आदरणीय राहुल भईया,
गुस्ताखी के लिए माफी चाहता हूँ, जो आपको व्यस्तता के समय डिसटर्ब कर दिया। वो तो इन्टरनेट पर आपके प्रति मोदी सेना का #PAPPU वार देखकर रहा नहीं गया। मैं आज के 21वीं सदी के भारत का एक आम युवा (आपका छोटा भाई) हूँ। आम लिखने से आप यह न समझिएगा, कि मैं आम आदमी पार्टी का दूत हूँ। आम का तो आजकल सीजन चल रहा है। कहीं आपको मैंगो फ्रूटी वाला इमरान खान और परणिति चोपडा का एड तो नहीं याद आ गया। कन्फ्यूज मत होइए, आम खाने वाला नहीं। आम आदमी वाला। मजाक छोडिए, अब आता हूँ मुद्दे की बात पर।
सुना है, कि 16-17 जनवरी को पार्लियामेंट्री कमेटी की मीटिंग में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए आपका नाम घोषित किया जाने वाला है। ये लोग आपको उपहार नहीं चुनाव से पहले ही हार (पहनाने वाला नहीं) देने वाले हैं। सबको पता है, कि इस बार कांग्रेस की हार तय है, ना मानो तो अपने सच्चे नेताओं (जयराम रमेश, मणिशंकर अय्यर और जनार्दन द्विवेदी) से पूंछकर देखिए। दस साल से आपकी पार्टी देश को लूटती आ रही है। मनमोहन सिंह का गुस्सा जनता आपके सिर उतार देगी। तो क्या फायदा? हाँ मैं आपको यह सलाह जरूर देता हूँ, कि आपको मिशन 2019 पर लग जाना चाहिए। हो सकता है, चुनाव 2015 तक ही हो जाएँ, क्योंकि अगली सरकार की उम्र कम ही होगी। फिर आप सामने आना। क्यों ना अभी आप एक डॅमी (मीरा कुमार, शिन्दे या चिदंबरम) को खड़ा कर दें। हालांकि आपने अभी कुछ महीनों में कुछ अच्छे कार्य (लोकपाल, दागी प्रत्याशी हटाने या जनता से जुड़कर मैनिफेस्टो बनाना, समलैंगिगता के खिलाफ बोलना) किए हैं, लेकिन तबतक आप बहुत देर कर चुके थे। मैं यह भी नहीं कहता कि आपकी सरकार ने पेपर पर अच्छा काम नहीं किया है। लेकिन उसे जमीन पर भी लाना पड़ेगा। आपकी यह बात बहुत अच्छी लगी, कि पहली बार आपने हार स्वीकार की और विरोधी आम आदमी पार्टी से सीखने की बात की। अगर आपको कुछ सीखना ही है, तो आप महात्मा गाँधी, अपने पिता राजीव गाँधी, ए.के. एंटेनी और कांग्रेस के इतिहास से सीखिए। अपने चापलूस टीम मेंबरों (संजय झा, रनदीप सूरजेवाला और दिग्विजय) की बजाय जमीनी नेताओं सत्यव्रत चतुर्वेदी, जयराम रमेश, जनार्दन द्विवेदी, सचिन पायलट और मणिशंकर अय्यर सरीखों से सलाह लिया करिए। आज भी केवल फ़ेसबुक और ट्विटर से जंग नहीं जीती जा सकती है। पहले आपको जमीन पर भी कुछ करना पड़ेगा। फिर आई. टी. सेल बिठाइएगा। नहीं तो मोदी के जैसे गुब्बारे से हवा निकल जाएगी। कुछ मीडिया हल्कों से हवा आ रही है, कि पार्टी प्रियंका दीदी को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है। लेकिन आप इसे भी नहीं होने देना नहीं तो वो भी पार्टी को हार से नहीं बचा सकेंगी। उसमें आपकी भी इज्जत जाएगी। लोग आपको प्रियंका दीदी से कमजोर मानने लगेंगे। अभी से उनकी भी उर्जा बचकर रखिए और 2019 में वापसी के लिए वो बहुत काम आएंगी।
गुस्ताखी के लिए माफी चाहता हूँ, जो आपको व्यस्तता के समय डिसटर्ब कर दिया। वो तो इन्टरनेट पर आपके प्रति मोदी सेना का #PAPPU वार देखकर रहा नहीं गया। मैं आज के 21वीं सदी के भारत का एक आम युवा (आपका छोटा भाई) हूँ। आम लिखने से आप यह न समझिएगा, कि मैं आम आदमी पार्टी का दूत हूँ। आम का तो आजकल सीजन चल रहा है। कहीं आपको मैंगो फ्रूटी वाला इमरान खान और परणिति चोपडा का एड तो नहीं याद आ गया। कन्फ्यूज मत होइए, आम खाने वाला नहीं। आम आदमी वाला। मजाक छोडिए, अब आता हूँ मुद्दे की बात पर।
सुना है, कि 16-17 जनवरी को पार्लियामेंट्री कमेटी की मीटिंग में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए आपका नाम घोषित किया जाने वाला है। ये लोग आपको उपहार नहीं चुनाव से पहले ही हार (पहनाने वाला नहीं) देने वाले हैं। सबको पता है, कि इस बार कांग्रेस की हार तय है, ना मानो तो अपने सच्चे नेताओं (जयराम रमेश, मणिशंकर अय्यर और जनार्दन द्विवेदी) से पूंछकर देखिए। दस साल से आपकी पार्टी देश को लूटती आ रही है। मनमोहन सिंह का गुस्सा जनता आपके सिर उतार देगी। तो क्या फायदा? हाँ मैं आपको यह सलाह जरूर देता हूँ, कि आपको मिशन 2019 पर लग जाना चाहिए। हो सकता है, चुनाव 2015 तक ही हो जाएँ, क्योंकि अगली सरकार की उम्र कम ही होगी। फिर आप सामने आना। क्यों ना अभी आप एक डॅमी (मीरा कुमार, शिन्दे या चिदंबरम) को खड़ा कर दें। हालांकि आपने अभी कुछ महीनों में कुछ अच्छे कार्य (लोकपाल, दागी प्रत्याशी हटाने या जनता से जुड़कर मैनिफेस्टो बनाना, समलैंगिगता के खिलाफ बोलना) किए हैं, लेकिन तबतक आप बहुत देर कर चुके थे। मैं यह भी नहीं कहता कि आपकी सरकार ने पेपर पर अच्छा काम नहीं किया है। लेकिन उसे जमीन पर भी लाना पड़ेगा। आपकी यह बात बहुत अच्छी लगी, कि पहली बार आपने हार स्वीकार की और विरोधी आम आदमी पार्टी से सीखने की बात की। अगर आपको कुछ सीखना ही है, तो आप महात्मा गाँधी, अपने पिता राजीव गाँधी, ए.के. एंटेनी और कांग्रेस के इतिहास से सीखिए। अपने चापलूस टीम मेंबरों (संजय झा, रनदीप सूरजेवाला और दिग्विजय) की बजाय जमीनी नेताओं सत्यव्रत चतुर्वेदी, जयराम रमेश, जनार्दन द्विवेदी, सचिन पायलट और मणिशंकर अय्यर सरीखों से सलाह लिया करिए। आज भी केवल फ़ेसबुक और ट्विटर से जंग नहीं जीती जा सकती है। पहले आपको जमीन पर भी कुछ करना पड़ेगा। फिर आई. टी. सेल बिठाइएगा। नहीं तो मोदी के जैसे गुब्बारे से हवा निकल जाएगी। कुछ मीडिया हल्कों से हवा आ रही है, कि पार्टी प्रियंका दीदी को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है। लेकिन आप इसे भी नहीं होने देना नहीं तो वो भी पार्टी को हार से नहीं बचा सकेंगी। उसमें आपकी भी इज्जत जाएगी। लोग आपको प्रियंका दीदी से कमजोर मानने लगेंगे। अभी से उनकी भी उर्जा बचकर रखिए और 2019 में वापसी के लिए वो बहुत काम आएंगी।
राहुल भईया मैं आपकी एक और बात से नाराज हूँ कि आप कह रहे हैं, कि आप शादी नहीं करेंगे। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि अब आपकी मोस्ट बैचलर ऑफ इंडिया वाली छवि नही रह गई है। अब कॉलेज की लड़कियां आपको देखकर आई. लव यू. नहीं कहती हैं। मैं तो कहता हूँ आप मिशन 2019 में एक अच्छी सी हिन्दुस्तानी (अगर कोई विदेशी पसंद आ गई हो तो बताइए, हम उसे भी स्वीकार कर लेंगे) कन्या से विवाह करके जाएँ। कोशिस यह करिएगा कि भाभी की राजनीतिक समझ भी अच्छी हो। एक से भले दो। हाँ इससे एक बात और अच्छी होगी, कि आपका मन भारत में ज्यादा लगेगा और जनता यह नहीं कहेगी कि राहुल गाँधी तो हमेशा विदेश में ही रहते हैं। आप कुमार विश्वास के ऐलान से बिल्कुल भी डरिएगा नहीं। अमेठी में आपको हराना आसान काम नहीं है। (जब तक सपा आपके साथ है)। सबसे अच्छा तो तब होगा जब मोदी भी कुमार की ललकार सुनकर अमेठी से कूद जाएँ। वहां से कुमार तो आपको टक्कर दे सकते हैं, लेकिन मोदी जी की जमानत जब्त हो जाएगी। मेरी आदत वो नहीं है, कि आपसे युवाओं के लिए पुरानी घिसी-पिटी बातें (अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीब) पर आपकी राय और मदद माँगूं। आप तो यह करना चाहते हैं, लेकिन पता नहीं कब? अंत में एक बाद कह दूं कि देश को आपकी पार्टी की बहुत जरूरत है, बसर्ते उसमें ईमानदार लोग हों। और आप मोदी के सहजादा शब्द से बिल्कुल चिंता मत करिए, क्योकि जिस दिन कांग्रेस पार्टी से आपके परिवार का वर्चस्व खत्म हो गया, उसी दिन पार्टी खत्म हो जाएगी। पत्र खुला होने के कारण कुछ बातें नहीं लिख सका हूँ, उम्मीद है आप खुद समझ जाएंगे या किसी जमीनी और ईमानदार नेता से पूंछ लेंगे। अगर आपका दिल कहे तो आप मनमोहन सिंह जी बात (राष्ट्रपति बनने) पर भी ध्यान देकर देखना।
धन्यवाद!
आपका युवा शुभचिंतक
कमलेश कुमार राठोर
धन्यवाद!
आपका युवा शुभचिंतक
कमलेश कुमार राठोर
No comments:
Post a Comment