Sunday, April 30, 2017

कुमार के नेतृत्व में आप को फायदे

मेरी बात से बहुत लोगों को गुरेज़ है क़ि देश की राजनीति में कहीं पर भी सेकुलर नैशनलिस्ट नाम की जगह बची हुई है. लेकिन मैं फिर से अपनी बात पर कायम हूँ क़ि हाँ इस प्रोपेगैंडडा के दौर में राजनीतिक उठापटक के बीच सेकुलर राष्ट्रवाद नाम की चीज़ है जो भाजपा को काउंटर कर सकती है. वैसे जातिवाद एक मुद्दा था लेकिन मंडल और बाबा साहब को बीजेपी द्वारा हाइजैक करने के बाद कोई स्पेस सेकुलर दलों के लिए बचता नहीं है. ख़ासकर आम आदमी पार्टी जैसे शहरी (दिल्ली)  दल के लिए तो जातिवाद बिल्कुल नामुमकिन चीज़ है. उसके समर्थक युवा हैं या थे, जिनपर राष्ट्रवाद या हिंदुत्व के नाम पर भाजपा ने कब्जा किया है. आम आदमी पार्टी के कई नेता भी राष्ट्रवादी सेकुलर हैं. इस पार्टी का स्वरूप भी वही है. क्योंकि आप देखेंगे क़ि गौरक्षक और दादरी पर तो आम आदमी पार्टी बीजेपी के खिलाफ है लेकिन जैसे ही कश्मीर या सेना की बात आती है वो खुले तौर पर राष्ट्रवादी सोंच रखते हैं. बस ग़लती हुई केजरीवाल से सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी विरोध के चक्कर में. जिससे उनकी छवि निगेटिव पॉलिटिक्स के रूप में बनती गई. इससे केजरीवाल के काफ़ी फ़ैन खुद अलग हुए और बचे हुए लोगों को उसका बचाव करना मुश्किल था.  मैं तो आम आदमी पार्टी को भविष्य की सॉफ्ट हिंदुत्व पार्टी के तौर पर देखता हूँ. इसीलिए मैने कहा था क़ि आम आदमी पार्टी के पास बहुत कम समय है खुद को बचाने का. मात्र दो साल से भी कम समय जिसमें वो विकास तो कर सकती है लेकिन केवल विकास के नाम पर चुनाव जीत पाएगी ये पिछले कुछ सालों की राजनीति को देखकर लगता नहीं है. कुमार विश्वास वो व्यक्ति हैं जो इस व्हाट्स एप या चुटकुले के दौर में बीजेपी को अपना मज़ाक बनाने का कोई मौका देंगे. इसके उलट केजरीवाल दिल्ली में काम करते रहें तो क्या फ़र्क पड़ता है? और हाँ कुमार विश्वास एक ऐसे नेता हैं जो मोदी या योगी से मीडिया में मिल रहा स्पेस भी छीन सकते हैं. कई बार वो ऐसे बयान दे देकर मोदी विरोध कर देते हैं जिससे मोदी समर्थक खुद कंफ्यूज हो जाता है क़ि इससे "असहमत" कैसे हुआ जाए? ये उनकी अपनी शैली है जो उनको केजरीवाल से अधिक पॉप्युलिस्ट बनाती है. दूसरी बात आप अभी कुमार विश्वास का वो कश्मीर मुद्दे पर बनाया हुआ 20 मिनट वाला वीडियो देखिए. उसमें भी ठीक यही दिखता है. उसको जो शेयर करने वाले लोग हैं वो बहुत से मेरी पहचान के मोदी या बीजेपी के कट्टर राष्ट्रवादी समर्थक हैं. जबकि उस वीडियो में मोदी की भी कड़ी आलोचना थी. वो अलग बात है क़ि मीडिया ने उसे केवल केजरीवाल का विरोध बताकर छोड़ दिया. कुमार के अधिकतर फ़ैन ऐसे हैं जिनपर अभी तक किसी दल का शाया नहीं है, बहुत से ऐसे भी फैंस हैं जो भाजपा को वोट देकर आते हैं लेकिन वो कुमार के फेसबुक पर कमेंट करते दिखेंगे, " सर जी आप बहुत अच्छे हैं, लेकिन ग़लत पार्टी में हैं......" यही कारण है क़ि मैं इस राजनीतिक दौर में बीजेपी पर वही तीर चलवाना चाहता हूँ जो उसका ही है. मतलब राष्ट्रवाद का हाइजैक करके उसको हराना. नहीं तो बहुत अधिक विकल्प अब उनके पास बचे नहीं है. और एक बात क़ि केजरीवाल को अब अपनी छवि सुधारने में बहुत समय लगेगा जो 2019 तक संभव नहीं है. क्योंकि उनकी छवि धीरे धीरे अब राहुल गाँधी की तरह चुटकुला मैटेरियल में हो गई है. 
(नोट: मैं इसके सही ग़लत के फ़ैसले तक बात नहीं कर रहा हूँ. हो सकता है एक सेकुलर और संपूर्ण राष्ट्र की परिभाषा में ये ग़लत भी हो लेकिन जब कट्टर राष्ट्रवादी और धार्मिक फ्रिंज एलिमेंट सत्ता में हों तो उनको उतारने के लिए उससे कम राष्ट्रवादी और सेकुलर नैशनलिस्ट जैसा नया शब्द बनाने में क्या हर्ज है?)

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