Friday, May 1, 2020

इजरायल में कोरोना के पीछे नेतन्याहू सरकार

इजरायल में एक साल के भीतर तीन चुनाव (अप्रैल 2019, सितम्बर 2019 और मार्च 2020) हो चुके हैं। जिसमें 120 सीटों वाली संसद में अबतक किसी को बहुमत (61 सीटें) नहीं मिला है। पार्टियों में कभी गठबंधन का फैसला हो नहीं पाया। पिछले चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 36 और विपक्षी पार्टी ब्लू एंड व्हाइट को 33 सीटें मिलीं। नेतन्याहू ने कोशिश की सभी दक्षिणपंथी और धार्मिक पार्टियों से गठबंधन की लेकिन आकडा 58 ही पहुंच पाया। ब्लू एंड व्हाइट, लेबर पार्टी और विपक्षी दलों के पास मिलाकर 55 सीटें ही पहुंच पाईं। बाकी कुछ सीटें स्वतंत्रत लोगों के पास थीं।
अब नेतन्याहू ने विपक्षी दल के नेता बेनी गैंट के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बना ली है संविधान के इमरजेन्सी नियमों के आधार पर, क्योंकि वो एक साल से कार्यकारी प्रधानमंत्री थे। अब इस सरकार में पहले 18 महीने नेतन्याहू पीएम और बेनी रक्षामंत्री रहेंगे और अगले 18 महीने इसका उल्टा मतलब बेनी पीएम बनेंगे लेकिन नेतन्याहू के लिए एक अल्टरनेटिव पीएम का पद बनाया जाएगा। हलांकि दबाव में आकर सरकार बनाने की मंजूरी देने वाले विपक्षी नेता बेनी गैंट के सहयोगी उनका साथ छोड चुके हैं। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। उनपर अपराध तय हो चुके थे, 17 मार्च से मुकदमा भी शुरू होना था, लेकिन उसके कुछ दिन पहले ही इजरायल के पूरे कोर्ट सिस्टम पर ही रोक लगा दी गई। अब ट्रायल की अगली तारीख 24 मई है। अब नेतन्याहू पूरी तरह से प्रंट फुट पर हैं। पूरे लीगल सिस्टम की आलोचना कर रहे हैं कि वो उनको काम नहीं करने दे रहा। वो इजरायल की जनता की भावनाओं को जानते हैं कि लोग आतंकवाद से कितना नफरत करते हैं इसलिए कोरोना को एक सुसाईड बमर की तरह बता रहे, जिसे केवल मैं ही हरा सकता हूँ। अब कोरोना इमरजेन्सी के बाद यहाँ बहुत कुछ दिलचस्प होगा। क्योंकि मुकदमा चलना है और अटार्नी जरनल भी नेतन्याहू की पसंद का होगा। लोगों का ये भी मानना है कि 18 महीने बाद वो बेनी के साथ डील तोड भी सकते हैं। लेकिन जनता अब भी लाॅकडाउन के नियमों का पालन करके विरोध प्रदर्शन करने लगी है कि तीन चुनाव हार चुका भ्रष्ट नेता फिर से देश कैसे चला सकता है?

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