Wednesday, September 3, 2014

मुम्बई के गणपति दर्शन


वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गणपति बप्पा मोरया........मंगल मूर्ति मोरया..........
वैसे तो भगवान गणेश जी से हमारा भी खास भक्ति बन्धन या रिस्ता है। क्योंकि उनके पिता भगवान महादेश शिव शंकरजी (बाबा विश्वनाथ ) हमारे काशी (बनारस) में बसते हैं। और हमने बचपन से ही अपने घरों, मंदिरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रथम पूजन भगवान गजानन का ही करते और देखते रहे हैं। गणेश चतुर्थी के इतिहास का भी हमारे यहाँ से पुराना नाता है। लेकिन इसका एक उत्साह महाराष्ट्र में देखते बनता है। मैं महाराष्ट्र वो में तीन साल का हो गया हूँ। अर्थात तीन साल से रह रहा हूँ। वो भी जब उत्सव देखने का मौका मुम्बई जैसे शहर में मिले तो बात ही कुछ और होती है। इसबार भी मैने बहुत सारे गणेशोत्सव पाण्डालों में जाकर भ्रमण किया और इसी अनुभवो को आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।
गणेशोत्सव के शुरू होते ही मुम्बई समेत पूरे महाराष्ट्र मेंगणपति बाप्पा मोरयाकी धूम मच गई है। 
गणपति बप्पा का आगमन हो चुका है। डेढ़ दिन बाद गणपति की एक झलक के लिए पंडालों में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में ऐसे गणपति भक्तों की भी कमी नहीं है जिन्हें बाप्पा के दर्शन करने के लिए अनोखे तरीकों की तलाश रहती है। आज गणेशोत्सव का पाचवा दिन है। मुम्बई के अलग-अलग गणेश पंडालों में सुबह से ही भक्तों आना शुरू हो गया है। हर तरफगणपति बप्पा मोरयाकी गूंज सुनाई दे रही है।
लाल बागचा राजा:
मुम्बई के लालबाग के गणपति की तो बात ही कुछ और है। मुम्बई के मशहूर गणेश मंडललालबाग के राजामें इस वक्त श्रद्धालुओं की खासी भीड़ है। यहां सुबह की आरती में भी बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे। लालबाग के गणपति के दर्शन के लिए अभी से लोगों का तांता लगना शुरू है। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलमुंबई का सबसे अधिक लोकप्रिय गणेश मंडल है।  इस मंडल की स्थापना वर्ष १९३४  में हुई थी। आज हालत यह है कि लालबाग के राजा के दर्शन करना ही अपने आप में भाग्यशाली हो जाना है यहाँ मन्नते माँगी जाती है और बताया जाता है कि लोगों की मन्नते पूरी भी होती है लालबाग के राजा की ख्याति इसी बात से आंकी जा सकती है यहाँ का जो चढ़ावा आता है वह  २० से २५ करोड़ रुपयों से अधिक का है जो भक्तजन अर्पित करते हैं गणेशोत्सव के दौरान मुम्बई का जोश देखते ही बनता है। लाल बाग़ मैं इसके पहले दो बार जा चुका हूँ। यहाँ के गणपति की शोभा ही निराली है। मुम्बई ही नहीं पूरे देश में अपने आकार और सजावट के लिए मशहूर लालबाग़ को हमने रात में देखा एक अद्भुद नजारा दिखता है। हालांकि हमने हर बार दूर से ही दर्शन किए हैं, क्योंकि चरणस्पर्श करने के लिए कम से कम 30 घंटे लगते हैं। बारिस के समय में रात में हम इतना देर तक रुक नहीं पाए और गणपति बप्पा को दूर से ही नमन कर लिया। यहाँ एक बड़े ग्रुप में मैं  जाता रहा हूँ। क्योंकि इतनी भीड़ में अकेले जाना अच्छा नहीं होता है। वैसे तो वहाँ पर सुरक्षा व्यवस्था बहुत अच्छी रहती है। लेकिन कई साल पहले वहाँ की कई घटनाएँ अपनी सुरक्षा की ओर भी इशारा करती हैं। पिछले साल का ही देख लीजिए। टीवी पर पूरे देश ने देखा था क़ि जब पूरी मुंबई गणपति बाप्पा के शोर से गूंज रही थी, मुंबई के सबसे बड़े गणपति लाल बाग़ के राजा की विदाई हो रही थी। हज़ारों का हुजूम था और इस हुजूम में एक लड़की चीख रही थी, चिल्ला रही थी।।।वैसे इसबार पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी मजबूत कर रखी है। इसके बाद हमआस पास के ही कुछ और गणपति पाण्डालों मे जाने की कोशिश करते हैं। हमें अंदाजा लगाना मुस्किल नहीं था क़ि हम मुम्बई के सबसे अधिक धूमधाम से गणपति महोत्सव मनाने वाले क्षेत्र में हैं। थोड़ी थोड़ी सी दूरी पर कम से कम 10-15 बड़े पाण्डाल मिलते हैं, और सबका नाम उस क्षेत्र के राजा जोड़कर था। हम रात में बहुत घूमते रहे, मुझे तो पता भी नही चला क़ि कहाँ के रास्ते से कहाँ गया था। 
श्री सिद्धिविनायक मंदिर:
सुबह 5 बजे हम भारत के शीर्ष 5 सबसे अमीर और शुन्दर, और मान्यता वाले मंदिर श्री शिद्धिविनायक पहुंच जाते हैं। वैसे तो मैं यहाँ पर हमेशा ही एक दो महीने में जाता रहता हूँ। लेकिन गणपति महोत्सव में जाना अपने आप में एक बड़ा अद्भुद अनुभव रहा। रात से ही वहाँ पर दूर दूर से आए लोगों की लाइन लगी होती है। सुबह 5 बजे मंदिर खुलने के बाद हमें लगभग 1130 बजे दर्शन हो पाते हैं। यहाँ की व्यवस्था आपको बहुत अच्छी मिलेगी। पुलिस और सेना की टीम पूरी तैयारी के साथ किसी भी आपदा से निपटने को तैयार हैं। यहाँ पर बहुत सारे स्वयं सेवक पूरी व्यवस्था को सूद्रण बनाते हैं। मैं लाल बाग़ और सिद्धिविनायक मंदिर के पास की एक बात का और जिक्र करना चाहूंगा, क़ि इन जगहों पर एक जबरजस्त मेले जैसा माहोल होता है। वैसे तो गणपति महोत्सव के बारे में लिखते समय मुझे कुछ गलतियाँ नहीं निकालनी चाहिए। लेकिन एक लेखक के तौर पर उनका जिक्र करना भी जरूरी है। अगर 99 अच्छी बातें लिख रहा हूँ तो 1 गलत बात दिखने पर भी कहना ही चाहिए। आपको इन दोनो जगहों पर एक बात अचंभित करती है। वो है VIP भगवान के चरणों में या उसकी नजर में कोई वी आई पी नहीं होता है। लेकिन यहाँ का प्रसासन यह भेद पैदा करता है। जो लोग जल्दी दर्शन करना चाहें तो ज्यादा पैसे का VIP पास लेकर जाएँ और आम आदमी लम्बी लम्बी लाइनों में इंतजार करे। सेलिब्रिटी होना एक अलग बात है, उनके लिए यह व्यवस्था हो सकती है क्योंकि उनके फैन्स भीड़ में उनको नुकसान पहुचा सकते है। लेकिन अन्य पैसे वाले लोगों के लिए भी ऐसी व्यस्था होना गलत है। यह बात मुझे थोड़ी सी गलत लगी।

मैं जहाँ रहता हूँ, यानि सान्ताक्रुज के लगभग 10-15 गणेशोत्सव पंडालों में जाकर दर्शन किए और जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा की।  क्योंकि मैं किताबे पढने का शौक रखता हूँ तो इसलिए मैने लाइब्रेरी में एक दो पत्रिकाएँ और पुस्तकें पढी और कुछ जानकारी हासिल की। इन जगहों पर मैं स्वयं तो नहीं गया लेकिन पढ़कर लिख रहा हूँ।
जीएसबी सेवा मंडल गणपति पांडाल:
यह हैं मुम्बई के सबसे धनाड्य गणेश जी , जी हाँ , जीएसबी सेवा मंडल गणपति की मूर्ति शहर में सबसे अमीर मूर्ति कहलाती है यह ट्रस्टगौड़ सारस्वत ब्राह्मणसमुदाय के अधीन है। मूर्ति को हर वर्ष  कई करोड़ के आभूषणों से सजाया जाता है ।यानी सोने से लादे होते हैं गणेशजी एक अनुष्ठान के रूप में, लोग अपने शरीर के वजन के बराबर का प्रसाद इस मूर्ति को चढ़ाते है। जीएसबी सेवा मंडल कि स्थापना सन 1951 में हुई थी।
लोग बतातें हैं कि कुछ चमत्कार भी हुए हैं और यही वजह है कि जीएसबी सेवा मंडल गणपति के आशीर्वाद लेने लोग उमड़ते हैंश्री। दोरई स्वामी, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन। इनका कश्मीर के उग्रवादियों द्वारा अपहरण कर लिये जाने पर उनकी पत्नी द्वारा जीएसबी गणपति को की गई प्रार्थना और प्रसाद के बाद वे सही सलामत लौटे। ‘लघु जल टैंक’ 5 दिन के त्योहार के दौरान लाखों भक्तों को पानी पूरा प्रदान करता है। यह कभी खाली नहीं हुआ है।इसका पानी बिल्कुल शुद्ध है।

गणेश गली गणपति पांडाल:
यह मंडल लालबागचा राजा से केवल कुछ कदमों की दूरी पर है, यह भी कोई कम प्रसिद्ध नहीं हैं। हर साल ये मंडल वर्तमान मामलों आधारित सामाजिक विषयों के ऊपर ध्यान देता है। पिछले साल पंडाल को मैसूर को चामुंडेश्वरी मंदिर के समान सजाया गया था। 
वन्दौं श्री गणपति पद, विघ्नविनाशन हार।
पवित्रता की शक्ति जो, सब जग मूलाधार॥१॥


हे परम ‍‍ग्यान दाता, सकल विश्व आधार।
छ्मा करें वर दें, विघ्नों से करें उबार॥२॥


हे जग वंदन हे जग नायक!
हे गौरी नंदन! हे वर दायक॥
खेतवाड़ीचा राजा पांडाल:
खेतवाड़ीचा राजा दक्षिण मुंबई के ख्यातिनाम गणेश जी हैं यहाँ दर्शन पाने के लिये और सभी धर्मों से भक्त आते हैं। भक्त यहां ना केवल आरती में भाग लेने आते हैं बल्कि दोपहर के महाप्रसाद भोजन में भी शामिल होते हैं। स्वयंसेवकों के एक बड़े दल को भी यहां तैनात किया जाता है जो लंबी कतारों में होने वाली भगदड़ को रोकने के लिए मदद करते हैं।

 


अंधेरीचा राजा पांडाल:
मुंबई के अंधेरी इलाके के लोकप्रिय गणेश मंडलअंधेरीचा राजासर्वाधिक लोकप्रिय गणपति पांडाल में शामिल है। प्रसिद्ध मूर्ति आजाद नगर सार्वजनिक उत्सव समिती द्वारा प्रबंधित किया जाता है। भक्तों का दावा है कि यहां के दर्शन करके उनकी इच्छाऐं पूरी हुई हैं। अंधेरीचा राजा टीवी कलाकारों और बॉलीवुड कलाकारों के अत्यंत पसंदीदा और लोकप्रिय गणपति हैं।
गणपति बप्पा का विसर्जन:
फिर मैं  अकेला ही एक दिन जुहू चौपाटी पर जाता हूँ। 7वें दिन का गणपति विसर्जन देखने। रास्ते मे में ही रिक्से वाला उतार देता है क्योंकि ट्राफिक में आगे जाना मुस्किल था। मैं लगभग एक घंटे के बाद वहाँ पहुचता हूँ। रास्ते भर जबरजस्त ढोल, नगाड़े और डीजे बैंड्स के साथ नाचते झूमते हुए लोगों का उत्साह देखते ही बनता है। दरिया के किनारे जाकर मुझे कुछ और ज्यादा भीड़ के साथ सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है। वहां पर ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो अकेले ही परिवार के साथ में गणपति बप्पा का विसर्जन करने आए हैं। कुछ सार्वजनिक गणेशोत्सव वाले भी हैं। फिर यहाँ पर एक और नई चीज मुझे देखने को मिली।
चूंकि अभी अंतिम दिन के गणपति विसर्जन का समय नहीं आया है। इसलिए मैं इस वर्ष के बारे में अधिक तो नहीं बता सकता हूँ लेकिन पिछले वर्ष के अनुभव को साझा कर रहा हूँ। इस दिन आपको मुम्बई में हर जगह, हर गली और सड़क पर तेज आवाज में डीजे और बैंड्स बजते मिलेंगे। किसी की कोई बात नहीं सुनाई देती है। सडकें भरी पड़ी होती हैं लोगों से। दरिया किनारे जाने में तो डर लगता है, इंसानों का सैलाब देखकर। फिर भी मैं पिछले वर्ष गया था। पूरी तरह से गणपति बप्पा की भक्ति में डूबा हर भक्त आपको अपनी ही धुन में मिलेगा। 
जैसा कि मैने आपको बताया कि वहाँ बहुत अधिक भीड़ है। ऐसे में ऐसे गणपति भक्तों की भी कमी नहीं है जिन्हें बाप्पा के दर्शन करने के लिए अनोखे तरीकों की तलाश रहती है। इन्हीं में से एक तरीका है गणेश उत्सव के दौरान बप्पा का एरियल व्यू यानी आकाश दर्शन करना। इसके लिए श्रद्धालु महंगी कीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहते है।
वक्रतुण्ड महाकाय कोटि सूर्य सम प्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
विनायक नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय ।
अविघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
अंतिम दिन के गणपति विसर्जन के बाद इसमें कुछ और शब्द जोडूँगा


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