सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम यदि असुरक्षित इंटरनेट तन्त्र से जुड़ जाये तो गोपनीय सरकारी डाटा को हैक किया जा सकता है. इसलिए आईटी (IT) मंत्रालय के तहत मीयटी (MeitY) ने 2014 की नीतियों को जारी किया था, जिसके अनुसार सरकारी कम्प्यूटर का निजी कार्य और सोशल मीडिया हेतु इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. गृह मंत्रालय ने नवीनतम आदेश में सार्वजनिक स्थलों के वाईफाई के इस्तेमाल पर भी एहतियात बरतने को कहा है. क्लासीफाइड डाटा की सुरक्षा के लिए अनेक सावधानी बरतने के साथ, पेन ड्राईव के इस्तेमाल पर भी रोक की बात गृहमंत्रालय ने कही है. ऑफिस के समय और सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर तो 5 साल से प्रतिबन्ध है, जिसका धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है. तो अब गृह मंत्रालय के नये आदेशों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा? सरकारी तन्त्र में साइबर सुरक्षा का सवाल समाज और देश से जुड़ा हुआ है. देश में कम्प्यूटर और इंटरनेट क्रान्ति तो हो गई,लेकिन इसके इस्तेमाल पर जागरुकता अभी तक नहीं बन पाई है. स्मार्ट फोन का हर 6 महीने में नया मॉडल आ जाता है, लेकिन साइबर सुरक्षा के लिए अभी भी दो शताब्दी पुराने टेलीग्राफ एक्ट से काम चलाया जा रहा है. मेक-इन-इण्डिया को रक्षा क्षेत्र में लागू करने की कोशिश है, लेकिन इसे इंटरनेट कम्पनियों पर नहीं लागू किया जा रहा है. खुला बाजार होने के नाते भारत में विश्व के सबसे ज्यादा इंटरनेट ग्राहक हैं, फिर भी कम्पनियों द्वारा भारत में ऑफिस और सर्वर नहीं लगाये जा रहे हैं. इंटरनेट और डिजिटल क्षेत्र में मेक-इन-इण्डिया को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा, तभी देश वास्तविक अर्थां में पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकेगा.
Sunday, July 14, 2019
सोशल मीडिया पर सरकार की नई पहल
सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम यदि असुरक्षित इंटरनेट तन्त्र से जुड़ जाये तो गोपनीय सरकारी डाटा को हैक किया जा सकता है. इसलिए आईटी (IT) मंत्रालय के तहत मीयटी (MeitY) ने 2014 की नीतियों को जारी किया था, जिसके अनुसार सरकारी कम्प्यूटर का निजी कार्य और सोशल मीडिया हेतु इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. गृह मंत्रालय ने नवीनतम आदेश में सार्वजनिक स्थलों के वाईफाई के इस्तेमाल पर भी एहतियात बरतने को कहा है. क्लासीफाइड डाटा की सुरक्षा के लिए अनेक सावधानी बरतने के साथ, पेन ड्राईव के इस्तेमाल पर भी रोक की बात गृहमंत्रालय ने कही है. ऑफिस के समय और सरकारी कम्प्यूटर सिस्टम में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर तो 5 साल से प्रतिबन्ध है, जिसका धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है. तो अब गृह मंत्रालय के नये आदेशों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा? सरकारी तन्त्र में साइबर सुरक्षा का सवाल समाज और देश से जुड़ा हुआ है. देश में कम्प्यूटर और इंटरनेट क्रान्ति तो हो गई,लेकिन इसके इस्तेमाल पर जागरुकता अभी तक नहीं बन पाई है. स्मार्ट फोन का हर 6 महीने में नया मॉडल आ जाता है, लेकिन साइबर सुरक्षा के लिए अभी भी दो शताब्दी पुराने टेलीग्राफ एक्ट से काम चलाया जा रहा है. मेक-इन-इण्डिया को रक्षा क्षेत्र में लागू करने की कोशिश है, लेकिन इसे इंटरनेट कम्पनियों पर नहीं लागू किया जा रहा है. खुला बाजार होने के नाते भारत में विश्व के सबसे ज्यादा इंटरनेट ग्राहक हैं, फिर भी कम्पनियों द्वारा भारत में ऑफिस और सर्वर नहीं लगाये जा रहे हैं. इंटरनेट और डिजिटल क्षेत्र में मेक-इन-इण्डिया को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा, तभी देश वास्तविक अर्थां में पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकेगा.
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