Tuesday, April 8, 2014

कौन है असली हिन्दू?

कल साम को मेरे दोस्त के पास उसके दोस्त का फोन आया, उसने कहा कि वो मुझसे भी बात करना चाहता है। मैने बात की, तो बोला सुना है आप मोदी के विरोधी हैं। (मेरे दोस्त ने उसको यह बता रखा था कि कमलेश मोदी का विरोध करता है। ) मैंने कहा हाँ लेकिन मोदी का नहीं मोदी की नीतियों का विरोधी हूँ। बोला आप हिन्दू हैं? मैने कहा हाँ। वो बोला आप राम की पूजा करते हैं? मैने कहा हाँ। वो बोला आप पाकिस्तान से नफरत करते हैं? मैने कहा नहीं। बोला बस आपसे बात नहीं करनी है, आप असली हिन्दू नहीं हैं। फोन काट दिया। ऐसा ही दो-तीन महीने पहले हुआ था, जब गाँव के मेरे एक ब्राम्हण मित्र ने कह दिया था कि जो भाजपा के साथ नहीं हैं, वो हिन्दू नहीं हैं। मैने बहुत करारा जवाब दिया था, असल में वो शराब और मांस खाते-पीते थे, बस मैने उन्हें घेरा और दो-तीन लोगों के सामने माफी तक मंगवा ली थी। तब से मैने सिर मुँडवा कर अपनी एक बड़ी सी चोटी भी रखी हुई है। बचपन से मांस खाता था, लेकिन 2011 में छोड़ दिया था। असल में जिसने मांस कभी नहीं खाया होगा, उसे तो कोई दिक़्कत नहीं है। लेकिन जो खाता रहा है और उसका स्वाद जानता है, उसके लिए बहुत कठिन कार्य है। फिर इतिहास तो हर संत का होता है, वाल्मीकि का भी था। और नसे के नाम पर तो जिंदगी में कोई चीज नहीं छुई होगी। रामायण, रामचरित मानस, भगवत गीता, एक-दो पुराणों के कुछ हिस्से, उपनिषदों के कुछ भागों का अध्ययन भी किया है। हर मंगलवार को तेल नहीं लगता हूँ, और मंदिर भी जाता हूँ। फिर भी मुझपर टैग लग गया कि मैं हिन्दू नहीं हूँ
किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन ना करने से ही लोग किसी को गैर-हिन्दू और पाकिस्तानी घोषित कर दे रहे हैं। आज व्हाट्स एप पर मोदी के पक्ष और विरोधियों के विपक्ष में इतनी शर्मनाक बातें चलाई जा रही हैं, कि आपको लिखकर बता नहीं सकता। बहुत गन्दे और अस्लील वीडियो और फोटो बनाकर भेजे जा रहे हैं। पूरा का पूरा प्रचार हार्ड हिन्दुत्व और साम्प्रदायिकता पर चल रहा है। मोदी और उनके बड़े नेता या बीजेपी का ओफ़िसियल पेज भले ही फ़ेसबुक और ट्विटर साम्प्रदायिकता ना फैलाए, लेकिन उनकी टीम और समर्थक पूरी तरह से नफरत की राजनीति करना चाहते हैं। पूरा का पूरा प्रचार पाकिस्तान के खिलाफ किया जा रहा है। मतलब जो मोदी के पक्ष में वो हिन्दू और हिन्दुस्तानी, जो विरोधी वो पाकिस्तानी और मुस्लिम? भाजपा समर्थक व्हाट्स एप पर लगातार मुजफ़्फ़र नगर दंगों को भुना रहे हैं। कहते हैं यह हमारा जवाब था लव जिहाद को (यह बात तो अशोक सिंहल भी कह चुके हैं, जिनकी खुद की बेटी ने मुस्लिम से शादी की है।) हर जगह यह स्वीकार हो रहा है कि अमित शाह ने यह काम किया था। असल में यूपी के जिन दो साल के 150 दंगों की बात की जा रही है। उनमें बरेली और लखनउ का दंगा छोड़ कर हर जगह अमित शाह ने इनडायरेक्ट रूप से भूमिका अदा की है। जब से अमित शाह यूपी प्रभारी बने हैं, तब से बजरंग दल और संघ का कैडर इस तरह की हरकतों के लिए तैयार हो गया था। हर जगह मुस्लिमों को हिंदुस्तान विरोधी बताया गया। यूपी जैसे बड़े राज्य में होने वाले अपराधों में भी अगर एक पक्ष हिन्दू-मुस्लिम है तो उसे भी साम्प्रदायिकता का रंग दिया गया है.इस तरह से मैं यूपी का युवा होने के नाते यह कह सकता हूँ क़ि अगर मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो 2014 के अंत तक यूपी में फिर से कोई बड़ा दंगा हो सकता है। जो देश के लिए बहुत घातक होगा. वैसे यह बात किसी बड़े नेता ने भी कही थी कि अगर देश का अल्पसंख्यक, सम्प्र्यादयिक होता है, जो कुछ हद तक लोगों के बहकावे में आ जाते हैं तो वह अपना ही नुकसान करेगा। लेकिन जिस दिन इस देश का बहुसंख्यक जो सेकुलर है, सम्प्रदायिक हो गया तो देश के लिए बहुत घटक होगा
देश का दुर्भाग्य ही है कि आज एक व्यक्ति विशेष का समर्थक और विरोधी होने पर हिन्दू और हिन्दुस्तानी होने का सर्टिफिकेट मिल रहा है
। देखना है यह मार्केटिंग कब तक छ्लेगी. क्योंकि सवाल है कि अगर देश को नफरत की राजनीति पसंद है तो क्यों नोट(जिसके सब मारामार मची है।) के गाँधी की तस्वीर है, उन्हें मारने वाले हिन्दुत्ववादी गोडसे की नहीं

No comments:

Post a Comment

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...