महाराष्ट्र सरकार पर शुरुआत से ही घोटालों के खूब आरोप लगते रहे हैं। वर्तमाने में सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है सरकार के मंत्री एकनाथ खडसे की। राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से के साथ आधा दर्जन मंत्रियों का दामन शुरुआती डेढ़ साल में लगे आरोपों से दाग़दार हो चुका है। राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से - माफिया सरगना दाऊद से बातचीत और भोसरी MIDC में ज़मीन पर कब्ज़े के आरोप के चलते विवादों में हैं।
इसके अलावा भी महाराष्ट्र में जो मंत्री घोटालों के आरोपी रहे हैं उनका ब्यौरा निमनवत है।
1- खाद्य एवम् आपूर्ती मंत्री गिरीश बापट पर दाल के दाम में बेवजह उछाल के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगा है।
2- शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े की इंजीनियरिंग की डिग्री की सत्यता पर सवाल उठे हैं।
3- महिला एवम् बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे चिक्की खरीदी में अनियमितता का आरोप झेल चुकी हैं।
4- जल आपूर्ती मंत्री बबनराव लोणिकर के चुनावी हलफनामे पर सवालिया निशान लगा है।
5- गृह राज्यमंत्री डॉ। रणजीत पाटिल जमीन खरिदी में अनियमितता का आरोप झेल रहे हैं।
विवादों की इस फेहरिस्त में से कुछ आरोपों को लेकर कोर्ट में मामले भी दाखिल हो चुके हैं। बावजूद अभी तक केवल एकनाथ खड़से के अलावा बाकी एक भी विवादित मंत्री पर कार्रवाई नहीं हुई।
महाराष्ट्र की राजनीति को जानने वाले लोग कहते हैं क़ि यह इस्तीफ़ा भाजपा के लिए काँटा साबित होने वाला है। भले ही भाजपा ने इसको भ्रष्टाचार विरोधी सरकार की छवि में पेश करने की कोशिश की हो लेकिन खाड़से इसमें खुद को शहीद पेश करके भाजपा का ही नुकसान करेगे। इससे नैतिकता के आधार पर नितिन गडकरी और आडवाणी जैसे नामों को लेकर अन्य आरोपी मंत्रियों पर दबाव बनाया जाएगा। हो सकता है क़ि इससे सरकार और पार्टी में जातीय विवाद और बढ़ जाए। इसमें ध्यान देने वाली बात होगी क़ि शिवसेना का क्या रुख़ रहेगा? शिवसेना भाजपा पर हमला भी कर सकती है। जिसका फायदा उसे बीएमसी में मिलेगा।
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