पहले तो आधार बिल 2016 को लोकसभा में वित्तविधेयक बनाकर पेश किया गया फिर कल राज्य सभा में लाया गया। जिसमें सदन के उपाध्यक्ष और विपक्ष के नेताओं केसी त्यागी, नरेश अग्रवाल और सीताराम येचुरी के बीच जबारजस्ट बहस देखने को मिली। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने आधार बिल को मनी बिल के रूप में पेश करने पर सवाल उठाया। कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच विचार कर रही है। बिल लाने की जल्दी क्या थी। मनी बिल का रूप देकर राज्यसभा के अधिकार को चुनौती दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि तब भी जबकि मामला अदालत में है, संसद के पास कानून बनाने के अधिकार सुरक्षित हैं। अगर पैसा भारत के राजकोष से संबंधित है तो वो मनी बिल हो सकता है। सवाल ज़रूर उठे मगर सवाल को स्वीकार नहीं किया गया। बहस मनी बिल के रूप में ही हुई। मनी बिल के तहत राज्यसभा किसी बिल में संशोधन सुझा सकती है मगर 14 दिन से ज्यादा रोक नहीं सकती। 14 दिन बाद इसे पास मान लिया जाएगा। मगर आज विपक्ष ने अपने एतराज़ों से सरकार को ऐसे घेरा कि कई संशोधनों को स्वीकार करना पड़ गया और बिल को फिर से पास होने के लिए लोकसभा में भेजा गया। वित्त मंत्री ने अमेरिका का उदाहरण दिया कि 1935 में ही अमेरिका ने सोशल सिक्योरिटी नंबर बना लिया था। हम 80 साल पीछे हैं। अमेरिका अमेरिका में इसे कई बार चैलेंज किया गया। इनकम टैक्स के लिए ज़रूरी किया, कई नीतियों और आर्थिक गतिविधियों, हथियार रखने के लिए इसे कंपलसरी किया गया। इसने उनकी नेशनल सिक्योरिटी में उन्हें मदद की। इसे लगातार चैलेंज दिया गया और हर मामले में उनकी अदालतों ने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी एक सही वजह है। रवीश कुमार के प्राइम टाइम में पता चला कि 1906 में दक्षिण अफ्रीका में एक कानून आया था कि सभी एशियाई पुरुष को रजिस्टर कराना होगा और मांगने पर एक पहचान पत्र दिखाना होगा जिस पर उसके अंगूठे के निशान होंगे। जिसके पास ऐसा नहीं है तो उसे वापस जहाज़ से वहां भेज दिया जाएगा जहां से आया है। इसके खिलाफ गांधी ने जनसभा बुलाकर इस कानून को काला कानून घोषित कर मानने से इंकार कर दिया। गांधी ने पूरे कानून का विरोध करते हुए अंगूठे के निशान को लेकर भी विरोध किया। अमेरिका के सोशल सिक्योरिटी नंबर और भारत के आधार नंबर में एक बुनियादी फर्क ये है कि सोशल सिक्योरिटी नंबर के लिए बायोमेट्रिक पहचान नहीं ली जाती है। अर्थात आपकी उंगलियों के निशान, आंखों की पुतली का स्कैन नहीं किया जाता है। आधार को लेकर विवाद का बड़ा हिस्सा बायोमेट्रिक पहचान को लेकर भी है। अगर अमेरिका में 1935 में सोशल सिक्योरिटी नंबर आ गया था तो उस देश में आधार क्यों नहीं आया या सोशल सिक्योरिटी नंबर में बायोमेट्रिक पहचान क्यों नहीं जोड़ दी गई। जबकि सपनों के उस मुल्क में भी ग़रीब हैं और सरकार उन्हें सब्सिडी देती है।
पहले लोक सभा में वित्तमंत्री ने दो क़ानूनों के बारे में कहा था। 1986 का जुवेनाइल जस्टिस बिल और 1983 का अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक बिल मनी बिल के रूप में पेश किया गया था। इसका काउंटर कल जयराम रमेश ने राज्य सभा में अच्छे तरीके से करते हुए कहा कि दोनों ही मनी बिल नहीं थे। ये एक नोट मुझे राज्यसभा सचिवालय से मिला है लेकिन मैं चाहता हूं कि सदन के नेता बतायें कि ये जानकारी क्या मैन्युफैक्चर हुई कि दोनों मनी बिल थे। जेटली को जवाब देना पड़ गया कि उन्हें ये जानकारी लोकसभा की वेबसाइट से मिली है। राज्यसभा के उप सभापति पी।जे। कूरियन ने कहा कि ये डाटा एंट्री का मसला हो सकता है। इसे सदन में अलग से निपटाया जाएगा। वित्त मंत्री ने अपना उदाहरण दिया कि जब वे अपनी कार के लिए डीज़ल ख़रीदते हैं तो उन्हें सब्सिडी मिलती है जबकि नहीं मिलनी चाहिए। यह बहस चलती भी है कि डीज़ल कार की बिक्री इसलिए बढ़ती है क्योंकि डीज़ल सब्सिडी के कारण सस्ती होती है। अब वित्त मंत्री के उदाहरण से साफ नहीं हुआ कि क्या आधार कार्ड के इस्तेमाल से सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि डीज़ल की सब्सिडी सिर्फ किसान को ही मिले। बड़ी गाड़ी वालों को न मिले। किसानों को आधार कार्ड के ज़रिये अलग दर पर डीज़ल दिया जा सकता है। एक और कहीं से पता चला कि भारत में हर साल 5 लाख करोड़ की सब्सिडी हर साल दे दी जाती है। अगर इसका 20-25% भी आधार ट्रांसफर के ज़रिए बच जाता है तो बहुत फायदा होगा सरकार का। यही कारण है कि जब मोदी जी खुद विपक्ष में थे तो लगातार आधार को फालतू बताकर ट्वीट करते थे, और आज पीएम बनने के बाद समर्थन में आ गए हैं।
आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि आधार को लेकर जो डेटा जमा हुआ है उसमें कोई भी विदेशी एजेंसी शामिल नहीं है। जो भी डेटा है वो विदेश में नहीं बल्कि भारत के बेंगलुरू और मानेसर में सुरक्षित रखा गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि अदालत अगर डेटा मांग दे तो हम उसकी शक्ति को सीमित नहीं कर सकते हैं। इस बिल के अनुसार ज़िला जज से ऊपर का कोई भी जज डेटा मांग सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अगर कोई सूचना किसी खास उद्देश्य के लिए साझा की जानी है तो वो फैसला संयुक्त सचिव स्तर का कोई अधिकारी करेगा। अगर कोई प्राइवेट एजेंसी आधार नंबर ले भी ले तो वो इसे लीक नहीं करेगी। ये उससे उम्मीद की जाती है या वो नहीं कर पाएगी इसके लिए सख्त प्रावधान है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस बिल का अध्ययन करते हुए सवाल किया है कि अगर बिल का मकसद सिर्फ सब्सिडी को सही लोगों तक पहुंचाना है तो फिर प्राइवेट एजेंसी को आधार का डेटा देने का क्या मतलब है। अगर आधार कानून का मकसद सिर्फ सब्सिडी को ज़रूरतमंद तक पहुंचाना है तो इसके दायरे में उन्हें क्यों शामिल किया गया जो सब्सिडी नहीं लेते हैं। इसके कई सार सकारात्मक पहलू हैं और नकारात्मक भी। लेकिन सबसे प्रमुख तो मुझे बायोमेट्रिक डेटा को लेकर ही पता है। हालाँकि राज्यसभा में जयराम रमेश के 4 अमेंडमेंट को माना गया है। बाकी की बहुत सारी जानकारियाँ अभी आनी बाकी है, जो बिल की ओरिजनल कॉपी पढ़ने के बाद पता चलेंगी।
आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि आधार को लेकर जो डेटा जमा हुआ है उसमें कोई भी विदेशी एजेंसी शामिल नहीं है। जो भी डेटा है वो विदेश में नहीं बल्कि भारत के बेंगलुरू और मानेसर में सुरक्षित रखा गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि अदालत अगर डेटा मांग दे तो हम उसकी शक्ति को सीमित नहीं कर सकते हैं। इस बिल के अनुसार ज़िला जज से ऊपर का कोई भी जज डेटा मांग सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अगर कोई सूचना किसी खास उद्देश्य के लिए साझा की जानी है तो वो फैसला संयुक्त सचिव स्तर का कोई अधिकारी करेगा। अगर कोई प्राइवेट एजेंसी आधार नंबर ले भी ले तो वो इसे लीक नहीं करेगी। ये उससे उम्मीद की जाती है या वो नहीं कर पाएगी इसके लिए सख्त प्रावधान है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस बिल का अध्ययन करते हुए सवाल किया है कि अगर बिल का मकसद सिर्फ सब्सिडी को सही लोगों तक पहुंचाना है तो फिर प्राइवेट एजेंसी को आधार का डेटा देने का क्या मतलब है। अगर आधार कानून का मकसद सिर्फ सब्सिडी को ज़रूरतमंद तक पहुंचाना है तो इसके दायरे में उन्हें क्यों शामिल किया गया जो सब्सिडी नहीं लेते हैं। इसके कई सार सकारात्मक पहलू हैं और नकारात्मक भी। लेकिन सबसे प्रमुख तो मुझे बायोमेट्रिक डेटा को लेकर ही पता है। हालाँकि राज्यसभा में जयराम रमेश के 4 अमेंडमेंट को माना गया है। बाकी की बहुत सारी जानकारियाँ अभी आनी बाकी है, जो बिल की ओरिजनल कॉपी पढ़ने के बाद पता चलेंगी।
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