अगर आप को कभी पुलिस निराधार तरीके से गिरफ्तार करती है तो कोर्ट में दावा करने पर मुआवजा मिल सकता है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में रहने वाली एनआरआइ महिला और उसकी मां की फर्जी गिरफ्तारी पर मध्य प्रदेश पुलिस को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा है। पुलिस को तीन माह के भीतर पीड़ितों को मुआवजा देना होगा।
यह फैसला जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने सुनाया। उन्होंने कहा कि बिना वजह गिरफ्तारी कर दोनों महिलाओं की आजादी का हनन और अपमान हुआ। पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में सीआरपीसी की धारा 41 ए और 41 सी में दी प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया।कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस मामले में गिरफ्तार किया गया वह धोखाधड़ी से मेल नहीं खाता था। बिना वजह गिरफ्तारी से दोनों महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। लिहाजा उनका क्षतिपूर्ति का हक बनता है।
दरअसल 2012 में मध्य प्रदेश की की साइबर टीम ने डा. रिनी जौहर व उनकी मां गुलशन को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने कैमरा और लैपटाप खरीदने में करीब 11 हजार अमेरिका डॉलर की धोखाधड़ी की। कोर्ट में महिलाओं की ओर से वकील ने पक्ष रखते हुए आरोप खारिज किया। पुलिस पर अपमानित करने का आरोप लगाया। केस का ठोस आधार न पाने पर कोर्ट ने पांच लाख मुआवजे का हुक्म सुनाया।
यह फैसला जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने सुनाया। उन्होंने कहा कि बिना वजह गिरफ्तारी कर दोनों महिलाओं की आजादी का हनन और अपमान हुआ। पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में सीआरपीसी की धारा 41 ए और 41 सी में दी प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया।कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस मामले में गिरफ्तार किया गया वह धोखाधड़ी से मेल नहीं खाता था। बिना वजह गिरफ्तारी से दोनों महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। लिहाजा उनका क्षतिपूर्ति का हक बनता है।
दरअसल 2012 में मध्य प्रदेश की की साइबर टीम ने डा. रिनी जौहर व उनकी मां गुलशन को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने कैमरा और लैपटाप खरीदने में करीब 11 हजार अमेरिका डॉलर की धोखाधड़ी की। कोर्ट में महिलाओं की ओर से वकील ने पक्ष रखते हुए आरोप खारिज किया। पुलिस पर अपमानित करने का आरोप लगाया। केस का ठोस आधार न पाने पर कोर्ट ने पांच लाख मुआवजे का हुक्म सुनाया।
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