Friday, October 30, 2015

बुद्धिजीवियों के निशाने पर क्यों मोदी?

पिछले कुछ दिनों से लगातार यह चर्चा चल रही है कि देश का माहौल खराब हो रहा है. लेखकों, साहित्याकारों, इतिहासकारों से लेकर वैज्ञानिक तक इस तरह की चिंता जता रहे हैं. लेकिन आखिर क्यों ऐसी चर्चाएं चल रही हैं. बिहार चुनाव में पिछले कुछ दिनों में जिस तरह धर्म के आधार पर आरक्षण और पाकिस्तान में पटाखे जैसे बयान दिए गये. क्या यह भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. बिहार की रैली में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दलितों का आरक्षण छीनने वाला बयान, उसके कुछ दिन बाद एक और रैली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का पाकिस्तान में पटाखे वाला बयान. इन दोनो ही बयानों में एक समानता है. इनमें एक धर्म विशेष को निशाना बनाया जा रहा है. इसीलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या चुनाव के आखिरी दौर में बीजेपी विकास को छोड़ हिंदू-मुस्लिम का कार्ड खेल रही है. अमित शाह के पाकिस्तान वाले बयान की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी. लेकिन अमित शाह यह मानने को तैयार नहीं कि उन्होने कुछ गलत कहा. एक इंटरव्यू में इस बारे में पूछे गये सवाल पर अमित शाह ने कहा कि जो मैने कहा उसका मतलब था कि अगर मोदी और बीजेपी कमजोर होते हैं तो देशद्रोही ताकतें खुश होती हैं. इसमें सांप्रदायिक क्या है? इस पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का कहना है कि उसने सारे बिहारियों को पाकिस्तानी करार दिया है. धर्म के आधार पर आरक्षण देने की साजिश वाले नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे है. भारत के संविधान में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था है यानी धर्म के आधार पर आरक्षण दिया ही नहीं जा सकता. तो फिर मोदी ऐसे बयान क्यों दे रहे हैं ? बीफ विवाद और दादरी की घटना के बाद से देश के बिगड़ते माहौल पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि विविधता और सहनशीलता भारतीय संस्कृति की ताकत है. इन्हें खोने नहीं देना नहीं चाहिए. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर देश में ऐसा माहौल कौन बना रहा है.

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