Thursday, April 25, 2019

अब तीसरी पीढ़ी की बारी

हरियाणा में सियासी बिसात में इस आम चुनावों में एक खास बात देखने में आ रही है. जिन सीटों पर कभी दादा आपस में टकराए, फिर पिताओं ने ताकत की आजमाइश की, उसी सियासी शतरंज पर अब तीसरी पीढ़ी चुनाव के मोहरे सजाकर बैठ गई है. तीसरी पीढ़ी की चुनावी अदावत में हरियाणा देश में सबसे आगे है. मूल तौर पर देश के इस सूबे की सियासत का स्टीयरिंग तीन परिवारों के पास रहता आया है. अब भी वही तीन परिवार हरियाणा की राजनीति में हावी हैं.
हरियाणा में तीन ताकतवर सियासी परिवार तीन लालों के नाम से जाने जाते हैं. यानी भजनलाल, बंसीलाल और देवीलाल. इन तीनों परिवारों की धमक 60-70 के दशक से शुरू हुई जो अब तक जारी है. हालांकि एक परिवार अब और इस टक्कर में शामिल हो चुका है, जो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का परिवार है. इन तीनों परिवारों से जो युवा लोकसभा चुनावों में भाग्य आजमा रहे हैं उसमें श्रुति चौधरी, भव्य विश्नोई और दुष्यंत चौटाला हैं. हिसार ऐसी सीट है जहां दो लालों की मौजूदा पीढी के युवा टकराने जा रहे हैं.
बंसीलाल के परिवार की तीसरी पीढ़ी से अबकी उनकी पोती श्रुति चौधरी पारिवारिक सीट भिवानी से खड़ी हैं. आपातकाल के दिनों में चर्चित हुए बंसीलाल को यहां के पुराने लोग अब भी याद करते हैं. हालांकि ये शहर के बजाय एक छोटा कस्बा ज्यादा लगता है. लेकिन ये वो इलाका है, जहां से लगातार बंसीलाल के परिवार के लोग चुनाव जीतकर मंत्री बनते रहे हैं. पिछले चुनाव में परिवार को जरूर झटका लगा था, जब श्रुति चौधरी भाजपा के धर्मवीर से चुनाव हार गईं थीं. इससे पहले श्रुति के पिता सुरेंद्र सिंह यहां से चुनाव लड़ चुके हैं. वो प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं. बंसीलाल की बहू किरण चौधरी हरियाणा की पिछली कांग्रेस सरकार में चर्चित मंत्री रही हैं. श्रुति की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में हुई. उन्होंने आरके पुरम के दिल्ली पब्लिक स्कूल के बाद ऑक्सफोर्ड में पढाई की. वो पेशे वकील हैं. खूबसूरत श्रुति को पॉलिटिक्स विरासत में मिली है.
सही बात ये है कि हरियाणा की राजनीति चौटाला परिवार के बगैर हमेशा अधूरी कही जाएगी. इसकी शुरुआत देवीलाल से होती है. वो कद्दावर नेता थे. वो हरियाणा में मुख्यमंत्री रहे और फिर प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में उप प्रधानमंत्री बने. देवीलाल की राजनीतिक विरासत ओमप्रकाश चौटाला ने संभाली. वो भी हरियाणा में मुख्यमंत्री रहे.
हकीकत में चौटाला परिवार की ये तीसरी नहीं बल्कि चौथी पीढ़ी चुनाव मैदान में होगी. तीसरी पीढ़ी की अगुआई अजय और अभय चौटाला ने की. उन्होंने पारिवारिक पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल का मोर्चा संभाला. लेकिन चौथी पीढ़ी तक आने के बाद पारिवारिक कलह का असर ये हुआ है कि ये पार्टी बंट गई है. इसमें एक ओर पूर्व सांसद अजय चौटाला के युवा बेटे दुष्यंत चौटाला हैं, जिन्होंने जननायक जनता पार्टी बना ली है. इसी पार्टी से वो हिसार से चुनावी दंगल में कूदे हैं. दुष्यंत वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. लंबे समय तक वो टीवी पर इनेलो का चेहरा हुआ करते थे. उन्होंने कैलिफोर्निया से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढाई की है. हालांकि दुष्यंत के चाचा अभय और दादा ओमप्रकाश चौटाला इनेलो का झंडा बुलंद कर रहे हैं.
हरियाणा के भजनलाल ऐसे लाल हैं, जो 1979 में जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने के बाद अगले ही साल अपनी पूरी पार्टी को दलबदल कराते हुए कांग्रेस में ले गए. उन्हें राजनीति का चाणक्य और दलबदल के ‘इंजीनियर’ के नाम से भी जाना जाता था. हालांकि कांग्रेस ने उन्हें 2008 में निलंबित भी किया. भजनलाल ने नई पार्टी भी बनाई, लेकिन अब फिर वो कांग्रेस में हैं.
उनके पोते भव्य विश्नोई को कांग्रेस ने हिसार से उतारा है. वो आक्सफोर्ड से पढ़कर लौटे हैं. वो अच्छे क्रिकेटर रह चुके हैं. आक्सफोर्ड की क्रिकेट टीम से वो एक मैच भी खेल चुके हैं. वो स्मार्ट हैं. अच्छा भाषण देते हैं और जनसंपर्क की कला में माहिर हैं. भव्य के पिता कुलदीप विश्नोई भी चुनाव जीत चुके हैं. जबकि भजनलाल के एक और चर्चित बेटे चंद्रमोहन करनाल से चुनाव लड़ सकते हैं. करनाल की सीट भजनलाल परिवार की पारंपरिक सीट कही जाती रही है.
सोनीपत से कांग्रेस के उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं. वो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. उनकी तीसरी पीढ़ी भी सियासत में है. भूपेंद्र के पिता रणबीर सिंह आजादी के बाद भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे. इस परिवार की तीसरी पीढ़ी को रिप्रजेंट करते हैं दीपेंद्र सिंह हुड्डा, जो रोहतक से सांसद रहे हैं. कांग्रेस ने फिर उन्हें रोहतक से ही टिकट दिया है.

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