आम आदमी पार्टी ने जनता के सामने ऐसा कोई ब्लूप्रिंट रखा ही नहीं जिसके आधार पर वो उनसे कह सके कि आप हमें वोट दें, हम यह बदलाव लाएंगे. जबकि पार्टी के पास खुद पिछले विधानसभा का अपना अनुभव था जहां उसने दिल्ली डायलॉग, डोर टू डोर कैंपेन, मोहल्ला सभा समेत अन्य विभिन्न तरीकों से जनता तक अपनी बात पहुंचाने का काम किया था. वो केवल ईवीएम ही लगे रहे। दिल्ली की हालत के लिए एमसीडी पर काबिज बीजेपी भी जिम्मेदार है। ये बात मैं नहीं बीजेपी खुद कहती है तभी तो किसी पुराने नगर सेवक को टिकट नहीं दिया। दो साल पहले केजरीवाल को दिया गया मैंडेट एमसीडी पर काबिज बीजेपी के खिलाफ और केजरीवाल की अच्छी राजनीति के लिए था। लेकिन कुछ केजरीवाल की गलतियाँ और कुछ मीडिया और राष्ट्रवाद के काॅकटेल ने केजरीवाल को ऐसा देशद्रोही और गद्दार धोखेबाज बनाया कि लोग उनसे ऊब गये। केजरीवाल के काफी काम अच्छे भी हैं इतने सालों तक एमसीडी लुटने के बाद भी उन्हे बीजेपी पसंद आ रही है। केजरीवाल के 67 वीरों का तो कहना ही क्या खूब जांच परख की थी लेकिन आज उन्हें मनोज तिवारी जैसे नेताओं का साथ पसंद आ रहा है। योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार जैसे नेताओं का बाहर जाना देश के सभी बुद्धिजीवियों को आप से दूर कर गया। केजरीवाल को भी घमंड था अब धीरे-धीरे उतर रहा है।
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राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट
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