Sunday, May 18, 2014

वाह मोदी जी कमाल कर दिया

इस समय जगह नरेन्द्र मोदी के करिश्मे की बात हो रही है। होनी भी चाहिए क्योकि विजय ही ऐसी प्राप्त की है। बहुत दिनो तक मैने उनकी विचारधारा की आलोचना की। लेकिन आज उससे ऊपर उठकर मुझे भी उनकी तारीफ में दो शब्द तो बोलने ही चाहिए। क्योंकि उन्होने लोगों का विश्वास जीता है तो उनकी तारीफ भी बनती है। आज हमें भी यह महसूस हो चुका है कि देश में कांग्रेस के खिलाफ बनी लहर मोदी के पक्ष में ऐसी घूमी कि इतिहास में भाजपा ने जो नही किया था वो मोदी ने कर दिया। राम मंदिर आन्दोलन से भी बड़ी लहर। असल में यह 2014 की लड़ाई मोदी अकेले ही लड रहे थे, और उनसे लड़ने वाले आपस में लड रहे थे। शायद कांग्रेस ऐसे नतीजों पर स्तब्ध नहीं होगी। क्योंकि उसे 2013 विधानसभा चुनाव में ही यह आभास हो चुका था। नरेन्द्र मोदी जी की जो लहर बताई जा रही है उसके बहुत से कारण हैं।इसकी नींव रखी थी 2011 में हुए अन्ना आन्दोलन से। टीम अन्ना (अरविन्द केजरीवाल) ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा खोला, बस उसी से देश के सबसे बड़े तबके (मध्यम वर्ग) में सरकार के खिलाफ एक माहोल बन गया। हताश पड़ी भाजपा को संघ ने जोश के साथ खड़ाकर दिया। मंहगाई और गिरती अर्थव्यवस्था ने इस आग में घी का काम किया। हालांकि उस आन्दोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ लेकिन वो दिल्ली के बाहर कोई विकल्प नहीं थी। सरकार से नाखुश उद्योग घरानो ने मोदी में अपना भविष्य देखा। फिर क्या था बस मोदी ने पहले भाजपा, फिर संघ, फिर मीडिया को मैनेज करते हुए अपने आपको भ्रष्टाचार मिटाने और हर समस्या का उपाय वाला सुपर हीरो बनाकर पेश कर दिया। इसमें गुजरात मॉडल की भी तारीफ करनी पड़ेगी। उसकी कई कमियों को छुपाते हुए मोदी ने जबरजस्त मार्केटिंग की। गुजरात को अमेरिका या चीन की तरह पेश किया गया। इसमें मीडिया का भी बहुत बड़ा योगदान था। जिससे भी पूंछो, " क़ि भाई मोदी को वोट क्यों दोगे? तो जवाब देता गुजरात में बड़ा विकास किया है। मीडिया बता रहा है। गुजरात विकास को काउण्टर भी कोई नहीं कर सका। कांग्रेस से ज्यादा तो मोदी का सामना आम आदमी पार्टी ने किया था। इसके अलावा मोदी जी ने इस युद्ध को छल, बल, धन हर तरीके से बेहतरीन तरीके से लड़ा। मीडिया मैनेजमेंट और हाईटेक प्रचार में तो उनका को जोड़ ही नहीं है। रणनीति से लेकर राजनीति तक के हर मुद्दे पर उनकी एक मजबूत टीम तैयार खड़ी थी। टीवी पर प्रवक्ताओं की फ़ौज, मैदान में संघ का कैडर सब अपनी जान लगा रहे थे। उन्होंने गठबंधन में भी जबरजस्त सफलता हासिल करते हुए लगभग 30 छोटे-बड़े दलों से समझौता किया। इनमें से कई दलों ने तो किसी भी लोकसभा की सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था। हर जगह जातिगत समीकरण बिठाने के लिए 116 पूर्व-कांग्रेसियों को टिकट दिए। गुजरात में मुख्यमंत्री रहने के दौरान या तीन विधानसभा चुनाव के दौरान मोदीजी ने कभी भी अपनी जाति नहीं बताई लेकिन यूपी-बिहार जाते ही अपनी जाति सबको बता बैठे। जिस बात की आशंका हमें 6 महीने पहले से थी, वो हुआ भी। सरदार पटेल को गुजराती अस्मिता से जोड़ते हुए यूपी-बिहार में कुर्मी बताकर वोट मांगे गए। पूरे पूर्वांचल में पोस्टर पर अनुप्रिया पटेल, मोदी और सरदार पटेल होते थे। उन्होनें एक तरफ तो हिन्दुत्व को ठंडे बस्ते में डालते हुए दिखाया लेकिन उनका स्थानीय कार्यकर्ता और संघ का कैडर पूरे देश में इस चुनाव को हिन्दू-मुस्लिम से भी आगे बढ़कर हिन्दुस्तान बनाम पाकिस्तान पर केन्द्रित किए हुए था। उत्तर प्रदेश में 70 से अधिक सीटें मिलने का मतलब है, माया, मुलायम, कांग्रेस और चौधरी आजित सिंह सब के सब बेकार हो गए अकेले अमित शाह सहंशाह बन गए। यहाँ पर किसी भी अन्य दल का कट्टर वोट ही रुक पाया। मायावती का दलित वोट उनके पास ही है। मुलायम सिंह को भले ही 5 सीटें अपने परिवार के दम पर मिली हों, लेकिन उनका अपना वोटबैंक नहीं बचा है। इसी कारण मायावती की सीटें भी नहीं सकीं। मुस्लिम वोट भी अपनी रणनीति नहीं बना सका और कई जगह बॅंट गया।यूपी में सपा बसपा को कांग्रेस की बी-टीम बताते हुए माहौल बनाया गया। इसमें समाजवादी पार्टी को तो बिल्कुल हिन्दू-विरोधी बनाकर पेश किया गया। समाजवादी पार्टी के दो साल के कार्यकाल को भाजपा के अमित शाह नें मुजफ़्फ़र नगर दंगों के बाद जनता के सामने हिन्दू-विरोधी बनाकर पेश किया। यूपी में यादव ही मुलायम सिंह को मुल्ला और अखिलेश को अखिलेशुददीन कहने लगा था। जिसके चलते हमारे अनुमान ही नहीं, कई बड़े पत्रकारों और खुद आर। एस। एस। का सर्वे भी फेल गया। अब इसे तो लहर ही कहा जाएगा। आप भाजपा के हिन्दुत्व के सीक्रेट एजेंडे को इसी से समझ सकते हैं कि यूपी, बिहार, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, हिमांचल, उत्तराखड, गुजरात राजस्थान और भी कई राज्यों को देखें तो किसी भी जगह से एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था। ताकि हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति प्रेम जैसी बात नहीं समझ में आए।  ठीक यही बात बिहार में भी हुई। (बिहार में शाहनवाज हुसैन इसके अपवाद हो सकते हैं।) बस इन्हीं दो राज्यों से विजयी होकर मोदी देश के प्रधान मंत्री बनने जा रहे हैं। बाकी की बातें आगे फीलहाल तो उन्हें एक बार फिर से मुबारकबाद।

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