आज जब देश में महिलाओं के प्रति बढ रहे अपराध के
लिए जिम्मेदार पुरुषवादी मानसिकता को लेकर एक नई बहस छिडी हुई है। इसके
लिए मीडिया का भी एक हिस्सा बहुत तारीफ के काबिल है। इसके लिए पिछले साल 16
दिसंबर के बाद से तो बिल्कुल क्रांति आ गई। आशाराम बापू,
तरुण तेजपाल और जस्टिस गांगुली के अलावा बहुत से प्रभावशाली लोगों ने एक
हिम्मत दिखाकर पुलिस में रिपोर्ट कराई। इसके बाद की कार्यवाही के लिए
मीडिया ने काफी अच्छा काम किया। लेकिन कुछ न्यूज चैनल पूरी तरह से मानसिक
संतुलन खो चुके हैं। वो टी.आर.पी. के लिए कुछ भी करने का मौका नहीं
छोड़ते हैं। मैं आजतक चैनल (जो अपने को देश का नंबर वन चैनल कहता है) की एक
रिपोर्ट दिखाता हूँ। वो कई बार गन्दे पोस्ट करता रहता है। उपर्युक्त पोस्ट
में बताया गया है कि कैसे ********************* मुझे तो लिखने में शर्म आ
रही है। अब आप इसे क्या कहेंगे?
http://aajtak.intoday.in/story/20-hot-and-naughty-sex-ideas-1-767036.html
इस न्यूज चैनल में दो-तीन महिला पत्रकार हैं, जो स्त्री अधिकारों के लिए बहुत बोलती रहती हैं। लेकिन क्या उनको इस पत्रकारिता में शर्म भी नहीं आती है। जब देखो ता पूनम पाण्डेय जैसे लोगों की तस्वीरें पोस्ट कर दिए जाते हैं। ब्रेकिंग न्यूज में लिखकर आता है ये देखिए फलानी हीरोइन की सेक्सी अनदेखी तस्वीरें। और इन्हीं सबके कारण पूनम पाण्डेय या श्रेयलिन चोपडा जैसे लोगों को बार-बार नंगी फोटो डालने की हिम्मत मिलती है।
http://aajtak.intoday.in/gallery/poonam-pandey-the-twitter-queen-1-3954.html
http://aajtak.intoday.in/gallery/poonam-pandey-hot-good-morning-pics-1-4021.html
http://aajtak.intoday.in/gallery/poonam-pandey-1-1477.html
क्या ऐसे चैनल इस सब के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। यह बात केवल आज तक की ही नहीं है, लगभग सभी चैनल जो अपने को नंबर वन बताते हैं (अपवाद स्वरूप एन.डी.टी.वी. राज्यसभा टी. वी. आदि को छोड़कर) एसी ही पत्रकारिता करते रहे हैं। कोई भी मुद्दा पकड में आया नहीं कि बस चालू हो जाते हैं। किसी भी घटिया मॉडल ने न्यूड होने या कोई सनसनी खेज बात कही बस ये लोग ब्रेकिंग न्यूज चला देते हैं। एक तरफ तो ये चैनल ही सबसे पहले अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले दाभोलकर की हत्या पर विरोध करते हैं, दूसरी तरफ रोज सुबह एक दो घंटे किसी पण्डित को बिठाकर भविष्य और राशि बताते रहते हैं। क्या ये उनके विचारों की हत्या नहीं है? हो सकता है कि जनता भी यही सब देखना भी चाहती हो लेकिन गुमराह किए जाने पर हमारा युवा हर गलत काम करना चाहेगा। आप उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार में किसी भी बात को लेकर तो "गुन्डाराज" टाइटल के फिल्मनुमा कई कार्यक्रम कर देते हैं। इसका कारण मुलायम सिंह का वो बयान बताते हैं, जिसमें उन्होंने बलात्कारी को फांसी न देने की बात की। लेकिन इसके उलट मध्य प्रदेश के ग्रहमंत्री बाबूलाल गौर का बयान कि बलात्कारी हमें बताकर नहीं जाता है, या छत्तीसगढ़ के ग्रहमंत्री का बयान कि बलात्कार धोखे से हो जाते हैं, पर कुछ भी नहीं कहते हैं। केवल मोदी के लिए सुरक्षा व्यवस्था के लिए 2-3 घंटे के एपिसोड दिखा जाते हैं।

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