चरणस्पर्श बाबा,
सबसे पहले तो मुबारक हो, आप खूब छाए सोसल मीडिया में सैकडों सिर काटने के बयान पर। वैसे यह गुस्सा शांत करने का कोई आसन कर लिया करो। जादा सिर काटोगे तो बेचारे नाई लोग बेरोजगार हो जाएगे। फिर वे बाल किसके काटेंगे? छोटे बच्चों में आपका डर गब्बर की तरह है। जो बोलना नहीं सीखे वो कैसे बोले वो भारत माता की जय? जिन लोगों को साउथ साइड हिंदी नहीं आती है वो क्या करें?
चलो मुद्दे पर आता हूँ, आपका एक अखबार में विज्ञापन देखकर बडा दुख हुआ मुझे।
पतंजलि दंतकांति टूथपेस्ट के विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन में लिखा था, 'करोड़ों देशभक्त की तरह पतंजलि के उत्पादों का प्रयोग ग्राहकों और विक्रेताओं को करना चाहिए। जो लोग जागरूक हैं उन्हें अपने पतंजलि के उत्पादों को अपने घर, दुकान और दिलों में जगह देनी चाहिए, ताकि वह देश के विकास और समृद्धि में योगदान दे सकें। हमारे उत्पादों के प्रयोग से महात्मा गांधी, भगत सिंह, राम प्रसाद जैसी देश की महान शख्सियतों का सपना पूरा होगा। इन महान लोगों का सपना था स्वदेशी उत्पादों का प्रयोग।'
कितना क्रांतिकारी है यह विज्ञापन? अब मैं बाबा रामदेव आपसे पूछता हूँ कि वो कौन सी स्वदेशी अर्थनीति लेकर आ रहे हैं। क्या वो सरकार को वो अर्थनीति के अपनाने के लिए कहेंगे? जब खुद ही स्वदेशी में विश्वास करते हैं तो ऐसी सरकार को समर्थन क्यों जो प्राइवेटाजेशन और एफडीआई पर आधारित काम कर रही है? क्या इसके लिए भी आप कालाधन लाओ जैसे आंदोलन करेंगे? सही याद आया आपको जिस आंदोलन से आप मार के डर से लडकी के कपडे में भागे थे। कया आप सरकार पर दबाव बनाने के लिए हमें आश्वासन देंगे? क्योंकि यह अर्थनीति काॅपी पेस्ट कांग्रेस की है। क्या आपका आंदोलन सरकार बदलकर अपने उद्योग चालू करने के लिए था? बताइए कांग्रेस सरकार में लगे आप पर 70 मुकदमों का क्या हुआ? जो आप पर टैक्स चोरी, जमीन हडपने से लेकर राजद्रोह और आपराधिक मामले थे। सूत्रों के हवाले से मुझे खबर है कि लगभग सभी केस खत्म हो गये। कोई व्यापारी अपने सामान को खरीदने वालों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट कैसे दे सकता है? आप का सामन खरीदने के बाद लोग देशभक्त हैं यह कैसे? कल अगर रविशंकर जी महाराज यही कहने लगे तो? आज के ग्लोबल दौर में आप स्वदेशी के दम पर नहीं चल सकते? नहीं तो मोदीजी की सोसल मीडिया पर सालों से उनके नाम से होली दिवाली पर देशी दिए और पिचकारी खरीदने के संदेश भेजा करते थे, आज वो सब किसी बिल में हैं। आरएसएस की विचारधारा स्वदेशी है, एक अलग संगठन भी है जो कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन में शामिल होता था। आज चुप हैं। लेकर खेल, शिक्षा और भाषाओं में ग्लोबलाइजेशन का दौर है। क्या आप कम्पयूटर, टेक्नोलॉजी, आईपीएल, ऑपरेशन, अंग्रेजी का विरोध करेंगे? और युद्ध में राइफल की जगह त्रिशूल का प्रयोग करने को देशभक्ति कहेंगे? क्या आप सभी एनआरआईज को भारत वापस आने का आह्वान करेंगे? आप खुद विदेशों में योगा सिखाते हैं। वो भी अंग्रेजी में। जबकि आपके तथाकथित स्वदेशी के हिसाब से तो यह देशद्रोह है।
मुझे लगता है कि आप देशभक्ति की परिभाषा को संकुचित कर रहे हैं। मेरे हिसाब से हर वो इंसान देशभक्त है जो अपना काम ईमानदारी से करता है। चाहे वो खेत में आनाज पैदा करने वाला किसान हो, फैक्ट्री में काम करने वाला मजदूर हो, पिज्जा डिलीवरी करने वाला लडका हो, स्टूडेंट हो या सीमा पर शहीद होने वाला सैनिक। देशभक्ति इतनी छोटी नहीं है कि मेरे किसी कंपनी के बिस्किट खाने से खतरे में पड जाएगी। तो मेरा कहना यही है कि आप अपना योग का कार्य ईमानदारी से करें। यह व्यापार कर आप दो नाव पर एक साथ सवार होने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर यह इकनॉमिक्स तो छोड दें हम एकाउंटेंटस के लिए। याद है मुझे 2014 के पहले आप भारत को नार्थ अमेरिका के आइलैंड देशों के जैसे टैक्स फ्री और कैश कंट्रोल के लिए 1000-500 के नोट बंद करने की बात कहते थे। उसके बाद मेरे एक प्रोफेसर ने तो आपको पागल तक घोषित कर दिया था। कई अर्थशास्त्रियों ने आपको आगरा भेजने की सलाह दी थी।
उस दिन मैं एक चैनल पर न्यूज देख रहा था, ब्रेकिंग न्यूज के साथ तो बगदादी दिखाया जा रहा था। फिर एड में आप दिखे घी के प्रचार में तो मेरे घर का एक बच्चा बोला ये बगदादी भी घी बेचता है क्या? तो मैंने उसे डांट दिया कहा नहीं ये बाबा रामदेव हैं पैर छूने को कहा। चलो आशिर्वाद लेट दे दीजिए। तो उस एड में मैंने आपकी एक्टिंग बहुत पसंद की। बस आपसे निवेदन है कि दुनिया को रंरंगमंच मत समझिए, असली रूप दिखाइए। योगगुरु, बाबा या व्यापारी या भावी नेता। लोग तो आपको राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तक मानते हैं। शुभकामनाएं।
धन्यवाद।
भारतमाता की जय।
आपके योग का शिष्य:
कमलेश कुमार राठोड
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