एक होता है एवोल्यूशन माने क्रमिक विकास, दूसरा होता है रेवोल्यूशन माने क्रांति। धोनी का आगाज भारतीय क्रिकेट में उसी रेवोल्यूशन सरीखा रहा है, अर्थात बन्दें ने जब 22 गज लंबाई और 10 फ़ीट चौड़ाई वाली पिच पर 38 इंच लंबाई और 4.25 चौड़ाई वाले बल्ला के साथ आगाज़ किया तब मानों भारतीय क्रिकेट युग में क्रांति की बिगुल बज गया।
उसके बाद वो फिटनेस, खेल-भावना, संयम, और जीत की क्रांति जैसा था, जिसे धोनी ने संभव कर दिखाया।
वो 'लगभग' और 'असंभव' भारतीय क्रिकेट के शब्दकोश से विलुप्त होनें की क्रांति थी, जिसे अपना माही ने पूरा कर दिखाया।
मैच जीतने की जिस परंपरा को गांगुली ने शुरू किया उसे इस कैप्टन कूल ने उसी रेवोल्यूशनरी तरीकें से भारतीय क्रिकेट और भारतीय क्रिकेट-प्रेमियों को आदत बना दिया, और यही धोनी का अपना कल्ट है, जो तमाम लीजेंड्स में उन्हें खास बनाता है।
और ये सब लिखते हुए याद आ रहा है कि अप्रैल के महीने में हमारा मॉर्निंग स्कूल हुआ करता था। उसी महीनें 5 अप्रैल 2005 को स्कूल से छुट्टी होने के बाद अपने स्कूल के एक मित्र के घर भारत पाकिस्तान का वो मैच देखनें पहुँच गया, जिसके बाद पहली बार पूरा भारत धोनी नाम से परिचित हुआ था और दीवाना भी और उसमें मैं भी एक था।
कहतें है हर मूल चीजों का अपना दर्शन होता है, अगर उनको प्रदर्शित करनें वाले खुद भी अजूबे हो फिर क्या कहना। वही हुआ था उस मैच में। टोटल 26 रन पर सचिन पाजी आउट हुए थे और उसके बात सौरभ गाँगुली सबको अचंभित करतें हुए धोनी को तीसरे क्रम पर भेजा जो कि उस समय मैच देखनें वाले सभी दर्शकों के लिए अजीब था, क्योंकि एक सिरीज़ पहलें धोनी अपनें प्रदार्पण मैच में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ औसत रहें थे किंतु आज के इस फैसले के लिए गाँगुली को धोनी अपने कारनामें से हंड्रेड अप टू हंड्रेड मार्क दिलवानें थे, और ये धोनी ने बड़ें बेहरमी से पाकिस्तानी बॉलर्स को कूटते हुए दिलाया भी।
कुल 148 रन मात्र 123 गेंद में (4 छक्के और 15 चौके), और जबकि ये उनका मात्र पांचवा एक दिवसीय मैच था, मतलब धोनी ने अपनें खेल की ठसक बल्ले की मार से सबको समझाया। ये भी मालूम हो गया कि उस मैच में पारी समाप्ति के बाद नीली जर्सी और लंबे बालों में बल्ला को हवा में उछालते हुए पवेलियन लौटने वाला हमारा धोनी बाद के भारतीय क्रिकेट के साथ विश्व क्रिकेट के अदम्य आकर्षण का केंद्र बनने वाला है।
उसके बाद कई यादगार पारी उनके बल्ले से देखनें को मिला, जिसमें मेरा धोनी का सबसे पसंदीदा पारी श्रीलंका के खिलाफ उसी कैलेंडर वर्ष में बनाये 183 रन है। उन्हें जल्द ही कप्तानी मिल गई, नये कार्यभार से जितनें धोनी उत्सुक रहें होंगें उससे कही ज्यादा भारतीय मानस थे, लेकिन धोनी ने बिल्कुल उदास नही किया। 2007 के वर्ल्डकप में लीग स्टेज मैच में हारकर जिस तरह से टीम इंडिया बाहर हुई थी और उसके लिए धोनी को सबसे ज्यादा टारगेट भी किया गया था, उस कसक से पहली 20-20टी विश्वकप जीत कर स्वयं के साथ समूचा भारत को उबार लिया।
फिर वहां से अबतक धोनी को अपनें आत्मत्याग, नेतृत्व करनें की कौशलता, विफलताओं के लिए खुद आगे आकर उत्तरदायित्व लेना, टीम भावना के प्रवर्तक, और टीम हित के लिए हर जरूरी फैसले के सजग प्रहरी के रूप में देखा, जो अपनें आप में अद्भुत, अकल्पनीय और बेजोड़ है, और यही धोनी का कल्ट है। (ये 'कल्ट' दुबारा इसीलिए लिख रहा हूँ क्योंकि धोनी की औरा इससे भी बड़ा है।)
मेरा मानना है, विवाद, सफलता के कहानी के संग संग दौड़ लगाती है, जिसमें कुछ विरले होते है जो इस रेस में विवादों को अपनें कारनामें से पिछ छोड़ जाते है, और धोनी यह रेस भी जीत चुका है, पूरी तन्मयता से, नायकत्व से, शालीनता से, विशिष्टता से! आज आलोचना बेशक धोनी के आसपास फटक रहें होंगे लेकिन उस आलोचना में एक सम्मान है जिसको धोनी ने बहुत कुछ खो कर पाया है। तमाम आलोचना के बाद भी इस उम्र में दो विकेट के बीच जितनें तेज धोनी दौड़ते है, क्रिकेट को समझने वाले शायद ही धोनी को उतना गति से समझ पाये है, क्योंकि धोनी वो है जो बिना तामझाम के टेस्ट कप्तानी छोड़ा है, वनडे- टी-20 कप्तानी छोड़कर विराट के नेतृत्व में बतौर विकेट कीपर सह बैट्समैन खेलना स्वीकार किया है वो भी बैटिंग आर्डर नंबर बदलें बिना। ऐसे कई अचरज भरें फैसले 'ऑन द मैच' एंड 'ऑफ द फील्ड' लिए और सही साबित किया, जो सिर्फ और सिर्फ धोनी कर सकतें है।
इसीलिए आज भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के मानस पटल पर 'धोनी' सबसें चमकदार सितारा है, जो बेशक उम्रदराज है, बल्ले से थोड़ा बहुत निराश भी कर रहे हैं।
उन्होंने अपने लिए एक स्टैंडर्ड सेट किया है जिससे नीचे का खेल नहीं अच्छा लगता है। उन्होंने हर काम समय पर किया उससे पहले कि किसी की अंगुली उठे चाहे टेस्ट क्रिकेट छोडना हो या कप्तानी छोडना। अब समय आ गया है कि वो अपने अच्छे समय में ही खुद से फैसला लेकर युवाओं को मौका दें।
Sunday, July 7, 2019
भारतीय क्रिकेट को बदलने वाला खिलाडी
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