एक
राजनैतिक छात्र होने के कारण, मुझे बहुत अच्छा लगेगा अगर महाराष्ट्र में
भाजपा और शिव सेना अकेले अकेले चुनाव लड़ेगी. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो भाजपा
के पास राज ठाकरे के विकल्प खुले रहेंगे. लेकिन भाजपा के बड़े नेता यूपी और
बिहार के अपने भविष्य को देखते हुए ऐसा नहीं कर सकते हैं. इसलिए भाजपा को
शिवसेना की सभी शर्ते माननी पड़ेगी.
महाराष्ट्र
को इंतजार है, अपनी पहली महिला मुख्य मंत्री का. अगर सभी पार्टियों के उपर
नजर डालकर देखें तो किसी के पास भी कोई बड़ी महिला नेता ही नहीं है, जो
महाराष्ट्र की सीएम बनाई जा सके. आम आदमी पार्टी का भले ही कुछ ना हो
महाराष्ट्र की राजनीति में अभी, लेकिन उसके पास अंजली दामानिया और प्रीति
शर्मा जैसी दो बड़ी नेता हैं. ऐसे में अरविन्द का यहाँ चुनाव ना लड़ना अपने
आप में एक गलत फैसला हो सकता है. जिसके
पास योगेन्द्र जैसा राजनीतिक प्राणी हो. वो ऐसी गलती कैसे कर सकता है. यहाँ
लोकसभा चुनाव के दौरान मैने लोगों में आम आदमी पार्टी को लेकर एक बड़ा
क्रेज देखा था. लोग चाहते थे इसके साथ जुड़ना. युवा लड़के लड़कियां जो अपने
कॉलेज, और नौकरी छोड़कर अरविन्द के लिए प्रचार कर रहे थे. लोग आम आदमी
पार्टी को ईमानदार विकल्प मानते थे, लेकिन पता था क़ि कॉंग्रेस को हराने के
लिए मोदी ही आगे है, इसलिए भाजपा को वो दिया था. यहाँ पर अब लोग मोदी के
रेल किराए मे बढ़ोत्तरी, अच्छे दिनों के झूठे वादों और मंहगाई से गुस्से
में हैं, नहीं पूरे महाराष्ट्र तो कम से कम मुम्बई, ठाने, नागपुर, पुणे और
अन्य छोटे छोटे शहरों में अच्छा प्रदर्शन करेगी पार्टी. मुझे उम्मीद है कि
अरविन्द लोगों की भावनाओं को समझेंगे और कुछ साहसिक कदम उठाएंगे.
माफ
करिएगा दोस्तों मैं इस पंक्ति में मेधा ताई को भूल गया. अगर महिला और समाज
कल्याण की बात हो और मेधा पाटकर का नाम ना लिया जाए तो यह बहुत गलत होगा.
आम आदमी पार्टी में यह नेत्री भी बड़ी काबिल, ईमानदार और साहसी है. इनका
संघर्ष किसी से छिपा नहीं है.आप कह
सकते हैं क़ि मैं अरविन्द केजरीवाल का समर्थक हूँ. लेकिन यह बिल्कुल भी
नही हो सकता है. मैं हर समय एक नई राजनीति कर समर्थक रहा हूँ. 2012 के
चुनाव में मैं अखिलेश यादव का फैन था. आज जब कोई नया विकल्प दिखा तो उसे
प्रस्तुत होने को कहा है, उसके साथ जुड़ा नहीं हूँ.
फिर से मैं भगवा गठबंधन को लेकर कुछ बात करना चाहता हूँ. इनके बीच में एक बड़ी जुबानी जंग चल रही है. एक तरफ शिवसेना अपने मुखपत्र सामना में कुछ लिखती है, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेता जवाब देते हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना-बीजेपी के ढाई दशक पुराने गठबंधन में पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को सामना में छपे लेख पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि नपुंसकता भी तलाक की वजह बन सकती है। शिवसेना के मुख्यपत्र 'सामना' में संपादकीय में कहा गया था कि ज्यादा हवस तलाक का कारण होती है। हाल ही में आए कोर्ट के एक फैसले से पंक्ति उठाते हुए कहा गया था, 'गठबंधन के सहयोगियों को जीत का सपना देखना चाहिए। इसके लिए सभी पार्टियों को ज्यादा सीटों की हवस छोड़नी चाहिए। यह कहना ठीक नहीं है कि उतनी सीटें मिलेंगी, तभी गठबंधन में रहेंगे।'
लोकसभा चुनाव में अपनी अप्रत्याशित जीत के बाद बीजेपी सहयोगी शिवसेना को अधिक सीटें देना नहीं चाहती है। दूसरा फॉर्म्युला जो पेश किया जा रहा है, उसके मुताबिक बीजेपी ने अपने लिए 126, छोटी सहयोगी पार्टियों के लिए 18 और शिवसेना को 144 सीटें देने की पेशकश कर रही है। हालांकि, शिव सेना से सांसद संजय राउत ने कहा, 'हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम 150 सीटों से कम सीटों पर नहीं मानेंगे।'
फिर से मैं भगवा गठबंधन को लेकर कुछ बात करना चाहता हूँ. इनके बीच में एक बड़ी जुबानी जंग चल रही है. एक तरफ शिवसेना अपने मुखपत्र सामना में कुछ लिखती है, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेता जवाब देते हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना-बीजेपी के ढाई दशक पुराने गठबंधन में पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को सामना में छपे लेख पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि नपुंसकता भी तलाक की वजह बन सकती है। शिवसेना के मुख्यपत्र 'सामना' में संपादकीय में कहा गया था कि ज्यादा हवस तलाक का कारण होती है। हाल ही में आए कोर्ट के एक फैसले से पंक्ति उठाते हुए कहा गया था, 'गठबंधन के सहयोगियों को जीत का सपना देखना चाहिए। इसके लिए सभी पार्टियों को ज्यादा सीटों की हवस छोड़नी चाहिए। यह कहना ठीक नहीं है कि उतनी सीटें मिलेंगी, तभी गठबंधन में रहेंगे।'
लोकसभा चुनाव में अपनी अप्रत्याशित जीत के बाद बीजेपी सहयोगी शिवसेना को अधिक सीटें देना नहीं चाहती है। दूसरा फॉर्म्युला जो पेश किया जा रहा है, उसके मुताबिक बीजेपी ने अपने लिए 126, छोटी सहयोगी पार्टियों के लिए 18 और शिवसेना को 144 सीटें देने की पेशकश कर रही है। हालांकि, शिव सेना से सांसद संजय राउत ने कहा, 'हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम 150 सीटों से कम सीटों पर नहीं मानेंगे।'
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