Friday, March 24, 2017
योगी जी के नाम खुला खत
Sunday, March 19, 2017
उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला
Tuesday, March 14, 2017
सपा की हार की समीक्षा
Sunday, March 12, 2017
इन नतीजों का संदेश कुछ अलग भी है.
Saturday, March 11, 2017
मायावती की हार के कारण
लोकतंत्र में जनादेश
Wednesday, March 8, 2017
एक दिन नहीं रोज महिला दिवस हो
आज वुमेंस डे है तो सोसल मीडिया पर महिला सशक्तिकरण की बहार सी आई हुई है, लेकिन ये सब बोलने वाले खुद ही महिला विरोधी हैं। जिन्हें हम सिर्फ "नाईट" की चीज़ समझते है उन्हें आज "डे" की शुभकामनाएं दे रहे हैं.
इस सो काॅल्ड महान देश में गालियां भी औरतों को दी जाती हैं, गलती कोई पुरुष करे और गाली उसकी मां या बहन को? ये कहां का न्याय है? हमारे घर में दो बच्चे होते हैं एक लडका और एक लडकी दोनों भगवान के यहाँ से बराबर आते हैं, कई बार बच्चियाँ ज्यादा होशियार होती हैं। लेकिन उनकी उम्र 15 साल होते होते आप रोड पर दोनों को देखो। लडकी डरेगी, आगे जाएगी, पीछे जाएगी और जब सिग्नल आएगा तब रोड क्राॅस करेगी। दूसरी ओर लडका मर्सडीज के आगे से हाथ हिलाकर कहेगा, "रुक बे रोड क्या तेरे बाप की है? " और निकल जाएगा। क्यों? आप सबको जवाब पता हैं।
मेरा बडा मन था कि मैं अपने नाम के आगे मां का नाम लगाऊँ, लेकिन ऑफिशियल छोडो फेसबुक पर तक नहीं लगा सका? शायद ये नाकामी मेरी अकेले की नहीं पूरे समाज की है। है न अजीब मैं 9 महीने पेट में एक औरत के रहा, पैदा उसने किया,(कहते हैं कि डिलीवरी के समय हुआ दर्द बीस हड्डियां टूटने के बराबर होता है)फिर दूध उसने ही पिलाया, लेकर मेरे टट्टी पेसाब से खाने पीने का हर ख्याल उसने रखा। और जब कोई पूछे किसके लडके हो तो कहता हूँ तो उस औरत का कहीं नाम ही नहीं आता है। उसमें भी अगर संविधान बाबा साहब अंबेडकर की जगह किसी और ने बनाया होता तो क्या हालत होती? लोग महिला रिजर्वेशन का विरोध करते हैं, ये न होता तो ट्रेन और बस में औरतों की क्या हालत होगी? मुझे तो लगता है कुछ सालों के लिए विधान सभाओं और लोकसभा में 100% महिला आरक्षण हो जाना चाहिए. उसमें भी पढ़ी लिखी, अनपढ़, हाउसवाईफ, मजदूर महिलाओं सभी को पार्लियामेंट भेजा जाए, तो कुछ राजनीति नफ़रत से हटकर ढंग की हो. हमारे देश की मानसिकता बडी अच्छी है, कल ही महिला विकास मंत्री जो खुद एक महिला हैं, कहा है कि लडकियों को छः बजे के बाद हास्टल से निकलने ही नहीं देना चाहिए, अभी बीएचयू सहित देश की बडी यूनिवर्सिटी में लड़कियों को वाईफाई इसलिए नहीं दे रहे कि कहीं वे पॉर्न न देख लें। यूपी में एक बाबा योखी आदित्यनाथ हैं जो कहते हैं कि हर लडकी एक जिंदा बम है, उसे घर में कैद करके रखो, नहीं तो वो बाहर आपकी और समाज की नाक कटाएगी। और उसका प्रचार करने पीएम जाते हैं। जहाँ इतनी गरीब मानसिकता के लोग हैं वहाँ एक नहीं रोज महिला दिवस होना चाहिए। हमारे यहां खुद इतने नमूने भरे हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प की कमी ही नहीं है। रही बात महिलाओं को देवी बनाकर पूजा करने की, तो ये फर्जी ड्रामे बंद करो। उसे अपने बराबर सम्मान ही दे दो, वही बहुत है। जो सोचते हैं कि घर में ये काम औरत का है, मर्द इसे करेगा तो पति परमेश्वर वाला सम्मान कम होगा। हर बोझ औरत पर लादने वाले आज बडे फेमिनिस्ट बन रहे हैं। ये ग्रीटिंग कार्ड और डिस्काउंट देने से अच्छा है अपनी मानसिकता बदलो और एक ऐसा समाज बनाओ जहां सभी जेंडर के लोग बराबर हों। अभी भी बहुत सी जगहें मैं देखता हूँ जहाँ लडकियों का रिप्रजेंटेशन बहुत कम है मैं चाहता हूँ जब जगह हमारी आधी आबादी को अधिकार मिले। अपराध विहीन समाज बनाएं।
और अंत में ये ट्रोल याद आ गए, जो भारत माता की जय बोलकर महिलाओं पर भद्दे भद्दे मजाक करते हैं, इनपर भी हंसने नहीं कंट्रोल करने की जरूरत है।
शुक्रिया, इंकलाब जिंदाबाद।
www.politicalkamlesh.blogspot.in
Saturday, March 4, 2017
समाजवाद की अंतिम पीढी
Thursday, March 2, 2017
अंत में पिछडती बीएसपी
राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट
*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...
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इस समय पाकिस्तान में बड़ा ही अच्छा एक सीरियल आ रहा है, " बागी........." जो पाकिस्तान के प्रोग्रेसिव तबके और भारत में भी बहुत प...