नब्बे के
दशक में
भगवान राम
ने राजनैतिक
दलों का
बहुत फायदा
कराया था।
भाजपा जो
दो सांसदों
वाली पार्टी
से उपर
उठकर 182 तक
पहुंचकर सत्ता
में भी
बैठी। लालकृष्ण
आडवाणी देश
के हिन्दू
हृदय सम्राट
बनकर उभरे।
लेकिन जब
बाजपेई जी
की सरकार
बनी थी
तब NDA के सहयोगी
दलों के
दबाव में
यह मुद्दा
डंडे बस्ते
में डालना
पड़ा। भाजपा
के अलावा
समाजवादियों और सेकुलर पार्टियों ने
भी इस
मुद्दे का
बहुत फायदा
उठाया। सभी
दलों ने
भगवान राम
के नाम
पर वोटों
की फसल
काटी। अब
यह मुद्दा
इतना घिसा-पिटा हो
चुका है
कि कोई
भी राजनैतिक
दल इसे
लेकर जनता
में नही
जा सकता
है। केवल
अपने कट्टर
वोटबैंक को
साधने के
लिए भाजपा
ने इस
मुद्दे को
अपने घोषणापत्र
में सामिल
किया है।
लेकिन बनारस
जैसे शहर
से लडकर
मोदी अपने
को सेकुलर
तो नहीं
कह सकते
हैं। इसी
तरह बनारस
में आप
केवल विकास
के मुद्दे
पर भी
चुनाव नहीं
लड सकते
हैं, खासकर
जब केजरीवाल
जैसा पोल-खोल में
उस्ताज नेता
आपके सामने
हो। क्योंकि
बनारस का
नगर निगम,
सांसद, कई
विधायक भाजपा
के हैं,ऊपर से
पूरे देश
को सपने
के रूप
में दिखाया
गुजरात मॉडल
भी केजरीवाल
के द्वारा
फेल किया
जा चुका
है। अब
भाजपा को
अपने एक
बड़े कट्टर
वोटबैंक को
साधने के
लिए फिर
से हिन्दुत्व
का सहारा
लेना पड
रहा है।
यह हिन्दुत्व
हार्ड न
होकर सॉफ्ट
हिन्दुत्व है। आप बनारस के
हर पोस्टर
और नारे
को देख
सकते हैं।
जो पूरे
देश में
चले मोदी
प्रचार से
अलग है। "माँ गंगा
और बनारस
से मेरा
पुराना रिस्ता
है" या
"माँ गंगा ने बुलाया है"
टाइप नारों
के साथ
पोस्टर और
होर्डिंग्स लगाई गई हैं। यहाँ
मोदी को
संघ के
कैडर ने
हिन्दू रक्षक
या मुस्लिम
विरोधी ही
बनकर पेश
किया है।
अब पूरे
बनारस में
भगवा लहराने
की तैयारी
कर रहे
मोदी को
एक और
मौका मिल
गया, विरोधियों
को हिन्दू
विरोधी बताने
का। भले
वो इस
बात को
खुले तौर
पर न
कह रहे
हों, लेकिन
गंगा आरती
के लिए
इलेक्शन कमीशन
से इजाजत
न मिलने
पर भाजपा
नेताओं का
धरना और
मोदी का
ट्वीट कर
माँ गंगा
से माफी
माँगना भी
एक हिन्दुओं
के दिल
को छूने
वाली बात
है। पहली
बात तो
यह कि
मोदी को
गंगा आरती
के लिए
इलेक्शन कमीशन
से इजाजत
मांगने की
कोई भी
जरूरत नहीं
थी। वो
चाहते तो
स्थानीय प्रशाशन
से कहकर
अपनी सिक्योरिटी
के साथ
गंगा स्नान
या आरती
कर सकते
थे। लेकिन
उनका इरादा
तो गंगा
आरती के
बहाने पूरे
देश के
हिन्दुओं को
मंत्रमुग्ध करना था। जब इसकी
इजाजत नहीं
मिली तो
ट्वीट कर
गंगा माँ
से माफी
क्यों? क्या
मां गंगा
टिवटर पर
हैं। इसके
लिए तो
दिल से
माँ गंगा
से माफी
मांग लेते।
पहले भी
तो कई
बार गए,
लेकिन नहाने
एक बार
भी नहीं
गए। फिर
क्या मुँह
लेकर गंगा
के पास
गए हैं।
गुजरात में
साबारमती और
नर्मदा की
हालत तो
मेधा पाटकर
से बेहतर
कौन जानता
होगा? जो
इस समय
बनारस में
ही अरविन्द
का प्रचार
कर रही
हैं। भाजपा
ने बहुत
ही चालाकी
से बनारस
के डी.
एम. को
यादव सरनेम
के कारण
प्रदेश की
सपा सरकार
के पक्ष
में बताने
लगे। अब
देखना है
कि मोदी
जी अपने
भाषण में
किस तरह
की बातों
का जिक्र
करते हैं।
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