जब मैं मुंबई आया था तो बहुत शर्म आती थी क़ि इंग्लिश नहीं आती है, कैसे लॉ पढ़ पाउँगा. काफ़ी कोशिश की लेकिन इंग्लिश उतनी ही सीख पाया जितने में पेपर देकर पास हो जाउ. क्लासेज में गया, कॉलेज गया. सभी के बाप बड़े बड़े जज या वकील, मैं अकेला गाँव का आदमी वो भी यूपी का. तो लोगों ने मज़ाक भी उड़ाने की कोशिश की. मैं हर जगह केवल अपने नॉलेज और फैक्ट्स की मजबूत तैयारी करके जाता था, पहले इंग्लिश में स्पीच या डिबेट चालू करके थोड़ी देर में हिन्दी बोलने लगता. जैसे ही हिन्दी में आया, फिर तो रुकने का नाम नहीं लेता. हो सकता है, आप यह सोचे क़ि अपने मुँह मिया मिट्ठू बन रहा है, लेकिन सच में मैं अपने जोन में किसी से हार नहीं मान सकता था, इसीलिए क्लास में बनते ग्रुप में हमेशा सबका दोस्त बनता रहा. कई लोग कहते हैं कि कमलेश दो हैं, एक वो जो सबके सामने बहुत शर्मिला सा डरने वाला लड़का है, दूसरा जो राजनीति और क़ानून की बात होते ही ऐसी ज़ोर की बहस करता है, जो सबकी वाट लगा देता है. लोग समझ नहीं पाते हैं, कि मैं किस तरफ जाने वाला हूँ, एक मुद्दे पर किसी को सही कहा तो ग़लत मुद्दे पर उसके विरोध में खड़ा रहता हूँ. यह सब मैने हिन्दी के अपने दो वर्तमान सबसे बड़े पुरोधाओं कुमार विश्वास और रवीश कुमार से सीखा है. इसके बाद हिन्दी बोलने के मामले में एक और कुमार हैं, जिनका नाम लूँगा तो एंटी नेशनल कह दिया जाउँगा. अजब बात है कि इन तीन में से दो को तो इंग्लिश आती ही नहीं है. ठीक वैसा ही मैं भी हूँ, मेरे ब्लॉग में लिखा है, क़ि "इंग्लिश नहीं आती है, इसलिए हिन्दी में लिखता हूँ." मतलब शर्म नहीं करता हूँ किसी को बताने में कि इंग्लिश कम आती है.
आज हिन्दी दिवस पर मैं यही कह सकता हूँ कि किसी दूसरी भाषा को नीचा दिखा कर आगे नहीं बढ़ा सकते हैं. आप इतिहास उठाकर देख लीजिए 80 के दशक में तमिल लोगों ने हिन्दी किताबें इसलिए जलाईं और बड़ी मात्रा में विरोध आंदोलन किए क्योंकि उनपर हिन्दी थोपी जा रही थी, लेकिन अब वो खुद सीख रहे हैं. ऐसे ही हम लोग मराठी सीखते हैं, लेकिन जब राज ठाकरे कहते हैं, कि सीखना ही पड़ेगा नहीं तो वापस जाओ तो नहीं सीखते हैं. यही हिन्दी के साथ भी है, सभी भाषाए प्यार की भाषा है, ज़रूरत है उनको प्यार से एक दूसरे के साथ जोड़ने की. मुंबई में गुजराती, तमिल, मराठी आपस में हिन्दी में बात करते हैं. बेंगलोर में तमिल और कन्नड़ हिन्दी में बात करते हैं. कलकत्ता में बंगाली और मलयाली लोग हिन्दी में बात करते हैं. भाषा दो लोगों को जोड़ती है, इसलिए किसी पर यह मत थोपो क़ि शुद्ध हिन्दी ही बोलो, या फिर रोमन में हिन्दी मत लिखो, उनकी भावना देखो कि हिन्दी में लोग आ रहे हैं, फिर किसी पर प्रेसर मत करो. मैने जानबूझ कर आज हिन्दी में इंग्लिश के शब्द मिलाए हैं क्योंकि हिन्दी समंदर है, और बाकी सब नदियाँ, तो वो नदियाँ समंदर में ही आकर मिलेंगी. बाकी सब भाषाएं हमारी मौसी हैं, हिन्दी माँ है. किसी के साथ सौतेला व्यवहार करने की ज़रूरत नहीं है.
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