Saturday, February 17, 2018

पीएनबी घोटाला

भारत के सबसे अच्छे दिनों के दावे के बीच सबसे बड़ा बैंकिंग स्कैम (पीएनबी स्कैम) हो गया है, जिसका घोटाले बाज नीरव मोदी नाम का हीरा व्यापारी बताया जा रहा है. ये वही पंजाब नेशनल बैंक है जो 2016 में 5 हज़ार करोड़ से भी अधिक का लॉस दिखा रही थी. ये घाटा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के इतिहास का सबसे बड़ा घाटा था. अब घोटाला भी बैंक ने ही पकड़ा है. पहले तो लोगों ने मोदी नाम से ही पीएम पर हमला बोलना शुरू कर दिया लेकिन वो सही नहीं था. उसकी हक़ीकत कुछ और ही है. असल में नीरव मोदी पिछली बार प्रधानमंत्री मोदी के साथ में डावोस में दिखाई दिया था. क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेसकांफ्रेस में कहा क़ि वो पीएम मोदी के साथ नहीं गया था बल्कि कंफिडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के लोग लेकर गए थे. रवीश कुमार ने प्राइमटाइम में बताया क़ि असल में वो आदमी 2016 में भी अरुण जेटली के साथ डावोस गया था जिसका एडवरटाइज़मेंट फाइनेंसियल एक्सप्रेस में छापा था, जिसमें नीरव मोदी सहित कई लोगों के नाम थे. और नीरव मोदी को 2016 में ही  48 करोड़ की पेनाल्टी देनी पड़ी थी क्योंकि दिसंबर 2014 में 1000 करोड़ का हीरा दिखा कर स्मगलिंग कर रहे थे. डायरेक्टरोट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, डीआरआई में दो साल केस चला, फिर 48 करोड़ का जुर्माना भरना पड़ा. सवाल यह है कि इतनी बड़ी चोरी के बाद क्या डीआरआई ने आगे की जांच की या सिर्फ इसी मामले तक खुद को सीमित रखा. स्मगलिंग का मामला चलता रहा फिर भी कैसे यह शख्स वित्त मंत्री के साथ 2016 में दावोस गया. सीबीआई जांच शुरू करने जा रही थी फिर यह नीरव मोदी प्रधानमंत्री मोदी के साथ फोटो फ्रेम में मौजूद है.
इसके बाद ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग ने उसके कई जगह छापे मारे जिसके बाद महान भारतीय मीडिया ने ने तुरंत खबर लिखना शुरू कर दिया कि 5000 करोड़ बरामद हो गए. इसी गेम को आपको समझना है. माल ज़ब्त हुआ है, कीमत तय होने में कई महीने से लेकर साल लग जाते हैं. आप किसी भी आयकर अधिकारी से पूछ सकते हैं. लेकिन यह भी पता चल रहा है कि छापे की टीम में जवाहरात के एक्सपर्ट भी हैं जो साथ का साथ दाम भी बता दे रहे हैं. जो भी है, छापा तो भारत की दुकानों पर पड़ा है लेकिन नीरव मोदी जिस होटल में है उसी के पास न्यूयार्क में उनका एक और स्टोर है, दुनिया के कई देशों में दुकान है, क्या वहां भी छापे पड़ रहे हैं. क्या आपको इसकी सूचना है. मीडिया ने लिख दिया कि पैसा बरामद हो गया. क्या वो कागज भी बरामद हुआ, क्या उन लोगों के नाम भी बरामद हो गए जिनके साथ मिलकर ये खेल खेला गया है. भारत के छह शहरों में 20 ठिकानों पर छापे पड़े हैं. आयकर विभाग ने नीरव मोदी की कंपनी के 21 खाते सील कर दिए हैं. नीरव मोदी का पासपोर्ट रद्द हो गया है. हंगामा हुआ तब रद्द हुआ. इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि 1 जनवरी को कैसे अपने परिवार के साथ फरार हुआ. क्या 1 जनवरी तक जांच एजेंसी को बिल्कुल पता नहीं था कि नीरव मोदी के यहां छापे मारने की तैयारी है. 31 जनवरी की एफआईआर के पेज नंबर आठ पर साफ साफ लिखा है और ये एफआईआर के ही शब्द हैं जिसमें कहा गया है कि हम आपसे आग्रह करते हैं कि ऊपर दिए गए नामों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया जाए ताकि वो देश छोड़ कर जा नहीं सके और कानून अपना काम नहीं कर पाए. तब 30 जनवरी को ही पासपोर्ट क्यों नहीं रद्द हुआ. इतने दिनों की छूट के बाद नीरव मोदी ने क्या-क्या हेराफेरी की, किस तरह से दस्तावेज गायब कर लिए होंगे यह सब अब कभी पता नहीं चलेगा.  एफआईआर में सात लोगों के नाम हैं. नीरव मोदी, अमी नीरव मोदी, निशाल मोदी, मेहुल चीनुभाई चौकसी, गोकुलनाथ शेट्टी, मनोज हनुमंत खराट, डेपुटी मैनेजर पीएनबी और अन्य अज्ञात लोग, बैंक अधिकारी, पीएनबी. आरोप है कि फर्जी तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी की गई जिसके पार्टनर नीरव मोदी, श्री निशाल मोदी, श्री अमी नीरव मोदी और श्री मेहुल चीनुभाई चौकसी हैं. 2011 से शुरू होने की बात कही जा रही है मगर एफआईआर में ही लिखा है कि 9.02.2017 को 44 लाख डॉलर और 43 लाख डॉलर से ज़्यादा की रकम की एलओयू जारी हुई. 10.2.2017 को 59 लाख डॉलर और 60 लाख डॉलर से ज़्यादा की रकम की एलओयू जारी हुई. 14.2.2017 को 58 लाख डॉलर से अधिक की रकम के दो एलओयू जारी हुए.
जब यह बता ही रहे हैं कि 2011 से शुरू हुआ तो यह भी बताना चाहिए कि 2017 तक चलता रहा बल्कि 16 जनवरी 2018 तक चलाने की कोशिश हुई मगर भांडा फूट गया। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि 2011 से 2017 के बीच डेढ़ सौ लेटर आफ अंडरटेकिंग जारी हुई है। यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि घोटाला किसके राज में शुरू हुआ, क्या यह महत्वपूर्ण नहीं है कि उस पैसे का हिस्सा किस किस के पास गया. इनके कौन कौन करीबी हैं. इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि 17 बैंक इस घोटाले की चपेट में हैं. 11,300 करोड़ के अलावा 3000 करोड़ का घोटाला हुआ है. रविशंकर प्रसाद मेहुल चौकसी को कहते हैं ...... " अरे वही आदमी जिसका क्या नाम है? हाँ, मेहुल चौकसी......"
जिसका नाम क़ानून मंत्री को ठीक से पता नहीं उसका नाम मोदी जी एक समारोह में बड़े दोस्ताना अंदाज में ले रहे हैं... कहते हैं," आदमी बड़े से बड़े मॉल से सोना खरीद कर लाएगा और अपने सोनार को ज़रूर दिखाएगा. यहाँ हमारे मेहुल भाई बैठे हैं." इतना दोस्ताना अंदाज प्रधानमंत्री किसी ऐरे गैरे के लिए तो नहीं बोल देगा? ये वही मेहुल भाई हैं जो नीरव मोदी के पार्टनर हैं. इन दोनों के खिलाफ मुंबई पुलिस कमिश्नर से लेकर बंगुलुरु पुलिस कमिश्नर से लेकर वित्त मंत्रालय की सभी एजेंसियों के पास कई बार शिकायत भेजी जा चुकी थी. यह शिकायत 2013 से की जा रही थी. फिर भी यह शख्स 2015 में प्रधानमंत्री के सरकारी कार्यक्रम में उन्हीं के सामने मौजूद है. पांच लोगों ने अगर जान जोखिम में डालकर इस मामले की शिकायत न की होती तो आज इस घोटाले का इतिहास आसानी से दबा दिया जाता. ये पांच लोग वो हैं जो हर एजेंसी को लिख रहे थे, धमकियां सुन रहे थे, जिंदगी दांव पर लगाकर शिकायत कर रहे थे. अगर तब सुन लिया गया होता तो पंजाब नेशनल बैंक को 11,300 करोड़ का नुकसान न उठाना पड़ता. शिखर जैन, वैभव खुरानिया. हरि प्रसाद, दिग्विजय सिंह जडेजा और संतोश श्रीवास्तव. इन लोगों ने खूब पत्र लिखे मगर हर जगह से निराशा हाथ लगी. बाद में खुद भी हताश होने लगे कि अब कुछ नहीं होगा. पंजाब नेशनल बैंक ने 16 जनवरी को नहीं पकड़ा होता तो यह पता ही नहीं चलता कि कुछ लोग गीतांजली कंपनी से इस्तीफा देकर इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं. इस मामले में पहला पत्र 4 मई 2015 को दिल्ली स्थित सिफ़ॉ यानी सीरीयस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन आर्गेनाइशेन को लिखा गया. 6 मई को मुंबई पुलिस कमिश्नर और सारे ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर को लिखा गया. इसकी कॉपी वित्त मंत्रालय, कॉरपोरेट मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और आर्थिक अपराध शाखा दिल्ली को भी भेजी गई. 26 जुलाई 2016 को पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत की कॉपी भेजी गई. पीएमओ ने तुरंत ही इस कॉपी को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को पत्र भेज दिया. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी कोरपोरेट मामले के मंत्रालय के तहत आता है. 29 जुलाई 2016 को इन लोगों ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को फिर पत्र लिखा. दो महीने बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी का जवाब आता है कि मामला बंद हो गया है. बिना किसी शिकायतकर्ता से बात किए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी ने मामले को कैसे बंद कर दिया. अगर ईमानदारी से जांच हुई होती तो पंजाब नेशनल बैंक को इतने बड़े घोटाले का सामना नहीं करना पड़ता.
अब बीजेपी की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है क़ि कांग्रेस के समय से ये घोटाला चालू हुआ और पकड़े भाजपा सरकार में जा रहे हैं. और मेहुल चौकसी की एक प्रदर्शनी में राहुल गाँधी एक बार घूमने गये थे. अभिषेक मनु सिंघवी की पत्नी ने उसकी दुकान से जेवर खरीदे थे इसलिए कांग्रेस ज़िम्मेदार है. घोटाला कब शुरू हुआ यह महत्वपूर्ण है तो यह भी महत्वपूर्ण होना चाहिए कि कब तक चलता रहा. आखिर फरवरी 2017 में आठ जाली लेटर ऑफ अंडरटेकिंग कैसे मिल गया नीरव मोदी को. प्रदर्शनी में राहुल का जाना महत्वपूर्ण है तो नीरव मोदी का प्रधानमंत्री मोदी के साथ तस्वीर खिंचाना भी महत्वपूर्ण होना चाहिए.
क्या यह बात सही नहीं है कि हर साल लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग को रिन्यू किया जाता है और यह चेयरमैन के स्तर से होता है, जिसे शाखा प्रमुख जारी करता है. 7 साल तक रिन्यू होता रहा मगर किसी की नज़र न पड़ी. ये बात पक्की है कि इतनी बड़ी राशि का लेटर ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग किसी चेयरमैन या इग्ज़ेक्यूटिव डायरेक्टर के ही स्तर पर होता है और इसे ब्रांच हेड ही जारी करता है. तो क्या इस मामले में कभी किसी चेयरमैन की जवाबदेही तय होगी. बैंकों का हर महीने ऑडिट होता है. तिमाही पर ऑडिट होता है और साल बीतने पर होता है. तब भी नहीं पकड़ आया. अब मेरे कुछ सवाल हैं, पहला सवाल क़ि जब एफआईआर में बैंक ने कहा है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाए ताकि वे देश छोड़ कर नहीं भागे. क्या लुकआउट नोटिस जारी हो चुकी है? दूसरा सवाल, फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी इस देश के बैंकिंग सिस्टम के साथ कैसे खेल रहे थे ? इस देश के सत्तर साल के सबसे बड़े बैंक के लूट के लिए जो मोदी सरकार के नाक के नीचे हुआ इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? तीसरा सवाल, प्रधानमंत्री जी को इसकी जानकारी 2016 को दे दी गई थी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया, इसके बावजूद भी है प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर फाइनेंस मिनिस्ट्री से लेकर फाइनेंसियल इंटैलिजेंस यूनिट से लेकर सभी ऑथरिटीज और मोदी सरकार सोई पड़ी थी और क्यों? चौथा सवाल, क़ि 29 जनवरी 2018 को पंजान नेशनल बैंक के ज्वाईंट जेएम ने पत्र लिखकर कहा कि देश छोड़कर भाग जाने वाले है इसके लिए कार्यवाई कीजिए, इसका बावजूद नीरव मोदी जी देश का पैसा लूटकर देश छोड़कर क्यों भाग गए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर वे विदेश में है तो विदेश में भी कार्रवाई हुई है. एफआईआर यहां हुई है तो वहां क्या कार्रावई हो रही है. क्या एफआईआर के बाद शो रूम का उदघाटन भी कार्रवाई है? उन्हें बताना चाहिए था कि क्या नीरव मोदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हुआ है? पंजाब नेशनल बैंक का शेयर 11 फीसदी गिर चुका है. इसके निवेशकों को 3000 करोड़ का नुकसान हो चुका है. यह सब वापस तो नहीं आएगा मगर बैंकिंग सेक्टर और हीरा व्यापार के इस कारनामे को आप तस्वीरों पर मत जाइये. किसकी तस्वीर किसके साथ है. कौन किसका किरायेदार है, ये सब हल्के सवाल हैं, सवाल एक ही है कि 11,300 करोड़ का घोटाला फ्रॉड कैसे हो गया? बैंकिंग सेक्टर पर नज़र रखिए, जिसकी हालत पहले से ख़राब है.

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