है। राजनीतिक गणित ये भी कहता है कि 2015 की मंदी से अबतक ब्राजील उबरा नहीं था कि अमेज़न के जंगल में आग लग गई, फिर कोरोना आ गया। तो राष्ट्रपति ठीक से समझते हैं कि इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगडेगी, तो ब्राजील में भी पर्यटन कम होने की वजह से ऐसा होगा। फिर 2022 में ब्राजील के राष्ट्रपति के चुनाव हैं, जिसमें वो इस नाकामी का ठीकरा गवर्नरों पर फोडेंगे। उनको अंदाजा है कि रियो डि जेनेरो के गवर्नर विल्सन विटजेल और साओ पाउलो के गवर्नर जोआओ डोरिया उनके खिलाफ चुनाव लड सकते हैं, जिनपर वो अभी से सबसे अधिक हमले कर रहे। फिर चुनाव के समय भी बोलसेनेरो यही करके चुनाव जीतना चाहते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ खबर आई है कि आइसोलेशन के विरोधी बोलसोनारो को ही आइसोलेट कर दिया गया है.
जायर बोलसोनारो को उनकी ही सरकार के मंत्रियों ने किनारे कर दिया है. दो दिन पहले ख़बर आयी थी कि मंत्रिमंडल की बैठक में वरिष्ठ मंत्रियों ने कोरोना संकट पर राष्ट्रपति के बेहद लापरवाह रवैए पर नाख़ुशी जतायी थी. और अब कहानी बदल गयी है. सूत्र बता रहे हैं कि उनकी मिलिटरी और सीनियर सहयोगियों ने बोलसोनारो से अपने हाथ में कमान ले ली है. उन्हें बैठा दिया गया है यानी अब वे नाम के राष्ट्रपति हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि मंत्री और मिलिटरी जरनल वाल्टर ब्रेगा नेत्तो ने 'ऑपरेटिंग प्रेज़िडेंट' के रूप में सारे अधिकार बोलसोनारो से ले लिया है. देखते हैं, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि कब होती है.
फिलहाल जैसे हालत बन रहे उससे संदेह है कि इस संकट के बाद 2022 चुनाव के पहले ही उनका तख्ता पलट भी हो सकता है। ये बात आप याद रखिएगा कि अमेरिका से लेकर यूरोप तक में बहुत से देशों में ऐसा सत्ता पलटने का खेल देखने को मिल सकता है। हंगरी में ऐसा हो ही गया है और अमेरिका में भी बर्नी सैंडर्स ने अपना नाॅमिनेशन वापस ले लिया है, मतलब अब मुकाबला जो बाइडन और प्रेसीडेंट ट्रम्प के बीच कड़ा होगा। यहाँ तक कि खतरा चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग की कुर्सी पर भी है।
मुझे खुशी है कि भारत में भी इतनी असहमति रखने वाले इतने दल, राज्य और सरकारें सबने मिलकर बढिया काम किया है। इतनी एकजुटता बहुत सुखद है। इसे किसी इस्लाम या हिंदुत्व में न बांटिए खासकर इस मुश्किल दौर में।
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