Monday, May 22, 2017

किसानों की अनदेखी करती सरकार

मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति दोस्तों का तो एक लाख 54 हज़ार करोड़ रुपये का क़र्ज़ माफ़ कर दिया लेकिन किसानों का क़र्ज़ माफ़ नहीं किया, जिसकी वजह से आज देश में 35 किसान रोज़ आत्महत्या कर रहे हैं तथा 2016 में क़रीब 14 हज़ार किसानों ने देश में आत्महत्या की, जबकि वर्ष 2015 में 12 हज़ार 602 किसानों ने आत्महत्या की थी. 
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तमिलनाडु सरकार ने सूखे तथा अकाल के लिए 2016-17 के लिए 39 हज़ार 565 करोड़ रुपये की मांग की, लेकिन तमिलनाडु के किसानों को एक रुपया भी नहीं दिया गया जबकि उन लोगों ने दिल्ली में धरना प्रदर्शन भी किया. इसी तरह आंध्र प्रदेश सरकार ने दो हज़ार 281 करोड़ रुपये की मांग की थी उन्हें भी एक पैसा नहीं दिया गया.
उत्तर प्रदेश में दो करोड़ 15 लाख छोटे एवं सीमांत किसान परिवारों में से केवल 86 लाख 88 हज़ार किसान बैकिंग व्यवस्था के दायरे में है, जबकि दो करोड़ 15 लाख किसानों में से एक करोड़ 28 लाख किसान साहूकार के क़र्ज़दार हैं उनको क़र्ज़ माफ़ी के नाम पर एक फूटी कौड़ी का भी फ़ायदा नहीं मिला है.
4 अप्रैल 2017 को योगी सरकार ने 31 मार्च 2016 तक बकाया तीस हज़ार करोड़ रुपये के फ़सली क़र्ज़े की माफ़ी का दावा कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया. यूपी सरकार ने जानबूझ कर यह नहीं बताया कि 31 मार्च 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच कितने किसानों द्वारा फसल ऋण वापस लौटा दिया गया था तथा लौटाई गई राशि क्या थी.
देश में 35 किसान रोज़ आत्महत्या कर रहे हैं, और यह सरकार आज़ादी के 70 साल बाद किसानों की सबसे ज़्यादा उपेक्षा करने वाली सरकार बन गई है. सरकार न किसान से समर्थन मूल्य पर अनाज ख़रीदती है और न ही बाज़ार में किसानों को सही दाम मिलते हैं.
बीजेपी ने केंद्र में चुनाव जीतने के लिए अपने घोषणा पत्र में कहा था कि किसानों को लागत का 50 प्रतिशत ज़्यादा समर्थन मूल्य दिया जाएगा, मगर सत्ता हासिल करने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा कि लागत का पचास प्रतिशत ज़्यादा समर्थन मूल्य किसानों को नहीं दिया जा सकता है.

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