महाराष्ट्र
के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के
सामने 29 सितंबर 2008 की रात 9.35 बजे बम धमाका हुआ था जिसमें छह लोग मारे
गए और 101 लोग घायल हुए थे.
इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी. एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी. महाराष्ट्र
एटीएस ने हेमंत करकरे के नेतृत्व में इसकी जांच की और इस नतीजे पर पहुँची
कि उस मोटरसाइकिल के तार गुजरात के सूरत और अंत में प्रज्ञा ठाकुर से जुड़े
थे. प्रज्ञा
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य रह चुकी थीं. पुलिस ने पुणे,
नासिक, भोपाल इंदौर में जांच की. सेना के एक अधिकारी कर्नल प्रसाद पुरोहित
और सेवानिवृत मेजर रमेश उपाध्याय को भी गिरफ़्तार किया गया.
इसमें हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत का नाम सामने आया और साथ ही सुधाकर द्विवेदी उर्फ़ दयानंद पांडेय का नाम भी आया. एटीएस चार्जशीट के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा सबूत मोटरसाइकिल उनके नाम पर होना था. इसके
बाद प्रज्ञा को गिरफ़्तार किया गया. उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध
नियंत्रण क़ानून (मकोका) लगाया गया. चार्जशीट के मुताबिक जांचकर्ताओं को
मेजर रमेश उपाध्याय और लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित के बीच एक बातचीत पकड़
में आई जिसमें मालेगांव धमाके मामले में प्रज्ञा ठाकुर के किरदार का ज़िक्र
था. मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते ने की
थी, जिसे बाद में एनआईए को सौंप दी गई थी. एनआईए की चार्जशीट में उनका नाम
भी डाला गया.
मालेगांव ब्लास्ट की जांच में सबसे पहले 2009 और 2011
में महाराष्ट्र एटीएस ने स्पेशल मकोका कोर्ट में दाखिल अपनी चार्जशीट में
14 अभियुक्तों के नाम दर्ज किये थे. एनआईए ने जब मई 2016 में अपनी अंतिम
रिपोर्ट दी तो उसमें 10 अभियुक्तों के नाम थे. इस चार्जशीट में
प्रज्ञा सिंह को दोषमुक्त बताया गया. साध्वी प्रज्ञा पर लगा मकोका (MCOCA)
हटा लिया गया और कहा गया कि प्रज्ञा ठाकुर पर करकरे की जांच असंगत थी.
इसमें
लिखा गया कि जिस मोटरसाइकिल का ज़िक्र चार्जशीट में था वो प्रज्ञा के नाम
पर थी, लेकिन मालेगांव धमाके के दो साल पहले से कलसांगरा इसे इस्तेमाल कर
रहे थे. हालांकि
इस चार्जशीट के बाद एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा को जमानत तो दे दी लेकिन
उन्हें दोषमुक्त नहीं माना और दिसंबर 2017 में दिए अपने आदेश में उसने कहा
कि प्रज्ञा और पुरोहित पर यूएपीए (अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ प्रीवेंशन एक्ट) के
तहत मुकदमा चलता रहेगा. इसी आदेश में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून) हटा लिया गया. हालांकि
साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अभियुक्तों पर अब भी चरमपंथ के
ख़िलाफ़ बनाए गए क़ानून यूएपीए की धारा 16 और 18, आईपीसी की धारा 120बी
(आपराधिक साज़िश), 302 (हत्या), 307 (हत्या की कोशिश) और 326 (इरादतन किसी
को नुकसान पहुंचाना) के तहत मामला चल रहा है. प्रज्ञा ठाकुर फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. बीबीसी से
बातचीत में वो तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस नेता दिग्विजय
सिंह पर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाती हैं. प्रज्ञा
ठाकुर के ख़िलाफ़ समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले के अभियुक्त सुनील जोशी
की हत्या का आरोप भी लगा था. जोशी की 29 दिसंबर 2007 को हत्या कर दी गई थी. इस
मामले में फ़रवरी 2011 में प्रज्ञा की गिरफ़्तारी भी की गई थी. हालांकि,
2017 में मध्य प्रदेश के देवास कोर्ट ने प्रज्ञा को सुनील जोशी हत्याकांड
से बरी कर दिया था. दिल्ली और लाहौर के बीच दौड़ने वाली समझौता
एक्सप्रेस में 18 फ़रवरी 2007 को हरियाणा में पानीपत के समीप धमाका हुआ था
जिसमें कम से कम 68 लोग मारे गए थे. अजमेर
दरगाह ब्लास्ट मामले में भी प्रज्ञा ठाकुर का नाम आया था लेकिन अप्रैल
2017 में एनआईए ने प्रज्ञा ठाकुर, आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार और दो अन्य के
ख़िलाफ़ राजस्थान के स्पेशल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी.
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