Thursday, June 26, 2014

क्या यही हैं अच्छे दिन?

नरेन्द्र मोदी जी के नाम कमलेश कुमार का पत्र

आदरणीय नरेन्द्र भाई दामोदर भाई मोदी जी,
आपसे लोगों को खासकर हम उत्तरप्रदेशियों को ऐसे अच्छे दिनो की उम्मीद तो नही थी आपसे. क्या बजट लाए हैं आप? बिल्कुल मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम वाला कॉपी-पेस्ट कर दिया है. गरीब किसानों और गावों के विकास के लिए 100 करोड़, शिक्षा के लिए 100 करोड़ और सरदार पटेल की मूर्ति के लिए 200 करोड़. मैं तो कहता हूँ क़ि पहले आप सरदार पटेल की विचारधारा को पढिए. समझिए और उनके विचार जानिए जो वो आपके आका (मालिक) संघ के बारे में रखते थे. अगर वो सुनेंगे कि आपने अमित शाह को अपना महारथी बना रखा है तो वो फिर से मर जाएंगे लोगों के दिलों से भी.
खैर, बजट पर ही दो बातें करते हैं. आपने सोसल सेक्टर पर जितना खर्च करने को बोला था वो तो आपके वादे से 50 प्रतिशत कम है. आपने 100 नए स्मार्ट सिटी बनाने की बात तो कर दी लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि यह पैसा और जगह कहाँ से आएगी. आप इसके लिए कितने और गावों को उजाड़ देंगे. या फिर शहरों के लिए जंगल काट देंगे. फिर तो यह आदिवासी समाज के लिए बहुत दर्ददायक होगा. आप फिर नक्सलियों को गलत नहीं कह पाएंगे. आप 2-4-10 आधुनिक गाँव क्यों नहीं बना देते हैं. जो पुरेइ तरह से आत्‍मनिर्भर और स्वावलम्बी हों. आप गावों की तरफ क्यों ध्यान नहीं दे रहे हैं. आपने इंदिरा आवास और ना जाने कितनी यूपीए की योजनाएँ फोटोकॉपी करके रख दी हैं. मैं नहीं कह रहा हूँ कि इसमें सबकुछ गलत था. इस बजट में बहुत सी अच्छी चीजें थी. टैक्स में कमी और शहरी मिडल क्लास के लिए लोन सब्सिडी जैसी सुविधाएँ. लेकिन मैं मिडल क्लास नहीं गरीबों की बात कर रहा हूँ. लेकिन आपकी सरकार ने तो गरीबी नहीं गरीबों को हटाने की ठान ली है. आप मंहगाई पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. आप कह सकते हैं कि मैं बहुत जल्दबाजी कर रहा हूँ. आपको 100 दिन भी नहीं दिए. लेकिन मैं आपके कार्यों पर बात नहीं कर रहा हूँ. मैं तो आपके वादे और बजट (जो आपका प्लान है) पर याद दिला रहा हूँ. मेरी इतनी औकात नहीं कि मैं आपको पत्र लिख सकूं, और आप भी इतने फ्री नहीं कि उसे पढ़ें लेकिन आपके भक्तों की गालियों को सुनने के लिए कुछ तो बनता ही है. हाँ याद आया जिनके लिए आप 100 करोड़ लगाकर आप नई लीडरसिप का वादा कर रहे हैं. आपसे एक और शिकायत है मुझे, हम यूपी बिहार वालों का दिल आपने जिस हिन्दी से जीता था वो हिन्दी कल जब अरुण जेटली जी अंग्रेज़ी में भाषन पढ रहे थे, तब बहुत बुरा या कहें बेज्जती महसूस कर रही थी. चलिए आप जल्द बाजी मत करिए पहले आप तो अपने प्रयास करते ही रहेंगे, जैसी कि हमें और सारे मीडिया वालों को उम्मीद है.
धन्यवाद!

आपका शुभेच्छुक....

कमलेश कुमार राठोड़ (यूपी के एक गाँव( जो आपकी पार्टी के संसद का है.) का युवा राजनीति का छात्र)

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