Thursday, September 29, 2016

भगत सिंह एक विचार

पिछले दो दिन से मैं भगत सिंह को बहुत जी रहा हूँ, कहीं किसी प्रोग्राम को अटेंड करना तो कभी उनके बारे में लिखे गीत और नाटक देखना सुनना. कई लोग कहते हैं कि मुझे भी भगत सिंह बनना है, लेकिन आज के दौर में बिल्कुल भी संभव नहीं है भगत सिंह बनना. आज तो हमें उनके 10% होने में भी मुस्किल दिखती है, कोई न कोई आतंकवादी कहकर मार  देगा. इसलिए अपनी जगह पर रहकर समाज में बदलाव लाने की कोशिशें करना ही आज का भगत सिंह होना है. कम से कम 1-2% भी अगर हम उनके विचारों को जिंदा रख सके तो बहुत होगा. निजी जीवन में जितना हो सकता है उतना तो कोशिश, हर व्यसन(नशे), चरित्रदोष से मुक्त होकर ना केवल खुद पढ़ना बल्कि दूसरों को भी पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका देना ही समाज में हमारी अच्छी छवि बना सकता है, हर ग़लत चीज़ का विरोध करना और हमेशा कमजोर की तरफ खड़े होना ही भगत सिंह होना है. जातिवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ना ही भगत सिंह होना है. हर जेंडर का सम्मान करना और उनकी बराबरी के लिए लड़ना ही भगत सिंह होना है. मजदूरों और किसानों के हित में बोलना ही भगतसिंह होना है. बात बात पर झूंठ ना बोलना ही भगतसिंह होना है. किसी राजनीतिक दल में हिम्मत नहीं है कि वो भगत सिंह के विचारों को अपना सकें. इसलिए किसी दल से चिपक कर नहीं चल सकता मैं, अगर आज आम आदमी पार्टी सही मुद्दों को उठा रही है तो उसके साथ हूँ, कल वो ऐसा नहीं करेगी तो मैं दूसरा विकल्प देखूँगा. ऐसा हर युवा को करना चाहिए. एक और अंतिम बात आज भगत सिंह का टी शर्ट पहन कर या डीपी लगाकर घूमने वाले कितने युवा हैं जो अपनी शादी में दहेज नहीं लेंगे. मैं तो इस बारे में अपने पिताजी को एक पत्र भी लिख चुका हूँ, उनकी सोंच बदल दी मैने. उस पत्र से मेरे कट्टर परिवार के फिल्मी ठाकुर टाइप पिता जी ने मान लिया और मुझे इन सब बातों से हमेशा के लिए आज़ादी भी दी.  इस समय वो पत्र गाँव में होगा जैसे ही मिलेगा सबको दिखा दूँगा. इसलिए जितना भी हो सकता है भगत सिंह बनने की कोशिश की है मैने. 

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