देश का राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष के खत्म होने के चार महीने पहले ही तय लक्ष्य को पार कर गया है. नवंबर महीने के अंत में यह लक्ष्य का 112 फीसदी हो गया है. महालेखा नियंत्रक द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार ऐसा अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी) संग्रह के कम रहने और खर्च के ज्यादा रहने के चलते हुआ है. ऐसे में वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य पूरा न हो पाने की आशंका है. जानकारों के अनुसार यदि ऐसा हुआ तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है.रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से नवंबर के बीच देश का राजकोषीय घाटा (सरकार के आय और खर्च का अंतर) 6.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह पूरे साल के तय लक्ष्य का केवल 86 फीसदी था. हालांकि वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार का लक्ष्य इसे जीडीपी के 3.5 फीसदी तक रखने का लक्ष्य था. महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार को अब तक कुल 8.04 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. यह 15.15 लाख करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य का केवल 53 फीसदी है. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में वार्षिक लक्ष्य का करीब 58 फीसदी राजस्व प्राप्त हुआ था. इससे पहले जारी हुए आंकड़ों के अनुसार नवंबर में जीएसटी संग्रह पिछले पांच महीनों में सबसे कम (80,808 करोड़ रुपये) रहा था. जानकारों के अनुसार ऐसा कई सारी वस्तुओं का कर स्लैब घटाने से हुआ. इसके एक महीने पहले अक्टूबर में 83,000 करोड़ रु का जीएसटी संग्रह हुआ था.
Sunday, December 31, 2017
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