फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी आने के बाद कंपोजिट स्कीम में आए व्यापारियों ने टैक्स चोरी अधिक की है. कंपोज़िशन स्कीम क्या है, इसे ठीक से समझना होगा। "छोटी कंपनियों के लिए रिटर्न भरना आसान हो इसलिए यह व्यवस्था बनाई गई है। उनकी प्रक्रिया भी सरल है और तीन महीने में एक बार भरना होता है." आज की तारीख़ में कंपोज़िशन स्कीम के तहत दर्ज छोटी कंपनियों की संख्या करीब 15 लाख है. जबकि सितंबर में इनकी संख्या 10 से 11 लाख थी। इनमें से भी मात्र 6 लाख कंपनियों ने ही जुलाई से सितंबर का जीएसटी रिटर्न भरा है. इन 6 लाख कंपनियों ने मात्र 250 करोड़ का टैक्स दिया है. इन कंपनियों का औसत टर्नओवर 2 लाख है। अगर आप पूरे साल का इनका डेटा देखें तो मात्र 8 लाख है। समस्या यह है कि जिन कंपनियों का या फर्म का सालाना 20 लाख से कम का टर्नओवर हो उन्हें जीएसटी रिटर्न भरने की ज़रूरत भी नहीं है। इसका मतलब है कि छोटी कंपनियां अपना टर्नओवर कम बता रही हैं। भारत की व्यवस्था आप जानते ही हैं कि दस लाख कंपनियों का आडिट करने में ज़माना गुज़र जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि बड़े पैमाने पर कर चोरी की छूट दी जा रही है। आखिर जीएसटी के आने से कर चोरी कहां बंद हुई है? क्या 20 लाख से कम के टर्नओवर पर रिटर्न नहीं भरने की छूट इसलिए दी गई ताकि कंपनियां इसका लाभ उठाकर चोरी कर सकें और उधर नेता जनता के बीच ढोल पीटते रहें कि हमने जीएसटी लाकर चोरी रोक दी है। जीएसटी फाइल करने को आसान बनाने के नाम पर राजनेता से लेकर जानकार तक यह सुझाव दे रहे हैं कि कंपोज़िशन स्कीम के तहत कंपोज़िशन स्कीम के तहत डेढ़ करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों को भी शामिल किया जाए। यह ज़रूर कुछ ऐसा खेल है जिसे हम आम पाठक नहीं समझते हैं मगर ध्यान से देखेंगे तो इस खेल को समझना इतना भी मुश्किल नहीं है। कंपोज़िशन स्कीम के तहत 20 लाख टर्नओवर की सीमा को बढ़ा कर डेढ़ करोड़ करने की कोई ज़रूरत नहीं है बल्कि टैक्स चोरी रोकने के लिए ज़रूरी है कि 20 लाख से भी कम कर दिया जाए। बिजनेस स्टैंडर्ड में श्रीमि चौधरी की रिपोर्ट पर ग़ौर कीजिए। CBDT ( central board of direct taxex) को दिसंबर की तिमाही का अग्रिम कर वसूली का के आंकड़ो को जुटाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। दिसंबर 15 तक करदाताओं को अग्रिम कर देना होता है। चोटी की 100 कंपनियों ने जो अग्रिम कर जमा किया है और जो टैक्स विभाग ने अनुमान लगाया था, उसमें काफी अंतर है। मिलान करने में देरी के कारण अभी तक यह आंकड़ा सामने नहीं आया है। नवंबर की जीएसटी वसूली काफी घटी है। वित्तीय घाटा बढ़ गया है। सरकार ने 50,000 करोड़ का कर्ज़ लिया है। ऐसे में अग्रिम कर (Advance Tax) वसूली का आंकड़ा भी कम आएगा तो विज्ञापनबाज़ी का मज़ा ख़राब हो जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि हर तिमाही में हमारे आंकलन और वास्तविक अग्रिम कर जमा में 5 से 7 फीसदी का अंतर आ ही जाता है मगर इस बार यह अंतर 15 और 20 फीसदी तक दिख रहा है।
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