महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख और शहीद हेमंत करकरे के बारे में आजकल बहुत चर्चा हो रही है. और यह चर्चा है एनआईए की नई चार्जशीट के कारण. NIA ने जब अपना चार्जशीट पेश किया तो कइयों को लगा कि हेमंत करकरे की जांच को ही संदिग्ध बना दिया गया है। क्या ऐसा अफसर जिसने अपनी जान की परवाह तक नहीं की वो ऐसी जांच करेगा जिससे आतंकवाद की एक ऐसी थ्योरी हवा में तैरने लगेगी जिस पर कोई यकीन करने के लिए तैयार नहीं है। महाराष्ट्र में पुलिस कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं कि हेमंत करकरे जांच पूरी कर कई दिनों तक इंतज़ार करते रहे ताकि कोई जल्दबाज़ी न हो जाए। वो फूंक फूंक कर कदम रख रहे थे ताकि उनकी जांच सवालों के घेरे में न आ जाए। हेमंत करकरे की जांच के आधार पर दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत के सदस्यों को मालेगांव धमाके में गिरफ्तार किया गया था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और अन्य लोगों को पकड़कर जेल में डाला गया.
मालेगांव धमाके मामले में चार्जशीट पेश करते हुए NIA के महानिदेशक शरद कुमार से जब पत्रकार ने पूछा कि एनआईए पहले तो मालेगांव धमाके के आरोपियों का विरोध करती रही है। क्या अब उसने अपना स्टैंड बदल लिया है। तो उन्होंने कहा, 'जब तक हमारी जांच पूरी नहीं हो गई थी तब तक हमें एटीएस की जांच पर निर्भर होना पड़ा था। अब हमने जांच पूरी कर ली है। इसलिए हमने अंतिम चार्जशीट दायर कर दी है।'
समाचार एजेंसी पीटीआई ने एनआईए चीफ का यह बयान प्रकाशित किया है। हेमत करकरे की टीम ने साध्वी प्रज्ञा और पांच अन्य के ख़िलाफ़ कुछ तो सबूत जुटाये होंगे तभी तो वो इतना आगे तक गए। सात साल से साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित जेल में हैं। क्या यह कह देना काफी है कि पर्याप्त सबूत नहीं है। क्या यह नहीं बताया जाना चाहिए कि सात साल तक जेल में रखने के पीछे किस तरह सबूतों से छेड़छाड़ हुई। यह मामला तमाम कोर्ट की निगाह से भी गुज़रता रहा है। वो मोटरसाइकिल जो साध्वी प्रज्ञा के नाम पर थी और जिस पर धमाके हुए थे वो बात कहां गई। इसी आधार पर आरोप लगा। साध्वी का कहना था कि उनकी गाड़ी दो साल से सहकर्मी इस्तमाल कर रहा था इसलिए उनका रोल नहीं है। एजेंसी की दलील थी कि सहकर्मी आपके साथ काम कर रहा है। गाड़ी यहां तक आई है उसके बीच में कुछ लोग हैं जिनकी हत्या हो गई है। इन सब बातों पर विस्तार से तभी कहा जा सकता है जब चार्जशीट में क्या लिखा है आप जान पायेंगे। लेकिन क्या एनआईए ने दक्षिण पंथी संगठन अभिनव भारत को आरोप मुक्त कर दिया है। क्या एनआईए ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को आरोप मुक्त कर दिया है। अभी भी दस लोगों के ख़िलाफ कथित रूप से आरोप बरकरार हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के ख़िलाफ़ बारूद सप्लाई करने, बम रखने और साज़िश के आरोप अब भी हैं। 2006 और 2008 के अलग-अलग मालेगांव धमाको के आरोपियों में दो नाम एक से हैं। एनआईए मानती है कि ये दो लोग इन धमाकों में कथित रूप से सक्रिय थे। दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत के सदस्यों के नाम इस आरोप पत्र में भी हैं।
साध्वी प्रज्ञा और पांच के ख़िलाफ़ मकोका हटाया गया है क्योंकि मकोका लागू करने के सबूत नहीं मिले है। तो क्या इससे जांच की दिशा बदल गई या सिर्फ साध्वी प्रज्ञा को राहत पहुंचाई गई क्योंकि विपक्ष उनके बीजेपी और संघ के नेताओं से रिश्ते के कारण संघ को भी घसीट लेता था। पिछले साल से ही मीडिया के ज़रिये संकेत मिल रहे थे कि साध्वी प्रज्ञा को राहत मिल सकती है। सरकारी वकील अविनाश रसाल ने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि चार्जशीट दायर की जा रही है। मैं दुखी हूं और इस्तीफा दे सकता हूं। अब उन्होंने इस्तीफे से इंकार किया है और कहा है कि जिस तरह से जूनियर सरकारी वकील को आगे करके अदालत में चार्जशीट पेश की गई है उससे वो नाराज़ हैं।
अब बात यह सोचने वाली है कि एनआईए या सीबीआई जो हमेशा से ही सरकार के इशारों पर चलते रहे हैं वो किसी और सरकारी एजेंसी के एक ऐसे शहीद और महान कहे जाने वाले अधिकारी की जाँच पर सवाल कैसे उठा सकते हैं. यहाँ सवाल ही नहीं उठाए गए पूरी तरह से जाँच को खारिज कर दिया गया.
No comments:
Post a Comment