Thursday, September 15, 2016

बीएसपी का रैला स्टाइल

उत्तर प्रदेश में बीएसपी ने आज चौथी रैली की। सहारनपुर में हुई रैली में आज 15 लाख लो शामिल हुए। आप इसे झूठ मान सकते हैं। लेकिन सच में इसे कह सकते हैं कि रैली नहीं रैला था। वो भी वन वूमेन आर्मी मायावती। ये उनका पुराना राजनीतिक रैली करने का अंदाज है। इसबार उनके साथ 19% दलित और 20% मुस्लिम वोट जो आ रहा है। यह मुस्लिम वोटों की बात मैं जमीनी स्तर पर बसपा के अपने मित्र कार्यकताओं Ashish Mishra Mohsin Khan Amar Singh  के माध्यम से बहुत दिनों से देख रहा हूँ। 2014 चुनाव में बुरी हार, फिर पार्टी की सभी इकाइयों को भंग कर नए सिरे से खडा करना बेहद मुश्किल होता है। दो साल अज्ञातवास के जैसे रहकर कार्यकर्ता इकट्ठा किए। जेएनयू प्रोफेसर विवेक कुमार जैसे लोगों के साथ मिलकर सोसल इंजीनियरिंग की। अपनी ऑफिस के ऑपरेटर को महासचिव बना दिया। पुराने लोगों को बुलाया तब जाकर पार्टी में जान आई। यह सब करते हुए वो मीडिया से दूर थीं, फायदा ये हुआ कि न अच्छी खबर दिखाई न उनकी गलती गिनाई। फिर भी सर्वे में नंबर एक।
मायावती ने इसबार जमीनी स्तर पर इसबार कमान युवा वर्ग के हाथों में दी है। दलित युवा मोबाइल फोन में उनके भाषण,  गाने सुनते हुए मिल जाते हैं। पढे लिखे दलित सोसल मीडिया में बहुत एक्टिव हैं, अब तो वे दूसरों से बहस भी करते हैं। मायावती ने हर मुद्दे को सही तरीके से भुनाया है, कोई कसर नहीं छोड रही हैं। दयाशंकर के मामले में नसीमुद्दीन से गलती हुई कि खुद कमान संभाली। 
बचपन से उनकी बडी रैली खासकर 15 जनवरी को उनके जन्मदिन पर देखता रहा हूँ, जिसमें 10-12 लाख लोग शामिल होते थे। तो इस रैली में भी कुछ अजीब नहीं लगा। बस चुनाव अब कांग्रेस कितना मजबूत लडेगी, इसपर निर्भर है। जितना कांग्रेस मजबूत उतना बसपा के वोट कटे। फिलहाल यूपी में ओवैसी को कोई नहीं पूछेगा। ज्यादा मेहनत करके बीजेपी की मदद कर सकते हैं।
मायावती 10-15 लाख की रैलियाँ कर रही हैं, लेकिन मीडिया कभी उसे नहीं दिखा रहा है? यह क्यों कि 10-20 हज़ार लोगों की रैली पर पूरा मीडिया चर्चा और एनालिसिस चालू कर देता है, लेकिन इसमें नहीं। कुछ लोग इसे मनुवादी मीडिया कह रहे है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूँ. गुजरात में या महाराष्ट्र में कुछ रैली या आंदोलनों को मीडिया में जगह मिली है. इसमें मुझे कॉरपोरेट मीडिया का एक मिला जुला संदेश दिखाई देता है. इतिहास बताता है क़ि मायावती कभी कॉरपोरेट से संबंध नहीं रखती हैं, या हो सकता है पहले(काशीराम के समय से) मीडिया से दूरी रखने के कारण आज मीडिया उनमें कुछ ध्यान नहीं देना चाहती है।
पिछले संडे को बीएसपी की सहारनपुर रैली के समय मायावती विश्व में 4 नंबर और भारत में पहले नंबर पर पर ट्रेंड कर रही थी। यह अपने आप में बड़ा बदलाव और  चेतावनी संदेश था बाकी दलों के लिए जो पार्टी मीडिया से इतना दूर रहती थी, आज वो सोसल मीडिया पर आगे. कुछ तो बदलाव हुए हैं उसमें।

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