Sunday, April 30, 2017

कुमार के नेतृत्व में आप को फायदे

मेरी बात से बहुत लोगों को गुरेज़ है क़ि देश की राजनीति में कहीं पर भी सेकुलर नैशनलिस्ट नाम की जगह बची हुई है. लेकिन मैं फिर से अपनी बात पर कायम हूँ क़ि हाँ इस प्रोपेगैंडडा के दौर में राजनीतिक उठापटक के बीच सेकुलर राष्ट्रवाद नाम की चीज़ है जो भाजपा को काउंटर कर सकती है. वैसे जातिवाद एक मुद्दा था लेकिन मंडल और बाबा साहब को बीजेपी द्वारा हाइजैक करने के बाद कोई स्पेस सेकुलर दलों के लिए बचता नहीं है. ख़ासकर आम आदमी पार्टी जैसे शहरी (दिल्ली)  दल के लिए तो जातिवाद बिल्कुल नामुमकिन चीज़ है. उसके समर्थक युवा हैं या थे, जिनपर राष्ट्रवाद या हिंदुत्व के नाम पर भाजपा ने कब्जा किया है. आम आदमी पार्टी के कई नेता भी राष्ट्रवादी सेकुलर हैं. इस पार्टी का स्वरूप भी वही है. क्योंकि आप देखेंगे क़ि गौरक्षक और दादरी पर तो आम आदमी पार्टी बीजेपी के खिलाफ है लेकिन जैसे ही कश्मीर या सेना की बात आती है वो खुले तौर पर राष्ट्रवादी सोंच रखते हैं. बस ग़लती हुई केजरीवाल से सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी विरोध के चक्कर में. जिससे उनकी छवि निगेटिव पॉलिटिक्स के रूप में बनती गई. इससे केजरीवाल के काफ़ी फ़ैन खुद अलग हुए और बचे हुए लोगों को उसका बचाव करना मुश्किल था.  मैं तो आम आदमी पार्टी को भविष्य की सॉफ्ट हिंदुत्व पार्टी के तौर पर देखता हूँ. इसीलिए मैने कहा था क़ि आम आदमी पार्टी के पास बहुत कम समय है खुद को बचाने का. मात्र दो साल से भी कम समय जिसमें वो विकास तो कर सकती है लेकिन केवल विकास के नाम पर चुनाव जीत पाएगी ये पिछले कुछ सालों की राजनीति को देखकर लगता नहीं है. कुमार विश्वास वो व्यक्ति हैं जो इस व्हाट्स एप या चुटकुले के दौर में बीजेपी को अपना मज़ाक बनाने का कोई मौका देंगे. इसके उलट केजरीवाल दिल्ली में काम करते रहें तो क्या फ़र्क पड़ता है? और हाँ कुमार विश्वास एक ऐसे नेता हैं जो मोदी या योगी से मीडिया में मिल रहा स्पेस भी छीन सकते हैं. कई बार वो ऐसे बयान दे देकर मोदी विरोध कर देते हैं जिससे मोदी समर्थक खुद कंफ्यूज हो जाता है क़ि इससे "असहमत" कैसे हुआ जाए? ये उनकी अपनी शैली है जो उनको केजरीवाल से अधिक पॉप्युलिस्ट बनाती है. दूसरी बात आप अभी कुमार विश्वास का वो कश्मीर मुद्दे पर बनाया हुआ 20 मिनट वाला वीडियो देखिए. उसमें भी ठीक यही दिखता है. उसको जो शेयर करने वाले लोग हैं वो बहुत से मेरी पहचान के मोदी या बीजेपी के कट्टर राष्ट्रवादी समर्थक हैं. जबकि उस वीडियो में मोदी की भी कड़ी आलोचना थी. वो अलग बात है क़ि मीडिया ने उसे केवल केजरीवाल का विरोध बताकर छोड़ दिया. कुमार के अधिकतर फ़ैन ऐसे हैं जिनपर अभी तक किसी दल का शाया नहीं है, बहुत से ऐसे भी फैंस हैं जो भाजपा को वोट देकर आते हैं लेकिन वो कुमार के फेसबुक पर कमेंट करते दिखेंगे, " सर जी आप बहुत अच्छे हैं, लेकिन ग़लत पार्टी में हैं......" यही कारण है क़ि मैं इस राजनीतिक दौर में बीजेपी पर वही तीर चलवाना चाहता हूँ जो उसका ही है. मतलब राष्ट्रवाद का हाइजैक करके उसको हराना. नहीं तो बहुत अधिक विकल्प अब उनके पास बचे नहीं है. और एक बात क़ि केजरीवाल को अब अपनी छवि सुधारने में बहुत समय लगेगा जो 2019 तक संभव नहीं है. क्योंकि उनकी छवि धीरे धीरे अब राहुल गाँधी की तरह चुटकुला मैटेरियल में हो गई है. 
(नोट: मैं इसके सही ग़लत के फ़ैसले तक बात नहीं कर रहा हूँ. हो सकता है एक सेकुलर और संपूर्ण राष्ट्र की परिभाषा में ये ग़लत भी हो लेकिन जब कट्टर राष्ट्रवादी और धार्मिक फ्रिंज एलिमेंट सत्ता में हों तो उनको उतारने के लिए उससे कम राष्ट्रवादी और सेकुलर नैशनलिस्ट जैसा नया शब्द बनाने में क्या हर्ज है?)

Friday, April 28, 2017

आम आदमी पार्टी में कुमार विश्वास ही उम्मीद हैं।

आज कुछ दोस्तों से आम आदमी पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चा हो ही रही थी कि किसी ने फेसबुक पर लल्लन टाॅप लाइव चला दिया जिसमें आम आदमी पार्टी को बचाने की अंतिम आस कुमार विश्वास को राष्ट्रीय संयोजक बनाने की बातें हो रही थी। 
इसपर मैंने आराम से सोचकर देखा तो लगा कि सचमुच इस दौर में जहां परसेप्शन की लडाई है और केजरीवाल की इमेज उनकी ईमानदारी और नियत से अलग राहुल गांधी की तरह जोकर या देशद्रोही बना दी गई है, तब अगर कुमार विश्वास पार्टी के नेता बने तो क्या होगा? असल में इस समय इमोशंस पर राजनीति हो रही है, व्हाटस एप की एक दुनिया है जहां असली राजनीति राष्ट्रवाद के नाम पर हो रही है। जिसमें सेकुलर पार्टी या नेता को सीधे हिन्दू विरोधी या पाकिस्तान से जोड दिया जाता है। और ये सब कम से कम 4-5 सालों तक और चलने वाला है। कुमार विश्वास एक ऐसे नेता हैं जो बीजेपी को इस मुद्दे पर बौना साबित कर देंगे। राष्ट्रवाद के नाम पर जितने वो मुखर हैं उतना शायद बीजेपी के भी कई नेता नहीं। वो पार्टी के अध्यक्ष बनने के बाद बयान दे सकते हैं कि, "कल मैं अपने बचपन के मित्र मनीष के  साथ लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहा हूँ।" फिर चाहे वो जम्मू में ही गिरफ्तार हो जाएँ। वो स्मृति ईरानी, मोदी, अमित शाह, किरन बेदी पर ऐसे तंज करते हैं जो लोगों में उत्साह और चर्चा का दौर शुरू कर देते हैं। उनके पास दिलीप पांडेय, कपिल मिश्रा जैसे प्रखर राष्ट्रवादी नेता हैं जो ऐसा करने में मदद करेंगे। हो सकता है आप सोच रहे हों कि इससे मुस्लिम समुदाय दूर जा सकता है। लेकिन वो अब सेकुलर नैशनलिज्म की बात करने लगे हैं। उनका कविता मंचों से बयान कि एक मुस्लिम जब पांच बार की नमाज पढता है तभी उसका वंदे मातरम पूरा हो जाता है। वो पुराने कुमार विश्वास नहीं है जो कह देते थे कि, " यूपी पुलिस एक एफआईआर पर जैसे संत को उठा लेती है वैसे बुखारी को गिरफ्तार करके दिखाए। ऐसा भी नहीं है कि वो सेकुलर होते होते हिन्दू विरोधी हो जाएं। उनको हम हार्डकोर सेकुलर नैशनलिस्ट कह सकते हैं। भ्रष्टाचार और राष्ट्रवाद के साथ साथ वो हिन्दुत्व के एजेंडे पर बीजेपी को सफल नहीं होने देंगे। अच्छे वक्ता होने की वजह से कार्यकर्ताओं में बहुत जोश भरेगे। कांग्रेस और राहुल गांधी पर मजाक करने की वजह से लोग कांग्रेस का हितैषी भी नहीं समझेंगे। 
लेकिन इसमें कुछ डर भी हैं। पहला डर है केजरीवाल धडे का पार्टी में उनको बर्दाश्त कर पाना। दूसरा डर है उनका रणनीतिक तौर पर होशियार न होना। ऐसे में क्या वो अन्य रणनीतिकारों की मानेंगे? ये डर मिटाकर आम आदमी पार्टी को एक कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि 2019 के चुनाव में दो साल से भी कम का समय बचा है। पंजाब, गोवा,एमसीडी हार के बाद उनके पास दिल्ली ही बची है जिसमें केजरीवाल ने अपने दम पर काम नहीं किया तो 2019 लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हार सकते हैं। इसलिए केजरीवाल को संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी के साथ सीएम के काम करने चाहिए और पार्टी पर अपनी पकड रखते हुए चेहरा किसी और को बना दें। कुमार विश्वास इसके सबसे बेहतरीन विकल्प हैं । मुझे पता है कि इससे पार्टी के सेकुलर फेस को खतरा है लेकिन कुमार विश्वास दोनों के बीच का रास्ता निकालना जानते हैं। रही बात आरक्षण विरोधी बयानों की। तो आपको बता दूँ कि एक बार जेएनयू में केजरीवाल के आरक्षण विरोधी भाषण हुए थे। लेकिन राजनीति में आते ही उसपर चुप हो गए। वैसे भी पर्दे के पीछे तो केजरीवाल ही काम करने वाले है। सही है या गलत मुझे नहीं पता लेकिन ये मुददों को हाइजैक करने का राजनीतिक दौर है। जो बाबा साहब अंबेडकर हिन्दू धर्म के प्रखर विरोधी रहे हैं। उनको बीजेपी जैसी हिन्दुत्ववादी पार्टी हाईजैक कर लेती है। वो एकदम से बसपा से एकाधिकार छीनकर दलितों के वोट ले जाती है। इसी तरह आम आदमी पार्टी भी बीजेपी से राष्ट्रवाद के मुद्दे को सेकुलर रहते हुए हाईजैक कर सकती है। कम से कम सोसल मीडिया के दौर में जोक्स का हिस्सा बने केजरीवाल की जगह कुमार विश्वास पर जोक्स और पप्पू टाइप छवि पेंट करने में कुछ समय तो लगेगा। हो न हो केजरीवाल और पार्टी जाने। लेकिन इस मुद्दे पर कम से कम एक पाॅलिटिकल एनालिसिस्ट के तौर पर बात तो कर सकते हैं।

Monday, April 24, 2017

केजरीवाल पर दिल्ली की जनता की राय

आम आदमी पार्टी ने जनता के सामने ऐसा कोई ब्लूप्रिंट रखा ही नहीं जिसके आधार पर वो उनसे कह सके कि आप हमें वोट दें, हम यह बदलाव लाएंगे. जबकि पार्टी के पास खुद पिछले विधानसभा का अपना अनुभव था जहां उसने दिल्ली डायलॉग, डोर टू डोर कैंपेन, मोहल्ला सभा समेत अन्य विभिन्न तरीकों से जनता तक अपनी बात पहुंचाने का काम किया था. वो केवल ईवीएम ही लगे रहे। दिल्ली की हालत के लिए एमसीडी पर काबिज बीजेपी भी जिम्मेदार है। ये बात मैं नहीं बीजेपी खुद कहती है तभी तो किसी पुराने नगर सेवक को टिकट नहीं दिया। दो साल पहले केजरीवाल को दिया गया मैंडेट एमसीडी पर काबिज बीजेपी के खिलाफ और केजरीवाल की अच्छी राजनीति के लिए था। लेकिन कुछ केजरीवाल की गलतियाँ और कुछ मीडिया और राष्ट्रवाद के काॅकटेल ने केजरीवाल को ऐसा देशद्रोही और गद्दार धोखेबाज बनाया कि लोग उनसे ऊब गये। केजरीवाल के काफी काम अच्छे भी हैं इतने सालों तक एमसीडी लुटने के बाद भी उन्हे बीजेपी पसंद आ रही है। केजरीवाल के 67 वीरों का तो कहना ही क्या खूब जांच परख की थी लेकिन आज उन्हें मनोज तिवारी जैसे नेताओं का साथ पसंद आ रहा है। योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार जैसे नेताओं का बाहर जाना देश के सभी बुद्धिजीवियों को आप से दूर कर गया। केजरीवाल को भी घमंड था अब धीरे-धीरे उतर रहा है। 

Sunday, April 23, 2017

तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन

बड़े बुजर्गो की बातों से लेकर स्कूली किताबो और उच्चतर शिक्षा की किताबो तक, देश की भौगोलिक स्तिथि से लेकर छोटे- बड़े नेताओं के भाषणों तक यही बात देखी, पढ़ी और सुनी है कि #भारत_एक_कृषिप्रधान_देश_है_। पर आज इन किसानों को देख कर प्रश्न उठता है कि क्या वास्तव में ऐसा है?
सरकार इन किसानो की समस्याओं को दूर करना तो बहुत दूर की कौड़ी है इनकी समस्याओं को सुनना तक मुनासिब नही समझ रही है। वास्तव में बहुत ही दर्दनाक, भयावह और वीभत्स स्तिथि है. आंदोलन के अंतिम दिन इन किसानों पर सोसल मीडिया पर खूब हमले हुए क़ि वामपंथी थे, इनके पास बिसलेरी का पानी कैसे आया? विपक्ष का किया धरा है..... आदि आदि!
लेकिन सच में सोचिए और इन किसानों के मासूम चेहरे देखिए. देखकर आँसू आ जाते हैं. मुझे कई बार बहुत मन हुआ क़ि दिल्ली जाकर इनके साथ आंदोलन करना चाहिए. लेकिन कुछ निजी कारणों की वजह से नहीं जा पाया. गाँधी वादी या अहिंसक आंदोलन के जितने भी तरीके हो सकते थे, वो सब उन्होने अपना लिए. पहले तो वो दिल्ली जैसे बड़े और अनजान शहर में आकर इतने दिन तक अकेले लड़ते रहे यही सराहनीय है. कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं क़ि वो तमिलनाडु सरकार के खिलाफ क्यों नहीं लड़ते हैं. दरअसल उन्होंने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ भी काफ़ी आंदोलन किया है. लेकिन ये वैसे ही है जैसे हम हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जाते हैं. उनके आंदोलन में एक गजब की रचनात्मकता है.  हाल में उन्होंने एक शख्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनाया और फिर वहां बैठे सारे किसानों पर उससे कोड़े लगवाए। कोड़े मार रहे शख्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनने के अलावा उनकी तरह के कपड़े भी पहन रखे थे। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा, ‘हम लोगों को नजरअंदाज करके मोदी ने बता दिया कि वह हम लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं, कभी-कभी तो हमें लगता है कि इससे अच्छा तो हम लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाए।’ नेशनल साउथ इंडियन रिवर लिंकिंग फार्मर के प्रदेश अध्यक्ष पी आय्याकन्नू ने कहा कि कोड़े की मार झेलने के लिए 25 किसान अपने आप सामने आए। लेकिन 23 पिटाई की मार को ज्यादा देर झेल नहीं पाए। किसानों में पीएम मोदी को लेकर खासी नाराजगी है। एक किसान ने कहा कि हम लोग यहां गर्म सड़क पर सो रहे हैं और पीएम एसी वाले कमरे में रहते हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि मोदी किसानों से गुलामों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। जंतर मंतर पर बैठे किसान अरुण जेटली, उमा भारती, राजनाथ सिंह, राधा मोहन सिंह से मिल चुके हैं। लेकिन पीएम मोदी से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। वे लोग ‘मोदी जी, मोदी जी जंतर मंतर आओ जी’ के नारे लगाते भी देखे गए हैं।
44 डिग्री पारे की गर्मी में  प्रदर्शिन कर रहे किसान लगातार बीमार पड रहे हैं। मोदी का पुतला बनाकर उसमें अपना खून चढा रहे हैं। सडक पर डालकर चावल सांभर खाते हैं। अपने मृत साथियों के नर कंकाल की माला बनाकर पहने हैं। किसी किसी के पास तो इतना भी नहीं है कि वापस जाकर खाएंगे क्या? फिर भी न उस बहरी सरकार को फर्क पडता है, न उसके बादशाह को फर्क पडता है और न आपको कोई फर्क पडता है। हद तो तब हो गई जब उन्होने अपना ही मूत्र पी लिया और धमकी दी क़ि अगले दिन मल खाएँगे......... बहुत अधिक लिखने से अच्छा है आप ये चित्र देखकर ही समझें.....












Friday, March 24, 2017

योगी जी के नाम खुला खत

आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी महाराज,
आपको मूर्ख मंत्री साॅरी मुख्य मंत्री बनने पर बधाई। आपके कुछ कार्य मुझे बडे अच्छे लगे जैसे लाल बत्ती न लेना, कम से कम कोई बात तो केजरीवाल से सीखा आपने। फिर गैर कानूनी स्लॉटर हाउस बंद कर दिया, मैं तो आपसे उम्मीद करता हूँ कि इसके लाइसेंस रद्द कर दो। कानूनी या गैर कानूनी कैसे भी जानवरों की हत्या न हो। गुटखा और पालीथीन पहले से ही बंद था, लेकिन ठीक वैसे जैसे मुम्बई दिल्ली में बंद के बाद भी सब चलता है। आपने रिपीट ऑर्डर किया अच्छी बात है। 
अब सब जगह नारे लग रहे हैं,  
"यूपी में रहना है तो सिंगल-सिंगल कहना है।" कहीं ये आपका, पीएम का और आरएसएस का सिंगल होने का फ्रस्टेशन तो नहीं है कि न गर्लफ्रेंड रखेगें और न रखने देगे। पहले तो इसका नाम एंटी रोमियो नहीं रखो। क्योंकि रोमियो कोई सडकछाप आशिक नहीं था, उसका बडा इतिहास है। खैर क्या कहूँ इतिहास तो आप लोगों का कमजोर सब्जेक्ट है। मोदी जी की डिग्री में मैंने देखा कि वो हिस्ट्री में फेल कर गए थे। दूसरी बात आप बजरंग दल वाले काम पुलिस से करवा रहे हैं। फासिज्म की कौन सी नई परिभाषा है ये? जहाँ प्यार करना दुश्वार हो जाए। रही बात अपराध की तो आप यूपी, एमपी, छत्तीसगढ, राजस्थान के आकडे मिला लो। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में यूपी प्रति लाख जनसंख्या के आधार पर सबसे कम है। मैं जानता हूँ कि मुंबई का 100 नंबर एक-एक घंटे तक कोई उठाता नहीं है लेकिन यूपी में 20-25 मिनट में पुलिस पहुंच जाती थी। ये विश्व के सबसे बेहतरीन पुलिस सिस्टम में सुधार के जैसे है। यूनाइटेड स्टेट की एक तीन सदस्यीय समिति ने इसकी तारीफ की थी।  यहाँ संख्या इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि सब केश दर्ज अधिक होते थे। बाकी जगह तो बिना दर्ज किए ही लोग भगा दिए जाते हैं पुलिस स्टेशन से। यहां क्योंकि पुलिस के 100 नंबर पर काॅल सेंटर के जैसे प्रोफेशनल बैठते थे तो कोई डरता नहीं था फोन करने पर और आसानी से शिकायत दर्ज कराई जाती थी। लेकिन आपने आते ही नायक फिल्म का अनिल कपूर बनने के चक्कर में सब बदलना शुरू कर दिया। जिससे कानून व्यवस्था और उलझ गई है। लेकिन क्या करें यूपी में तो लोग राष्ट्रवाद और हिन्दू मुस्लिम मंदिर मस्जिद के चक्कर में पागल थे। उनको नहीं दिखा कि पहले तो आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष (अमित शाह) जिनपर आधा दर्जन से अधिक केश और जिनको गुजरात हाईकोर्ट ने तडीपार किया, और आज भी जमानत पर हैं। फिर आपके प्रदेश अध्यक्ष (केशव प्रसाद मौर्या) जिनपर दर्जन भर केश हैं। फिर आप खुद जिस पर 17-18 केश हैं। जिन जिन गुंडों को सपा से अखिलेश ने बाहर किया वो सब आपके यहाँ आकर एमएलए बन गए। ऐसे कैसे आप अपराध खत्म करेंगे? ये तो वैसे ही हुआ कि विजय माल्या नोटबंदी का सपोर्ट करने लगे। लेकिन ये यूपी की जनता नासमझ है उसे अपने छोटे भाई बिहार से सीखने की जरूरत थी। यहाँ सब मंदिर मस्जिद के नशे में डूबे हुए थे, जबकि 80% घरों में शौचालय नही है, पेट में रोटी नहीं है लेकिन राम मंदिर चाहिए। लोगों को भडकाना बडा आसान है। आपकी सोच ही अराजकतावादी है। आप कहते हैं कोई एक मारे तो तुम सौ मारो। क्यों भाई कानून है आप कौन हो मारने वाले? उसे कानून से सजा दिलाओ। एक के बदले सौ? अरे एक गलत था बाकी 99 की क्या गलती? आप कहते हैं कि वो तुम्हारी एक लडकी से शादी करें तुम सौ लडकियां उनके घर से उठा लाओ। क्यों भाई? कानून संविधान सब तेल लेने गया क्या? ऐसे तो कल जो ताकतवर होगा कोर्ट न जाकर खुद ही फैसला कर लेगा। महिलाओं की रक्षा करने चले? आपके महिलाओं के खिलाफ जो बयान हैं वो ट्रम्प को भी पीछे छोड देते हैं। एक पुराने वीडियो में आपका समर्थक कहता है कि मुस्लिम औरतों को कब्र से खोदकर रेप करो। और आप मंच पर सामने बैठे हुए ताली बजाते हैं। आप खुद कहते हैं कि हर लडकी एक जिंदा बम है, उसे घर में ही कैद करके रखो नही तो बाहर जाएगी तो समाज की इज्जत खराब करेगी। पता नहीं कौन सा चश्मा लगा है आपको? ये सती प्रथा आप जैसे लोगों की ही देन होगा। आप कहते हैं कि औरतों को कोई अधिकार नहीं है कि वो पुरुषों की बराबरी करें। ऐसी घटिया मानसिकता वाले मूर्ख मंत्री साॅरी मुख्य मंत्री पर कैसे हम महिलाओं की रक्षा का भरोसा कर लें। आप तो फतवे वालों के जैसे लडकियों के जींस पहनने पर भी रोक लगाने की सोच रखते हैं। आप कहते हैं कि हर हिंदू को 4-5 बच्चे पैदा करना चाहिए और जो ऐसा करे उसे सब्सिडी मिले। क्या क्या गिनाऊं विकीपीडिया और गूगल भरा हुआ है आपके कारनामों से। मुझे पता है कि विश्व में हर जगह चरमपंथी  ऐसे ही सुरक्षा के बहाने देकर महिलाओं को कैद करते हैं, तालिबान उदाहरण है। आपको क्या पता एक स्त्री के बारे में? वो हमारी आधी आबादी है इसलिये उनको खुद की रक्षा करने लायक बनने दो। पूरा इतिहास पढा है मैंने जहाँ ट्रम्प से लेकर हिटलर, नीरो और मुसोलिनी इसी तरह एंट्री करते रहे हैं। आप भी ट्रम्प के बडे फैन हैं सुना है मैंने। वहाँ एच1 वीजा पर रोक लगी है जिससे आईटी सेक्टर में रोजगार के लिए अफरातफरी मच गई है। जो अमेरिकी लोग ग्लोबलाइजेशन के मसीहा थे वो आज ये कर रहे हैं। असल में कुछ जगह युरोप, अमेरिका, अरब सहित पूरे विश्व में एक अल्ट्रा राइट आइडियोलाॅजी की राजनीति की तरफ लोग भ्रमित हो रहे हैं। कुछ एनआरआई और हमारे साफ्टवेयर इंजीनियर मित्र इस वीजा वाले फैसले से नाराज हैं। लेकिन क्यों?  राज ठाकरे भी तो यही कहता है। फिर आप (योगी) भी तो वही भाषा बोलते हैं? तो हम सिलेक्टिव क्यों होते हैं, ट्रम्प, योगी और ठाकरे सबका विरोध करने की जरूरत है। यूपी में आजकल कुछ पोस्टर लगे हैं आपके समर्थकों के जो ट्रम्प की तरह यूपी से मुसलमानों को निकालने की बात लिखते हैं। अरे मुसलमानों ने देश की आजादी में कुरबानी दी है और जब उनको पाकिस्तान जाने को कहा गया तो वो नहीं गए। और दूसरी तरफ आपके आरएसएस का इतिहास लिखा पडा जो अंग्रेज सरकार के लिए जासूसी करते थे। रही बात आतंकवाद की तो जो दोषी हैं उन्हें कडी से कडी सजा दो। चाहे मुसलमान हो या एमपी में पकडे गए सात हिंदू लडके जो बीजेपी और आरएसएस से जुडे थे और आईएसआई के एजेंट थे। इसलिए ये सब छोडकर विकास पर ध्यान दो। यूएन की तीन रिपोर्ट अभी हाल ही में आई है, 1: वर्ड हंगर इंडेक्स जिसमें भारत 98 नंबर पर है। 2: वर्ड ह्यूमन रिसोर्स रिपोर्ट जिसमें भारत 112 नंबर पर है। 3: वर्ड हैप्पीनेस कंट्री जिसमें भारत 120 देशों से बाहर है। मतलब हमसे आगे तो बांग्लादेश और नेपाल हैं। बस पाकिस्तान दो तीन स्थान पीछे है। इस बात खुश होना चाहिए कि हम पाकिस्तान से आगे हैं। पता नहीं अगर पाकिस्तान न होता तो हमारी देशभक्ति का क्या होता? पता है लिस्ट में नंबर वन कौन है? नीदरलैंड। जहाँ इसबार चुनाव में ऐसी पार्टी बुरी तरह हार गई जो मुस्लिम और बाहरी लोगों का विरोध करती थी। एक ऐसी पार्टी "ग्रीन लेफ्ट" जीती जो सब छोडकर पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही थी।
11 तारीख से मैंने तो राजनीति छोड ही दी थी, लेकिन आज भगत सिंह के शहीद दिवस पर उनको पढकर और एक प्रोग्राम में लेक्चर सुनकर चुप नहीं रहा गया और आपको पत्र लिख बैठा। वैसे पत्र तो राष्ट्रवादी है, "हिंदू"स्तान की विरासत है। और आप लोग तो ऐसे राष्ट्रवादी हैं जो रेलवे के इंग्लिश स्टाइल टायलेट में लोटा रखवा चुके हैं। इसलिए आप तो खुश होगे मुझपर। उम्मीद है आप आलोचना बर्दाश्त करके कुछ सुधार करेगें क्योंकि कबीर दास जी कहते हैं, 
"निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुधाय।"
मतलब अपने आसपास चमचों की फौज से बेहतर है कि क्रिटिकल लोगों को रखो। हाँ, आपके अच्छे कार्यों की हमेशा तारीफ करूंगा बस यूपी में ज्यादा दूध की गंगा जमना न बहा देना क्योंकि आप तो लाल नदियां बहाते हैं। वैसे भी आपका नाम तो अजमेर ब्लास्ट से जुडे लोगों के साथ भी एनआईए की जांच रिपोर्ट में आ चुका है। आप जैसे लोगों को यहाँ फ्रिंज एलिमेंट्स कहा जाता था, और उसमें भी जब आप ही सरकार में आ जाएं तो लोकतंत्र खतरे में आ ही जाता है। आप तो नेपाल तक जाकर डेमोक्रेसी के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं। अच्छा चलते चलते एक और सवाल पूछने का मन हो रहा है। ये बताइए कि उस दिन सीएम हाउस का शुद्धिकरण क्यों कराया था? शायद आप जिसे हिन्दुत्व कहते हैं वो ब्राह्मणवाद है, जो एक यादव के छोडे हुए घर में जाने के पहले शुद्धिकरण करवाया था। सोसल मीडिया पर बैठे बडे नकली अहिंसावादी लोग आपका खूब सपोर्ट करते हैं, मतलब वो यूपी को जलते हुए देखना चाहते हैं। जबकि खुद तो सुरक्षित बैठे हैं। बस अंत में एक रिक्वेस्ट है कि इस एंटी रोमियो स्क्वाड का नाम बदलकर एंटी कन्हैया दल कर दो तो थोडा सा हिंदू टाइप फील होगा। क्यों इसका नाम एक ईसाई के नाम पर रखा है? भारत में प्रेम के प्रतीक तो  श्रीकृष्ण जी ही हैं।

धन्यवाद ।
आपके उत्तर में आशावादी उत्तर प्रदेश का युवा जो नफरत नहीं प्यार की लडाई के साथ खडा है।

Sunday, March 19, 2017

उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला

गोरखनाथ मठ के महंत और उग्र हिंदू संगठन हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर संघ परिवार ने गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश को हिंदुत्व की दूसरी प्रयोगशाला बनाने की शुरुआत कर दी है. पर क्या उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को मिली ज़बरदस्त चुनावी सफलता से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हिंदू राष्ट्र के अपने मक़सद के एक क़दम और नज़दीक पहुँच गया है? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है और न ही हिंदू राष्ट्र को एक राजनीतिक हक़ीक़त में बदलना आसान है. लेकिन नौ दशक पहले 1925 से शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा को देखें तो समझ में आएगा कि इस दौर में कई तरह के हिंदूवादी समाज-समितियां बनीं, फैलीं और फिर भुला दी गईं. पर आरएसएस अपनी राह से भटका नहीं है. संघ हमेशा बिना लाग लपेट के घोषित करता रहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना उसका ध्येय है- ऐसा हिंदू राष्ट्र जिसमें हिंदू समाज की जातियां अपनी-अपनी नियत जगह बनी रहें पर राजनीतिक फ़ैसले करते समय ये विभाजन अप्रासंगिक हो जाए. यानी वर्णाश्रम धर्म व्यवस्था में बिना छेड़छाड़ किए संघ सभी हिंदू जातियों को 'समरसता' की छतरी के नीचे ले आना चाहता है. पर इसके लिए उसे बार-बार हिंदू समाज को बताना पड़ता है कि वो चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है. इसके लिए कई बार नए-नए दुश्मन गढ़ने पड़ते हैं ताकि इस दुश्मन का भय दिखाकर हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके. पर दुश्मन गढ़कर हिंदुओं को इकट्ठा करना संघ की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है- पूरी रणनीति नहीं. उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में संघ-भाजपा की रणनीति का हर रंग नज़र आया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क़ब्रिस्तान-श्मशान का हवाला देकर हिंदू और मुसलमानों को अलग-अलग खड़ा किया, लेकिन साथ में ग़रीब बस्तियों में गैस सिलेंडर भी पहुँचाए और कामगार तबक़े तक ये संदेश पहुंचाने में भी कामयाब रहे कि नोटबंदी दरअसल 'अमीरों पर चोट' है. हालांकि लोकसभा चुनावों में बीजेपी को इससे भी ज़्यादा समर्थन मिला था पर तब उसे नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का असर माना गया था.  भारतीय जनता पार्टी ने एक भी मुसलमान को टिकट न देकर साफ़ संदेश दे दिया कि वो मुसलमानों के वोट की मोहताज नहीं है.
अगर किसी को बची खुची ग़लतफ़हमी रही भी तो गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी और संघ ने इसी संदेश को साफ़-साफ़ और बड़े-बड़े अक्षरों में यूपी के आसमान पर लिख दिया है. इस फ़ैसले से ये भी स्पष्ट हो गया है कि गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनने जा रहा है. एक मायने में गुजरात के मुक़ाबले उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का प्रयोग ज़्यादा मुश्किल और ज़्यादा पेचीदा साबित होगा पर नरेंद्र मोदी ने जातीय विभाजन को बेकार साबित करके, क़ब्रिस्तान-श्मशान के ज़रिए हिंदू और मुसलमानों को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करके और राष्ट्रवादी-राष्ट्रद्रोही की बहस का इस्तेमाल करके इस प्रयोग की बुनियाद डाल दी है. अब मुख्यमंत्री के तौर पर इस प्रयोग को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी संघ परिवार ने योगी आदित्यनाथ को दी है. गुजरात में हिंदुत्व के प्रयोग और उसके सबक़ योगी के सामने हैं. विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में एक ऐसा उदाहरण पैदा किया जिसकी स्मृति मुसलमान कभी भुला नहीं सकेंगे. अब उत्तर प्रदेश के चार करोड़ मुसलमानों के सामने वो आदित्यनाथ हैं जिनके मुस्लिम विरोधी बयानों के कारण कई बार विवाद खड़े हुए हैं. मसलन, फ़रवरी 2015 में उन्होंने ऐलान किया कि मौक़ा मिलने पर वो "देश की सभी मस्जिदों में गौरी-गणेश की मूर्तियां स्थापित करवा देंगे." ऐसे आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने पर 'सेकुलरों' या मुसलमानों को एतराज़ है तो हुआ करे. अब संघ-बीजेपी को उनकी परवाह कहां है क्योंकि इस शब्द पर से भारतीयों का विश्वास उठाने की जो मुहिम बीस-पच्चीस साल पहले लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू की थी उसका असर अब महसूस किया जाने लगा है. कई मध्यवर्गीय परिवारों में अब धर्मनिरपेक्षता को जनतंत्र का एक महत्वपूर्ण मूल्य नहीं बल्कि कांग्रेसियों और 'फ़ैशनेबल कम्युनिस्टों' का ढकोसला समझा जाने लगा है. पर यहां तक पहुंचने के लिए संघ और भारतीय जनता पार्टी ने ज़बरदस्त लचीलापन दिखाया.
उस दौर में जब महात्मा गाँधी पर हमला करने से पहले उनके कट्टर आलोचक भी दो बार सोचते थे और समाजवाद के ज़रिए बराबरी का सपना साकार करने की बात होती थी, उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी ने 'गांधीवादी समाजवाद' को भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य घोषित कर दिया था. किसी और राजनीतिक ताक़त की ओर से ऐसा लचीलापन दिखाने के उदाहरण कम ही मिलते हैं. भले ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर बनाने को बीजेपी ने चुनावी मुद्दा न बनाया हो पर बीजेपी नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान इसे बार-बार कुरेदा ज़रूर था. बीजेपी के नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बीबीसी से कहा भी था, "अगले दो साल में मैं राम जन्मभूमि मंदिर बनवा दूंगा." बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का अकेला मुद्दा सीधे-सीधे हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा कर चुका है. अभी ये विवाद सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती रही है कि मामला अदालत के ज़रिए या आपसी सुलह-समझौते से निपटाया जाना चाहिए. पर अगले कुछ बरसों में इस विवाद को किसी न किसी नतीजे तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी और अगर अयोध्या में मंदिर बना तो योगी आदित्यनाथ की सरकार इसका विरोध करने वालों के प्रति कैसा रुख़ अपनाएगी अभी इसकी सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है.सत्ता में भागीदारी से अलग कर दिए गए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में तब क्या इतनी इच्छा शक्ति बाक़ी रह जाएगी कि वो मज़बूती से अपना विरोध भी दर्ज करवा पाएं?
आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की इस नई प्रयोगशाला में कई प्रयोग किए जाने हैं. देखते रहिए.

Tuesday, March 14, 2017

सपा की हार की समीक्षा

कमियाँ और कारण  बहुत होंगे उनमें से एक प्रमुख कारण -
2012 में समाजवादी पार्टी ने पूरी सीटों पर चुनाव लड़ा था और 2.2 करोड़ वोट मिले थे जो कुल मतदान का लगभग 29 % था हर सीट पर औसतन 54000 वोट मिले थे और 224 सीट जीती थी. 2017 में समाजवादी पार्टी ने 311 सीट पर चुनाव लड़ा और 1.89 करोड़ वोट मिले जो कुल मतदान का 22 % है और गठबंधन के साथ जोड़कर 403 सीट पर 28 प्रतिशत से ज़्यादा है और हर सीट पर लगभग 60000 वोट मिले है और मात्र 47 +7 = 54सीट जीत पायी है. 
भाजपा गठबंधन को क़रीब 41 प्रतिशत और समाजवादी पार्टी गठबंधन को 28 प्रतिशत वोट मिले है इस चुनाव में भाजपा और सपा के बीच वोटों का जो क़रीब 13 प्रतिशत का अंतर है उसने क़रीब 4-5 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं का वोट बँटकर बसपा को मतदान  हुआ है 97 मुस्लिम प्रत्याशियों के वजह से और कुछ फ़तवा जारी करने वालों का भी इज़्ज़त सम्मान होगा और क़रीब 2 प्रतिशत निषाद वोट जो सपा के साथ रहता था वह और  क़रीब 3-4 प्रतिशत लोहार, प्रजापति, नाई ,पाल और प्रत्याशी की जाति का वोट जो सपा के साथ रहता था वह सपा संगठन के इन जतीयो के नेताओ के सक्रियता में कमी और भाजपा rss के यादववाद के झूठे प्रचार और बनाए हुए यादव विरोधी माहौल और चुनावी वादों के चलते भाजपा को गया इस बार वही अंतर पैदा हुआ है और विधानसभा वार सपा और भाजपा के बीच हार जीत का जो अन्तर है वो यही वोट है. और कुछ वोट मशीन में भी बना दिया होगा भाजपा वालों ने उसकी भी जाँच हो. 

राहुल गांधी बनाम कॉरपोरेट

*साल था 2010। उड़ीसा में "नियमागिरी" के पहाड़। जहां सरकार ने वेदांता ग्रुप को बॉक्साइट खनन करने के लिए जमीन दे दी। आदिवासियों ने व...