Saturday, December 16, 2017

गुजरात एक्ज़िट पोल्स पर एक नज़र

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर कराए गए एग्ज़िट पोल में दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने की बात की गई है. एग्ज़िट पोल के अनुमान, गुरुवार को गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे दौर के मतदान के बाद जारी किए गए. दोनों राज्यों में मतगणना 18 दिसंबर को होनी है. गुजरात चुनाव को लेकर करीब दो हफ़्ते पहले जो ओपिनियन पोल जारी किया गया था, उसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान ज़ाहिर किया गया था. तो कुछ दिनों में ऐसा क्या बदला कि एग्ज़िट पोल में भारतीय जनता पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा हुआ दिखाया गया है? दरअसल "ओपिनियन पोल दूसरे चरण के चुनाव से पहले किया गया, जबकि एग्ज़िट पोल चुनाव के बाद. इस दौरान दो हफ़्तों में कई चीज़ें बदलीं. बीजेपी ने काफी आक्रामक चुनाव प्रचार किया. खासकर प्रधानमंत्री ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं, जिसके असर से वोटरों का मन बदल गया."
गुजरात और हिमाचल को लेकर आए एग्ज़िट पोल में भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया गया है. लेकिन ज़रूरी नहीं कि एग्ज़िट पोल का अनुमान हर बार सही साबित हो. बिहार और दिल्ली के पिछले विधानसभा के चुनावों के बाद आए एग्ज़िट पोल से वास्तविक नतीजे काफी अलग थे. बिहार में महागठबंधन ने बीजेपी को हराकर सरकार बनाई तो दिल्ली के नतीजों ने सबको चौंका दिया. जहां आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की. ऐसे कई मामलों में एग्ज़िट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं.  "ऐसा नहीं है कि बिहार में एग्ज़िट पोल के सारे नतीजे एकदम उलट थे. कुछ एग्ज़िट पोल ने बीजेपी की जीत दिखाई थी तो कुछ ने महागठबंधन की जीत का अनुमान भी जताया था. जीत हार का अंतर कितना था, इस पर चर्चा ज़रूर हो सकती है." "वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के वक्त एग्ज़िट पोल ट्रेंड दिखा रहे थे. हां ये ज़रूर है कि कोई ये नहीं कह रहा था कि आम आदमी पार्टी की इतनी बड़ी जीत होगी. ज़्यादा से ज़्यादा 50-52 या 38-40 सीट का अनुमान लगाया गया था." किसी भी पोल के लिए एक सैंपल बनाया जाता है. इस सैंपल में कुछ हज़ार लोग होते हैं. ये लोग राज्य के ही मतदाता होते हैं और इनकी संख्या उसी अनुपात में होती है, जितनी की राज्य में है. इसमें ग्रामीण, शहरी, अलग-अलग धर्म, जाति, लिंग और वर्ग के लोगों को उसी अनुपात में रखा जाता है जितने वो राज्य में हैं. इन सब लोगों से बात की जाती है और जानने की कोशिश की जाती है कि उन्होंने किस पार्टी को वोट दिया या देने वाले हैं? अगर इन सब बातों का ध्यान रखा जाए तो काफ़ी हद तक आपका अनुमान सही हो सकता है. लेकिन अगर सैंपल में अनुपात गलत हुआ तो उलटफेर होने की गुंजाइश रहती है. पश्चिमी देशों में एग्ज़िट या ओपिनियन पोल का अनुमान ज़्यादा सटीक होता है, लेकिन भारत में असल नतीजे इस तरह के पोल से अलग भी मिलते हैं. भारत में अभी सुधार की ज़रूरत है. लेकिन ये भी सच है कि जितनी विविधता भारत के मतदाताओं के बीच है, उतनी पश्चिमी देशों में नहीं है. वहां लोगों में धर्म, जाति की काफ़ी हद तक समानता है. यहां के मुकाबले वहां चुनाव लड़ने वाली पार्टियां कम होती हैं. यही वजह है कि वहां एग्ज़िट पोल के नतीजे सटीक होने की संभावना ज़्यादा है. भारत ही नहीं, कोई भी देश जहां विविधता और पार्टियां ज्यादा हैं, नतीजों में अंतर की गुंजाइश ज़्यादा रहती है. सारे एग्ज़िट पोल संकेत दे रहे हैं कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी को बढ़त है. ये बढ़त कितनी बड़ी होगी ये अलग बात है लेकिन ये ज़रूर तय है कि कांग्रेस 22 साल बाद भी गुजरात चुनाव जीतने में सफल नहीं होगी. अब इंतज़ार है 18 दिसंबर का जब दोनों विधानसभाओं के असल नतीजे आएंगे.

No comments:

Post a Comment

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...