पश्चीमी उत्तर प्रदेश की कुछ लोकसभा सीटों पर 11 अप्रेल के मतदान से केन्द्र की सरकार चुनने का दौर शुरू हो जाएगा। इन लोकसभा क्षेत्रों में शुरुआती मुकाबला भले त्रिकोणीय दिख रहा हो परन्तु जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ेगा इन क्षेत्रों में लड़ाई सीधी हो जाएगी और काँग्रेस लड़ाई से बाहर हो जाएगी या उसकी हैसियत भाजपा के कुछ सवर्ण वोट काटने की रह जाएगी। मेरी समझ से सपा-बसपा और काँग्रेस के बीच अधिकांश सीटों पर अघोषित गठबंधन और रणनीति बन चुकी है और कम से कम उत्तर प्रदेश का चुनाव इसी रणनीति के चक्रव्यूह में फँसकर भाजपा हारने जा रही है और मेरे अपने अनुमान के अनुसार वह 20-25 सीट तक सिमट कर रह जाएगी।
केवल पश्चीमी उत्तर प्रदेश की बात करूँ तो सपा-बसपा गठबंधन के पास दलित , यादव और ओबीसी के ठोस वोटर हैं जो मेरी समझ से उनको इकट्ठा मिलने जा रहे हैं , पश्चीमी उत्तर प्रदेश में मुसलमान वोटरों की संख्या जिला सहारनपुर में 41.94, मुजफ्फरनगर में 41.30, मेरठ में 34, गाजियाबाद में 25.34, गौतमबुद्वनगर में 13.07, बुलंदशहर में 22.21, बागपत में 27.97, बिजनौर में 43.04, मुरादाबाद में 47.12, रामपुर में 50.57 प्रतिशत है जिसके त्रिकोणीय मुकाबले में बिखरने का डर कुछ जानकार बता रहे हैं। मेरा आकलन है कि इन क्षेत्रों में जैसे ही भाजपा , मोदी , योगी की आक्रामक सभाएँ होंगीं , मुसलमान उस पार्टी की तरफ एकतरफा चला जाएगा जो पार्टी भाजपा को हराने की सबसे मज़बूत स्थीति में होगी।
अर्थात पश्चीमी उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी , भाजपा और संघ की कोशिश बैक फायर कर जाएगी। क्युँकि मुसलमान इनके विरुद्ध उहापोह की स्थीति से निकलकर इनके विरुद्ध एक तरफा सबसे मज़बूत प्रत्याशी को वोट करेगा। दरअसल काँग्रेस के पास अपना कोई जनाधार नहीं है और सपा-बसपा गठबंधन के पास केवल दलित वोटरों की संख्या देखें तो सहारनपुर मे 21.73, मुजफ्फरनगर में 13.50, मेरठ में 18.44, बागपत में 10,98, गाजियाबाद में 18.4, गौतुमबुद्धनगर में 16.31, बिजनौर में 20.94, बुलंदशहर में 20.21, अलीगढ़ में 21.20, आगरा में 21.78. , मुरादाबाद में 15.86, बरेली में 12.65, रामपुर में 13.38 प्रतिशत है। अर्थात केवल मुसलमान और दलित ही मिल कर पश्चीमी उत्तर प्रदेश से भाजपा का सूपड़ा साफ कर देंगे , हालाँकि इसके अतिरिक्त अजीत सिंह के जाट वोटर और
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