Sunday, January 14, 2018

पप्पू यादव एक नेता के रूप में

अगर भाषणों में अपना एजेंडा प्रस्तुत करना ही नेता की सबसे बड़ी खूबी है तो किसी भी समाजवादी, लेफ्ट नेता या केजरीवाल से भी बेहतर मुझे पप्पू यादव लगते हैं. आज के पहले लोकसभा में बोलते सुना था, तो तोड़ा बहुत पसंद थे. आज उनके कई इंटरव्यू और भाषण सुने तो लगा ये तो लालू यादव के शुरुआती दौर को आजतक पकड़ कर चलना चाहते हैं. वो संपत्ति और मनी के centralisation की बात करते हैं. मतलब किसी भी आदमी के पास 1 करोड़ से अधिक की संपत्ति या 10 लाख रुपए से अधिक पैसा नहीं होना चाहिए.  वो शिक्षा और स्वास्थ्य के माफियाओं को उखाड़ फेकने की बात करते हैं. निजीकरण के खिलाफ क़ानून लाना चाहते हैं. वो indirect टैक्स ख़त्म करना चाहते हैं. वो रोज़गार पर बहुत फ़िक्स एजेंडा रखते हैं क़ि अगर सरकार रोज़गार ना दे पाती है तो लोगों को सोसल सिक्योरिटी देना होगा. वो सीनियर सिटीज़न के देखरेख के लिए एक अलग से आयोग और फंड की व्यवस्था सोचते हैं. वो इंटरकास्ट मैरीजेस करने वालों को सरकारी नौकरी या 10 लाख रुपए देना चाहते हैं. वो जातिवाद को जड़ से ख़त्म करने के कई कड़े नियम बताते हैं. वो राजनीतिक चंदे और चुनाव प्रक्रिया पर पब्लिक फंडिंग (एक लिमिट तक ) चाहते हैं. वो राजनीति से पैसे और अपराध को खतम करना चाहते हैं। पार्लियामेन्ट्री सिस्टम में भी कई बदलाव करना चाहते हैं. जैसे जिसको अधिकतम 2 बच्चे हों, पढ़ा लिखा और संविधान की कुछ समझ रखता तो साथ ही साथ उसने इंटरकास्ट शादी भी की हो उसी को चुनाव लड़ने को मिलेगा.  वो संविधान को किसी धार्मिक ग्रंथ से ऊपर बनाने के लिए कई कदम उठाना चाहते हैं. वो धर्म को निजी मानकर पब्लिक में नहीं देखना चाहते हैं, मतलब किसी धार्मिक रैली या जुलूस का आयोजन पब्लिक प्लेस में नहीं हो. यहाँ तक क़ि वो शिक्षा को अनिवार्य बनाना चाहते हैं. वो क्रिकेट को पैसे से दूर करके अन्य खेलों को बढ़ाने के कई कार्यक्रम बताते हैं. वो किसी मार्क्सवादी या लेनिन वादी सिद्धांत से प्रेरित नेता से भी बेहतर व्यवस्था देखना चाहते हैं. वो राजनीति की गंदगी को बेहतर समझते हैं, इसलिए उसमें सफाई के लिए कई कीटनाशक क़ानून भी लाना चाहते हैं. वो दुनिया की हर घटना का ज़िम्मेदार राजनीति को मानते हैं. मतलब दुनियाँ में होने वाली हर घटना के पीछे सीधे या अपरोक्ष रूप से राजनीति को ही ज़िम्मेदार मानते हैं. वो दहेज विरोधी क़ानून लाकर इस कुप्रथा को ख़त्म करने के कई उपाय बताते हैं. वो इसे प्रमोट करने के कई उपाय बताते हैं. जब कोई उनसे पूछे कि आप खुद कौन से संत हो? आप भी तो बाहुबली हो. तो वो बड़ी बेबाकी से कहते  हैं क़ि हाँ मैने अपराध किए हैं केश भी हुए हैं और मैने जीते भी हैं. इस देश के सिस्टम में केश जीतना कौन सी बड़ी बात हैं. लेकिन मेरे हर अपराध के पीछे एक सच था कभी किसी बड़े बाप की औलाद ने किसी ग़रीब औरत के साथ कुछ किया तो मैने उसको अगवाह करके उससे पैसे वसूल कर उसके जैसी न जाने कितनी लड़कियों की मदद की. मैने अब तक 1000 से अधिक लड़कियों की तरफ से शिकायतों में लड़के को डरा धमका के बिना दहेज के शादी करवाई है. मैने हज़ारों शादियों मे आर्थिक मदद की है. कितनों को नौकरी दिलवाई है. ग़रीबों की मदद की है दबंगो से. किसी भी दलित या पिछड़े पर हुए अत्याचारों के खिलाफ फारवर्ड लोगों को पीटा है. क्योंकि मुझे पता चल चुका था क़ि इस देश में "रण में विजय उसी की होगी जिसके बाहों में बल होगा." कोर्ट के चक्कर सालों लगाउँगा लेकिन न्याय न मिल पाएगा. कम से कम वो अपने अति आदर्शवादी व्यवस्था को सामने रखने में किसी भी नेता से बेहतर और बेबाक दिखते हैं. ऐसा लगता है क़ि काश इसे भी नायक फिल्म के अनिल कपूर जैसा मौका मिल जाए.

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