देश के राजनीतिक गलियारों में बहुत दिन से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या प्रियंका गाँधी वाड्रा राजनीति में आएंगी। बहुत बार कांग्रेस के कुछ नेताओं और मीडिया ने कुछ अटकलें लगाईं कि प्रियंका गाँधी को पूरे देश में प्रचार करना चाहिए। लेकिन फिर कांग्रेस पार्टी ने ही इस मुद्दे को दबाकर कह दिया कि प्रियंका सक्रिय राजनीति में नहीं आ रही हैं. इस बार 2014 के चुनाव में पहले तो वो किसी रोल में नही दिखीं। लेकिन पिछले एक हफ्ते से प्रियंका वाड्रा ने लोक सभा चुनाव में अमेठी और रायबरेली के प्रचार का ज़िम्मा संभाल लिया है। मीडिया की सुर्खियों में सोनिया
गांधी-राहुल गांधी पीछे चले गए हैं। जबकि प्रियंका नरेंद्र मोदी से दो-दो
हाथ करती दिख रही हैं। मोदी पर प्रियंका के
हमलों में राहुल की तुलना में ज़्यादा पैनापन है और उनके हमले नरेंद्र मोदी
और बीजेपी को ज़्यादा चुभ रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने प्रियंका के हमलों
का अपने अंदाज़ में जवाब दिया है। तो वहीं बीजेपी ने उनके पति रॉबर्ट
वाड्रा के कथित ज़मीन घोटालों को लेकर पहली बार औपचारिक रूप से प्रेस
कांफ्रेंस कर हमला किया है। अभी तक कांग्रेस और बीजेपी में एक तरह का अघोषित
समझौता रहा है जिसमें नेताओं के व्यक्तिगत मामलों और परिवार के सदस्यों पर व्यक्तिगत टिप्पड़ियां नहीं की जाती है। सबसे पहले जब रॉबर्ट वाड्रा के ज़मीन सौदों और
उन्हें DLF से मिले फायदे के बारे में खबरें आईं तो इन्हें संसद में
उठाने को लेकर बीजेपी में एक राय नहीं बन सकी। पार्टी के बड़े नेताओं में
इसे लेकर मतभेद थे। ये दलील दी गई कि कांग्रेस वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन
भट्टाचार्य का मुद्दा उठा सकती है। एक बड़े नेता जो इस मामले को संसद में
उठाना चाहते थे. तब उन्हें रोका गया था. इसके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी
किसी भाजपा नेता के व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणी नहीं की। इस समय वाड्रा
मुद्दे को भाजपा ने तो आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल की नकल करके
उठाया है. अगर ऐसा नहीं है तो इसके पहले भाजपा ने इसपर कुछ नही बोला।
राजस्थान में भाजपा की सरकार बने 4-5 महीने हो गए लेकिन आजतक कोई कार्यवाही
क्यों नही की गई है। लेकिन अब ये चुप्पी टूट गई है। इसके पीछे बड़ी वजह
कांग्रेसी नेताओं द्वारा नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत मामलों को चुनाव में
उछालना हो सकता है। खुद राहुल गांधी ने मोदी की वैवाहिक स्थिति का सवाल
चुनाव में उठाया है। कानून मंत्री कपिल सिब्बल इसे लेकर चुनाव आयोग भी
पहुंच गए। राहुल और प्रियंका बार-बार अपनी चुनावी सभाओं में कथित महिला
जासूसी कांड को उठा कर महिला सुरक्षा के बारे में मोदी के दावों पर सवाल
उठाते हैं। इसके जवाब में चुनाव प्रचार में
नरेंद्र मोदी लगातार ‘जीजाजी’ की बात कह कर वाड्रा पर निशाना साधते रहे
हैं। बीजेपी का कहना है कि ये व्यक्तिगत हमले नहीं हैं बल्कि भ्रष्टाचार के
मुद्दे हैं। इसीलिए
प्रियंका वाड्रा का पलटवार बेहद दिलचस्पी से देखा जा रहा है।प्रियंका ने हर मुद्दे पर मोदी को बखूबी जवाब दिया है। उन्होंने हर जवाब में इमोशनल होकर बात की। प्रियंका ने वाड्रा मुद्दे पर जवाब में केवल यह कहकर टाल दिया कि भाजपा के नेता मेरे पति और परिवार की बेइज्जती करते हैं। इस समय मीडिया में प्रियंका के सामने राहुल और सोनिया कहीं नहीं ठहर रहे हैं. इस बात से निश्चित रूप से राहुल गाँधी को घाटा हो रहा है। यह बात सोनिया गाँधी भी जानती हैं, तभी तो उन्होने प्रियंका को राजनीति में सक्रिय होने से हमेशा रोककर रखा है। कांग्रेस के बड़े नेताओं और आम कार्यकर्ताओं का एक बड़ा तबका है जो राहुल से बेहतर प्रियंका को मानता रहा है। लेकिन प्रियंका या उनके परिवार ने हमेशा ही इस बात का खण्डन किया है। हालांकि इसके पहले प्रियंका कई बार राहुल और सोनिया के लोकसभा क्षेत्र में जाकर चुनाव प्रचार का जिम्मा खुद लेती रही हैं।
हमने सुना है कि जब बेल्लारी में सोनिया सुषमा स्वराज से पिछड़ी चल रही
थी, तब प्रियंका ने मात्र एक रोड शो करके वह लड़ाई सोनिया के पक्ष में कर
दी थी। कुछ लोग प्रियंका गाधी में इंदिरा गाँधी जैसी करिश्माई छवि देखते हैं। हालांकि मैने इंदिरा गाँधी के ज्यादा भाषण तो नहीं सुने लेकिन प्रियंका के भाषण राहुल और सोनिया की तुलना में ज्यादा अच्छे लगते हैं. कुछ बड़े पत्रकारों का तो यहाँ तक मानना है कि अगर प्रियंका राजनीति में आ गईं, तो राहुल का राजनीतिक भविष्य मुस्किल में पड सकता है। हो सकता है कि सोनिया गाँधी इसी अंदेशे से प्रियंका को राजनीति में लाने से रोकती रही हैं। सही बात तो यह है कि राहुल को हाल ही कि कुछ घटनाओं से बहूत नुकसान हुआ है। इस चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस का ही तथाकथित तबका राहुल की जगह प्रियंका को कमान सौंपने की वकालत कर सकता है. यह तो उनके परिवार के अंदर का मसला है। लेकिन इस जवाबी बयानबाजी में राजनीतिक मजा जरूर आ रहा है। हमें आने वाले दिनों मे और इन्तेजार करना चाहिए, क्योंकि यह जुबानी युध्द अभी रुकने वाला नहीं है। प्रियंका के साथ भाई और माँ का भी साथ है।
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